वन्य जीवों के शिकार के लिए उत्तराखंड के जंगलों में लगाई भीषण आग, रेंजर को जल्द बुझाने के निर्देश
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पंचाचूली का जंगल एक बार फिर से धधक उठा है। इस बार भी कस्तूरा मृग और अन्य वन्य जीवों के अवैध शिकार के लिए जंगल की तलहटी में आग लगाए जाने की आशंका है।
अवैध शिकार की आशंका को देखते हुए वन विभाग अब मंगलवार को वन पंचायत सरपंचों के साथ बैठक करेगा।
शीतकाल में उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हिमपात होने के बाद भोजन की तलाश में कस्तूरा मृग, मोनाल, हिरन, घुरड़, काकड़ आदि वन्य जीव तलहटी की ओर आते हैं। इनको इस क्षेत्र से बाहर निकालने के लिए अवैध शिकार करने वाले तलहटी को आग के हवाले कर देते रहे हैं।
मुन्स्यारी से करीब 40 किलोमीटर दूर इस क्षेत्र में आबादी नहीं
पिछली कई जांचों में इसकी पुष्टि भी हुई है। इस बार भी यही आशंका जताई जा रही है। मुन्स्यारी से करीब 40 किलोमीटर दूर इस क्षेत्र में आबादी नहीं है। पांच चोटियों, बुग्यालों और देवदार के जंगल के कारण यह जगह पर्वतारोहण और ट्रैकिंग करने वालों की पसंदीदा जगह है।
एसडीएम केएन गोस्वामी ने वन रेंजर पूरन सिंह देउपा को आग पर काबू पाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने आग लगाने वालों पर वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1986 के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज करने एवं वन्य जीव-जंतुओं का शिकार रोकने के लिए मंगलवार को वन पंचायत सरपंचों के साथ बैठक कर ठोस रणनीति बनाने के भी निर्देश दिए हैं।