वीकेंड: यात्री पहुंचे हरिद्वार, 'प्रवासी' उड़ान भरने को तैयार, मन मोह लेंगी गंगा घाटों की ये तस्वीरें...
तापमान में वृद्धि होने के साथ प्रवासी राजहंस स्वदेश वापसी की उड़ान भरने के लिए गढ़वाल के अलग-अलग इलाकों से हरिद्वार पहुंचने लगे हैं। मिस्सरपुर गंगा घाट में 100 से 120 राजहंस का झुंड पहुंचा है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मौसम में बदलाव और कोरोना संक्रमण का डर खत्म होने के बाद एक बार फिर से हरिद्वार में बाहरी राज्यों के श्रद्धालुओं और सैलानियों की संख्या बढ़ने लगी है। बड़ी संख्या में लोग शनिवार और रविवार को हरिद्वार पहुंचे और गंगा में डुबकी लगाई। सुबह से शाम तक गंगा घाटों पर काफी संख्या में यात्री नजर आए। बाजरों में भी खूब भीड़ रही।
पिछले पखवाड़े बारिश और ठंड के कारण हरिद्वार घूमने के लिए काफी कम लोग पहुंच रहे थे। बर्फबारी देखने के लिए पहाड़ों की तरफ काफी संख्या में सैलानी रुख कर रहे थे। यहां बहुत कम यात्री ही रुक रहे थे। ऐसे में हरकी पैड़ी समेत सभी गंगा घाटों पर बहुत कम श्रद्धालु नजर आते थे। पिछले कुछ दिनों से मौसम बदल रहा है। तपमान बढ़ रहा है। ऐसे में दिल्ली एनसीआर, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा से बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचने लगे हैं।
वहीं तापमान में वृद्धि होने के साथ प्रवासी राजहंस स्वदेश वापसी की उड़ान भरने के लिए गढ़वाल के अलग-अलग इलाकों से हरिद्वार पहुंचने लगे हैं। मिस्सरपुर गंगा घाट में 100 से 120 राजहंस का झुंड पहुंचा है। मिस्सरपुर समेत गंगा के घाटों पर राजहंस के झुंड का आने का सिलसिला जारी है। मार्च पहले सप्ताह तक प्रवासी राजहंस अपने देश लौट जाएंगे।
सुबह से ही हाईवे पर बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों को रैला लगा हुआ था। जैसे जैसे दिन चढ़ा गंगा घाटों पर लोगों की भीड़ बढ़ने लगी। श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान करने के बाद मंदिरों में जाकर दर्शन किए। श्रद्धालुओं ने शहर के अपर रोड, बड़ा बाजार, मोती बाजार, सुभाष घाट समेत अन्य बाजारों में श्रद्धालुओं ने खरीदारी भी की।
उत्तराखंड के हरिद्वार में गंगा तट समेत अन्य तालाब और वैटलैंड में आने वाले राजहंस मुख्यत कजाकिस्तान से आते हैं। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के जंतु एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग के एमेरिटस प्रोफेसर डॉ. दिनेश भट्ट के शोध छात्रों की टीम प्रवासी पक्षियों की निगरानी करती है।
शोध छात्र आशीष कुमार आर्य ने बताया कि राजहंस करीब 8600 फीट ऊंचाई के हिमालयी क्षेत्रों को पार कर मंगोलिया, कजाकिस्तान, चीन, नेपाल और भूटान से शीतकालीन प्रवास के लिए भारतीय उपमहाद्वीप में आते हैं।डॉ. दिनेश भट्ट ने बताया की प्रवासी पक्षियों का पलायन करना विवशता है। लगभग 40 डिग्री उत्तरी अक्षांश से ऊपर जितने भी शीत प्रदेश हैं, वहां 5 से 6 माह तक बर्फ जमी रहती है।
इस प्रतिकूल मौसम में पक्षियों को वहां खाने पीने में काफी दिक्कतें होती हैं। उनका प्राकृतिक आवास बर्फ गिरने से बुरी तरह प्रभावित होता है। जिससे पक्षियों के पास पलायन के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं होता। यह पलायन इनके शारीरिक एवं मानसिक क्रियाओं में मौसमी परिवर्तन के असर से संभव हो पाता है। प्रो भट्ट ने बताया कि हरिद्वार समेत प्रदेश में तापमान वृद्धि होने लगी है।