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उत्तराखंडः यहां प्रसव के बाद हो रही महिलाओं की किडनी फेल

Sun, 21 Feb 2016 01:23 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, हल्द्वानी
ब्यूरो / अमर उजाला, हल्द्वानी Updated Sun, 21 Feb 2016 01:23 PM IST
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women kidney fail after delivery in sushila tiwari hospital.

हल्द्वानी के डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल में प्रसव के बाद किडनी फेल होने से कुछ दिनों के भीतर कथित तौर पर पांच महिलाओं की मौत होने की खबर से अस्पताल में खलबली मच गई है।

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इनमें अस्पताल के ही एक वार्ड ब्वाय की पत्नी भी शामिल है। यह सनसनीखेज मामला सामने आने पर अस्पताल प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है, साथ बेहोशी (एनस्थीसियो) के लिए इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन का प्रयोग करने पर भी रोक लगा दी है।
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इधर, इसी तरह के मामले से पीड़ित दो महिलाओं का सुशीला तिवारी अस्पताल में इलाज भी किया जा रहा है। हालांकि अभी तक मौत की वजहों का असली कारण क्या रहा है, इस पता नहीं चला है। डॉक्टरों की टीम इन मौत के कारणों की जांच में लगी है।
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जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत एसटीएच में प्रतिमाह लगभग 15 -16 डिलीवरी होतीं हैं। इनमें से 4-5 डिलीवरी केसों में जटिलता होने पर उनके आपरेशन भी करने पड़ते हैं। बताते हैं कि डिलीवरी के आपरेशन के दौरान बेहोशी के लिए प्रसूता को एलएस एनस्थीसिया (लोअर स्पाइन एनस्थीसिया) दिया जाता है।

बताते हैं कुछ दिनों के दौरान डिलीवरी के बाद कथित तौर पर रीनियल फेलोयर (किडनी फेल) होने के बाद पांच महिलाओं की मौत हो चुकी है। चर्चा है कि इस वजह से हेमा बिष्ट (27 वर्ष) की दो दिन पूर्व, रजनी (25 वर्ष) तीन दिन पूर्व, नंदनी (25 वर्ष) चार फरवरी, रेखा (38 वर्ष) एक सप्ताह पूर्व मौत हुई है।

एनस्थीसिया की दवा को फिलहाल बंद किया

women kidney fail after delivery in sushila tiwari hospital.

एसटीएच के ही वार्ड ब्वाय की पत्नी की भी डिलीवरी के बाद किडनी फेल की वजह मौत बताई जा रही है। इसके अलावा अस्पताल की स्टाफ नर्स सुनीता (25 वर्ष) की पांच दिन पहले डिलीवरी हुई थी। लेकिन स्टाफ नर्स की भी हालत बिगड़ गई और वह चार दिन से आईसीयू में भर्ती है। इसी तरह मुन्नी देवी (50 वर्ष) नाम की महिला का यूटस का आपरेशन हुआ था।

आपरेशन के बाद इस महिला को भी पेशाब न आने की शिकायत हुई। जिसे परिजन एक निजी अस्पताल ले गए। जहां इलाज महंगा पड़ने पर फिर यहां एसटीएच ले आए। इस महिला को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। बताते हैं कि इस महिला को भी किडनी संबंधित दिक्कत हुई है।

इस तरह से मौतें होने की बात सामने आने के बाद डिलीवरी के मामलों में अब अस्पताल में प्रयोग की जा रही एनस्थीसिया की दवा को फिलहाल बंद कर दिया है। दूसरी दवाओं को मंगा कर इलाज शुरू किया गया है। एसटीएच में डिलीवरी के बाद कथित तौर पर किडनी फेल होने से महिलाओं की मौत होने की खबर से एनस्थीसिया या प्रसूति रोग विभाग की ओर से अस्पताल प्रशासन को अवगत नहीं कराया गया।

मरीजों के प्रकरण में ‘लामा’ लिखकर दबाने की भी चर्चा है। यह खबर शनिवार को अस्पताल में चर्चाओं से शुरू हुई तो आग की तरह फेल गई। अस्पताल प्रशासन भी सतर्क हो गया है तथा डिलीवरी के बाद किडनी फेल होने से मरी महिलाओं के मामलों की फाइलें चिकित्सा अधीक्षक डा. एके पांडे ने अपने कब्जे में ले ली हैं तथा जांच पड़ताल शुरू कर दी है।

चिकित्सा अधीक्षक डा. पांडे ने बताया कि डिलीवरी के दौरान बेहोशी के लिए लगाए जाने वाले इंजेक्शन के प्रयोग पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। इस इंजेक्शन की आपूर्ति ठेकेदार द्वारा की जाती है। उन्होंने बताया कि प्रसूताओं में किडनी फेल होने की वजह क्या रही, इसका पता लगाया जा रहा है। वह पूरे मामले की जांच वह स्वयं कर रहे हैं।

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