वोटिंग की ऐसी कहानी सुन चौंक जाएंगे आप
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जिन्हें मतदान करने में आलस आता हो, उन्हें मतदान के दिन उत्तरकाशी को याद करना चाहिए। बेहद खूबसूरत पर उतनी ही दुर्गम इस पहाड़ी जिले के लोगों में मतदान को लेकर गजब का जज्बा है।
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हाल यह है इस पर्वतीय जिले से मतदान करीब-करीब सत्तर प्रतिशत के आसपास ही रहता आया है। विधानसभा 2012 में भी यहां के लोगों ने करीब सत्तर प्रतिशत मतदान किया था। खास बात यह भी है कि इस जिले में तीन विधानसभा क्षेत्र हैं और तीनों में मतदान का प्रतिशत अधिक रहा था।
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वैसे 70 प्रतिशत से अधिक मतदान करने वाली विधानसभाएं प्रदेश में और भी कई हैं पर ये सब मैदानी जिलों में सिमटी हुई हैं।
एक भी वोट नहीं पाया गया खराब
सत्तर प्रतिशत से अधिक मतदान करने वाले प्रदेश में केवल तीन ही जिले हैं। उत्तरकाशी को छोड़ दिया जाए तो उधमसिंह नगर और हरिद्वार जिला ही है जो इस मानक पर खरा उतरता है।
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पर उत्तरकाशी की बात ही कुछ अलग है। उत्तरकाशी में तीन विधानसभाएं हैं और तीनों विधानसभाओं मे मतदान का प्रतिशत 2012 में 70 प्रतिशत से अधिक रहा। पुरोला में करीब 78 प्रतिशत मतदान हुआ।
यमुनोत्री में 71 और गंगोत्री में करीब 70 प्रतिशत मतदान हुआ। यह तब है जबकि ये तीनों विधानसभाओं अपने में कई दुर्गम स्थानों को समेटे हुए हैं। कई स्थानों पर मतदान के लिए लोगों को बाकायदा पूरा दिन रिजर्व में रखना पड़ता है। इन तीनों विधानसभा क्षेत्र से एक भी वोट खराब नहीं पाया गया।
यहां भी होता रहा है 70 प्रतिशत मतदान
पर कई ऐसी विधानसभाएं भी रहीं जहां मतदान 65 प्रतिशत ही हो पाया। ऐसे में पूरे जिले का औसत 75 प्रतिशत पर आकर सिमट गया था।
इस बार उत्तरकाशी का क्या रुख रहेगा यह तो सात मई को मतदान वाले दिन ही पूरी तरह से स्पष्ट हो पाएगा। पर इतना जरूर है कि पहाड़ की दुर्गम स्थिति होते हुए भी उत्तरकाशी में मतदान के प्रति जज्बा कायम हैं।