केवल पौड़ी में ही क्यों हो रही है आत्महत्या?
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पिछले छह वर्षों के आंकड़ों पर ही नजर डालें तो केवल पौड़ी जिले में आत्महत्या करने वालों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी चौंकाने के साथ ही चिंता में भी डाल देती है।
इसी एक सप्ताह में तीन आत्महत्याएं जीवन के प्रति निराशा की ओर इशारा करती है। हालांकि इन तीनों ही आत्महत्या के पीछे प्रथम दृष्टया कोई साफ कारण पता नहीं चल पाया है।
छह वर्षों में अब तक हुई 125 से अधिक आत्महत्याओं के मामले में पुलिस पचास फीसदी मामलों के तह में नहीं पहुंच पाई है।
जबकि पचास फीसदी मामलों में प्रेम-प्रसंग, बेरोजगारी, पारिवारिक और मानसिक तनाव, आर्थिक तंगी,सफलता न मिल पाना, बीमारी आदि कारण गिनाते हुए केस पर फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई है।
आत्महत्या की घटनाओं का विवरण
जनपद के रेगुलर पुलिस क्षेत्र में छह वर्षों में अब तक 125 लोग खुदखुशी कर चुके हैं। जिले में 2009 में रेगुलर पुलिस क्षेत्र में आत्महत्या की मात्र 16 घटनाएं हुई थी। 2010 में इनकी संख्या बढ़कर 20 हो गई।
इस वर्ष अब तक आत्महत्या की 32 घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें पांच घटनाएं पौड़ी थाना क्षेत्र में, 23 कोटद्वार क्षेत्र में, दो घटनाएं लक्ष्मणझूला क्षेत्र में और एक घटना महिला थाना क्षेत्र श्रीनगर में हुई है।
पौड़ी जिले में आत्महत्या की घटनाओं का विवरण
वर्ष-----------आत्महत्या की संख्या
2009--------16
2010--------20
2011--------29
2012--------21
2013--------07
2014--------32
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
आज समाज में असुरक्षा बढ़ती जा रही है। कुछ लोगों में डिप्रेशन जल्दी बढ़ जाता है। वही इस तरह के गलत कदम उठा लेते हैं। - डा. लता गैरोला विभागाध्यक्ष मनोविज्ञान हेनब गढ़वाल विवि श्रीनगर
पहले संयुक्त परिवार होते थे। लोगों का समाज से सीधा संपर्क रहता था। तनाव पर व्यक्ति लोगों और अपने परिवार के बीच अपनी बात रखता था। ऐसी परिस्थितयों में सामाजिक संस्थाएं और परिवार सेफ्टी वाल का काम करते थे। अब इन संस्थाओं के कमजोर होने से इस तरह की स्थितियां बन रही हैं।-
-प्रो. जेपी पचौरी समाशास्त्र विभागाध्यक्ष हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विवि श्रीनगर
आत्महत्या की घटनाओं का बढ़ना चिंता का विषय है। इन्हें रोकने के लिए सामूहिक रूप से विचार कर आगे आने की जरूरत है।-अजय जोशी पुलिस अधीक्षक पौड़ी