जानकी की आवाज पर चलती-रुकती है बस...
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जानकी खोलिया की आवाज पर बस चलती-रुकती है। जी हां, देहरादून-ऋषिकेश रूट पर पहली बार परिवहन निगम की बस में महिला कंडक्टर टिकट काट रही हैं।
संविदा कर्मी के रूप में कार्य कर रही जानकी को देख सालों से इस रूट पर सफर कर रहे यात्री अपनी उत्सुकता नहीं रोक पाते। कुछ जानकी से बैक ग्राउंड के बाबत सवाल करते हैं तो कुछ उत्सुकता भरी निगाहों से ताकते हैं उसके टिकट मशीन पर चलते सधे हाथों को।
वह किस तरह सवारियों को पुकार रही हैं या ड्राइवर को किस अंदाज में बस रोकने को कह रही हैं, सवारियों की निगाह इस पर भी रहती है।
भीमताल से भेजी गईं दून
टिकट काटने और सवारियों को बकाया लौटाने के काम से फारिग होने के बाद जानकी मुस्कराते हुए सवालों के जवाब देती हैं। बकौल जानकी उनका पिछली 16 जुलाई को ही भीमताल से देहरादून स्थानांतरण हुआ है।
वह वहां नैनीताल-भीमताल रूट पर चलती रही हैं। टुकड़ों-टुकड़ों में 10 साल तक काम किया है। अबकी स्थायी नियुक्ति के लिए उन्हें 90 दिन ड्यूटी निभाने को दून भेजा गया है।
महिला होने के नाते मिलता है सम्मान
जानकी के मुताबिक आम तौर पर पुरुषों का क्षेत्र समझे जाने के बावजूद उन्हें महिला होने के नाते इस काम में दिक्कत महसूस नहीं हुई। बल्कि महिला होने के नाते और सम्मान ही मिलता है।
जिस तरह पुरुष कंडक्टरों के साथ यात्रियों के छुट्टे पैसे या जगह-जगह बस रोकने को लेकर विवाद पेश आते हैं, उस तरह महिला होने के नाते मुझसे सवारियां ज्यादा हील-हुज्जत नहीं करतीं।
करके खाना अच्छा लगता है
जानकी के पति हैं और दो बेटे भी। एक बेटा एडवेंचर स्पोट्र्स इंस्ट्रक्टर है तो एक निजी व्यवसाय कर रहा है। उनकी शादी भी हो चुकी है। इसके बावजूद और उम्र 50 वर्ष से अधिक होने के बाद भी जानकी का यकीन खुद करके खाने में है।
उनका कहना है कि घर में बेटे-बहुएं सब हैं, लेकिन अपनी मेहनत से जो मिले, उसके साथ जिंदगी बसर करना बेहतर लगता है।
(नोटः इस खबर से संबंधित किसी भी सुझाव या सवाल के लिए मेल आईडी-pravesk@ddn.amarujala.com और इस नंबर-9675859054 पर संपर्क कर सकते हैं।)