उत्तराखंडः इस बीमारी को लेकर चेतावनी जारी, विभागों ने जारी किए आदेश
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उत्तराखंड के कुमाऊं में घोड़े-खच्चरों में जानलेवा ‘ग्लैंडर्स’ को लेकर पशुपालन और वन विभाग ने चेतावनी जारी की है। घोड़ों के सीरम की सैंपलिंग के आदेश भी दिए हैं। राहत की बात यह है कि मार्च तक लिए गए 88 सैंपल की रिपोर्ट निगेटिव आई है। पशुपालन विभाग के अनुसार पिथौरागढ़ और ऊधमसिंह नगर जिला संवेदनशील है।
बरेली में घोड़ों में ग्लैंडर्स रोग मिला है। इसके बाद कई घोड़ों को मार (मर्सी डेथ) दिया गया। हल्द्वानी में करीब 11 साल पहले घोड़े-खच्चरों में ग्लैंडर्स रोग फैला था। इस दौरान 11 घोड़ों को मर्सी डेथ दी गई दी। इसे देखते हुए पशुपालन, वन विभाग ने कुमाऊं में ग्लैंडर्स को लेकर आवश्यक सतर्कता बरत रहा है।
2018 से मार्च 2019 तक 88 घोड़ों के सैंपल लिए गए
अपर निदेशक पशुपालन पीसी कांडपाल ने बताया कि 2018 से मार्च 2019 तक 88 घोड़ों के सैंपल लिए गए थे। इन्हें जांच के लिए राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार भेजा गया था। सभी रिपोर्ट निगेटिव आई थी। अपर निदेशक कांडपाल ने बताया कि ऊधमसिंह नगर, पिथौरागढ़ जिले ग्लैंडर्स रोग के लिए संवेदनशील हैं। उन्होंने कहा कि कुमाऊं के सभी सीवीओ को घोड़ों पर नजर रख सैंपलिंग कराने को कहा गया है। वन संरक्षक पश्चिमी वृत्त डॉ. पराग मधुकर धकाते ने कहा कि बरेली में घोड़ों, खच्चरों में फैले ग्लैंडर्स रोग को देखते हुए अलर्ट जारी किया गया है।
ग्लैंडर्स इंसानों के लिए जानलेवा
घोड़ों में होने वाली ग्लैंडर्स बीमारी लाइलाज है। बीमार घोड़ों के संपर्क में रहने से यह बीमारी मनुष्य को भी हो सकती है। इस बीमारी से पीड़ित घोड़े या मनुष्य की मौत तक हो जाती है। बीमार पशु के मुंह, नाक से निकलने वाले तरल पदार्थ के संक्रमण से यह बीमारी दूसरे पशुओं या इंसानों में भी फैल सकती है।
ये होते हैं लक्षण
- नाक के अंदर फटे छाले दिखना।
- तेज बुखार होना।
- नाक से पीला पानी आना और सांस लेने में तकलीफ , खांसी।
बचाव के उपाय
- स्वस्थ पशुओं को बीमार पशु से अलग रखना चाहिए।
- बीमार जानवर को चारा-पानी अलग देना चाहिए।
हल्द्वानी में सबसे अधिक खच्चर
गौला नदी में ही करीब 500 से अधिक खच्चरों से खनन होता है। वहीं अन्य काम भी खच्चर और घोड़ों से लिया जा रहा है। हल्द्वानी के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. डीसी जोशी के अनुसार हल्द्वानी शहर, आसपास करीब 800 से अधिक खच्चर होंगे।