फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   why people attempt suicide

केवल पौड़ी में ही क्यों हो रही है आत्महत्या?

Tue, 26 Aug 2014 09:49 PM IST
Updated Tue, 26 Aug 2014 09:49 PM IST
विज्ञापन
 why people attempt suicide

पिछले छह वर्षों के आंकड़ों पर ही नजर डालें तो केवल पौड़ी जिले में आत्महत्या करने वालों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी चौंकाने के साथ ही चिंता में भी डाल देती है।

विज्ञापन


इसी एक सप्ताह में तीन आत्महत्याएं जीवन के प्रति निराशा की ओर इशारा करती है। हालांकि इन तीनों ही आत्महत्या के पीछे प्रथम दृष्टया कोई साफ कारण पता नहीं चल पाया है।
विज्ञापन


छह वर्षों में अब तक हुई 125 से अधिक आत्महत्याओं के मामले में पुलिस पचास फीसदी मामलों के तह में नहीं पहुंच पाई है।

जबकि पचास फीसदी मामलों में प्रेम-प्रसंग, बेरोजगारी, पारिवारिक और मानसिक तनाव, आर्थिक तंगी,सफलता न मिल पाना, बीमारी आदि कारण गिनाते हुए केस पर फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई है।

विज्ञापन
विज्ञापन

आत्महत्या की घटनाओं का विवरण

 why people attempt suicide

जनपद के रेगुलर पुलिस क्षेत्र में छह वर्षों में अब तक 125 लोग खुदखुशी कर चुके हैं। जिले में 2009 में रेगुलर पुलिस क्षेत्र में आत्महत्या की मात्र 16 घटनाएं हुई थी। 2010 में इनकी संख्या बढ़कर 20 हो गई।

इस वर्ष अब तक आत्महत्या की 32 घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें पांच घटनाएं पौड़ी थाना क्षेत्र में, 23 कोटद्वार क्षेत्र में, दो घटनाएं लक्ष्मणझूला क्षेत्र में और एक घटना महिला थाना क्षेत्र श्रीनगर में हुई है।

पौड़ी जिले में आत्महत्या की घटनाओं का विवरण
वर्ष-----------आत्महत्या की संख्या
2009--------16
2010--------20
2011--------29
2012--------21
2013--------07
2014--------32

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

 why people attempt suicide

आज समाज में असुरक्षा बढ़ती जा रही है। कुछ लोगों में डिप्रेशन जल्दी बढ़ जाता है। वही इस तरह के गलत कदम उठा लेते हैं। - डा. लता गैरोला विभागाध्यक्ष मनोविज्ञान हेनब गढ़वाल विवि श्रीनगर

पहले संयुक्त परिवार होते थे। लोगों का समाज से सीधा संपर्क रहता था। तनाव पर व्यक्ति लोगों और अपने परिवार के बीच अपनी बात रखता था। ऐसी परिस्थितयों में सामाजिक संस्थाएं और परिवार सेफ्टी वाल का काम करते थे। अब इन संस्थाओं के कमजोर होने से इस तरह की स्थितियां बन रही हैं।-
-प्रो. जेपी पचौरी समाशास्त्र विभागाध्यक्ष हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विवि श्रीनगर

आत्महत्या की घटनाओं का बढ़ना चिंता का विषय है। इन्हें रोकने के लिए सामूहिक रूप से विचार कर आगे आने की जरूरत है।-अजय जोशी पुलिस अधीक्षक पौड़ी

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed