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ठंड में ग्लेशियरों पर बर्फबारी का प्रभाव जानने में जुटे वाडिया के वैज्ञानिक
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देहरादून। उत्तराखंड के यमुनोत्री, गंगोत्री, पिंडारी, चौराबाड़ी, समेत दर्जन भर से अधिक बड़े प्रमुख ग्लेशियरों का अध्ययन करने के साथ ही वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिक लद्दाख क्षेत्र के काराकोरम स्थित नुब्रा व श्योम बेसिन के ग्लेशियरों पर होने वाले बर्फबारी का अध्ययन कर रहे हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि अध्ययन से नुब्रा व श्योक नदियों में जलप्रवाह के आकलन में आसानी होगी।
यह पहली बार नहीं है जब वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिक काराकोरम क्षेत्रों के ग्लेशियरों पर होने वाले बर्फबारी का अध्ययन कर रहे हैं। इससे पूर्व डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के निर्देश पर संस्थान के वैज्ञानिक काराकोरम क्षेत्र स्थित कई ग्लेशियर ग्लेशियरों का अध्ययन किया था।
काराकोरम क्षेत्र में हैं दुनिया के दो बड़े सियाचिन और बिआफो ग्लेशियर
काराकोरम क्षेत्र में दुनिया के सबसे बड़े ग्लेशियरों में शुमार सियाचिन और बिआफो ग्लेशियर है। सियाचिन ग्लेशियर 73 किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा ग्लेशियर हैं। बिआफो ग्लेशियर 63 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ग्लेशियर है। काराकोरम क्षेत्र में दुनिया के दूसरे नंबर की सबसे ऊंची चोटी के-2 भी है जिसकी ऊंचाई 8611 मीटर है।
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लद्दाख के बाग के नाम से जानी जाती है नुब्रा घाटी
काराकोरम क्षेत्र में स्थित नुब्रा घाटी को लद्दाख के बाग के नाम से भी जाना जाता है। नुब्रा घाटी तीन भुजाओं वाली घाटी के नाम से भी जानी जाती है। सियाचिन ग्लेशियर से निकलने वाली नुब्रा नदी के नाम पर इस घाटी का नामकरण किया गया है। काराकोरम क्षेत्र पांच सौ किलोमीटर है। काराकोरम पर्वत शृृंखला भारत के अलावा अफगानिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान, चीन तकी है।
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लद्दाख के काराकोरम क्षेत्र स्थित नुब्रा, श्योक बेसिन में स्थित ग्लेशियरों पर होने वाली बर्फबारी का अध्ययन किया जा रहा है। ठंड के दौरान नुब्रा व श्योक बेसिन के ग्लेशियरों में बदलाव का अध्ययन किया जा रहा है। अध्ययन में ठंड के साथ ही पूरे सालभर का डाटा जुटाया जा रहा है। ग्लेशियरों पर होने वाली बर्फबारी के अध्ययन के आधार पर नुब्रा व श्योक नदियों के जलप्रवाह का भी अध्ययन किया जाएगा।
-डॉ. अमित कुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलाजी
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यह पहली बार नहीं है जब वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिक काराकोरम क्षेत्रों के ग्लेशियरों पर होने वाले बर्फबारी का अध्ययन कर रहे हैं। इससे पूर्व डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के निर्देश पर संस्थान के वैज्ञानिक काराकोरम क्षेत्र स्थित कई ग्लेशियर ग्लेशियरों का अध्ययन किया था।
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काराकोरम क्षेत्र में हैं दुनिया के दो बड़े सियाचिन और बिआफो ग्लेशियर
काराकोरम क्षेत्र में दुनिया के सबसे बड़े ग्लेशियरों में शुमार सियाचिन और बिआफो ग्लेशियर है। सियाचिन ग्लेशियर 73 किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा ग्लेशियर हैं। बिआफो ग्लेशियर 63 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ग्लेशियर है। काराकोरम क्षेत्र में दुनिया के दूसरे नंबर की सबसे ऊंची चोटी के-2 भी है जिसकी ऊंचाई 8611 मीटर है।
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लद्दाख के बाग के नाम से जानी जाती है नुब्रा घाटी
काराकोरम क्षेत्र में स्थित नुब्रा घाटी को लद्दाख के बाग के नाम से भी जाना जाता है। नुब्रा घाटी तीन भुजाओं वाली घाटी के नाम से भी जानी जाती है। सियाचिन ग्लेशियर से निकलने वाली नुब्रा नदी के नाम पर इस घाटी का नामकरण किया गया है। काराकोरम क्षेत्र पांच सौ किलोमीटर है। काराकोरम पर्वत शृृंखला भारत के अलावा अफगानिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान, चीन तकी है।
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लद्दाख के काराकोरम क्षेत्र स्थित नुब्रा, श्योक बेसिन में स्थित ग्लेशियरों पर होने वाली बर्फबारी का अध्ययन किया जा रहा है। ठंड के दौरान नुब्रा व श्योक बेसिन के ग्लेशियरों में बदलाव का अध्ययन किया जा रहा है। अध्ययन में ठंड के साथ ही पूरे सालभर का डाटा जुटाया जा रहा है। ग्लेशियरों पर होने वाली बर्फबारी के अध्ययन के आधार पर नुब्रा व श्योक नदियों के जलप्रवाह का भी अध्ययन किया जाएगा।
-डॉ. अमित कुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलाजी