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बिना नक्शे के मकान का अब होगा समाधान
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 30 Nov 2014 09:48 AM IST
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बिना नक्शा मकान बनाने वालों के लिए सरकार ने स्वैच्छिक शमन योजना लागू की है। इसके तहत मामलों का एकमुश्त निस्तारण किया जाएगा।
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2000 के सर्किल रेट पर लेंगे शमन शुल्क
उत्तराखंड गठन से पहले बने ऐसे मकानों के निस्तारण के लिए 9 नवंबर 2000 के सर्किल रेट के आधार पर शमन शुल्क लिया जाएगा।
जबकि राज्य गठन के बाद के बने मकानों के लिए शमन शुल्क, चालान (नोटिस जारी होने की तिथि) की तिथि को प्रभावी सर्किल रेट के आधार पर लिया जाएगा।
एकमुश्त धनराशि जमा करने पर शमन शुल्क में 10 फीसदी की छूट भी दी जाएगी। इस योजना में मल्टीपल इकाई और ग्रुप हाउसिंग शामिल नहीं हैं। इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया गया है। सभी प्राधिकरणों में इस योजना के तहत कार्यवाही की जाएगी।
शासनादेश के अनुसार जिन अनाधिकृत निर्माण का चालान नहीं किया गया है, उन भवनों के स्वामी की ओर से निर्माण की पुष्टि के लिए बिजली, पानी और टेलीफोन बिल जमा करना होगा। इनके आधार पर ही शमन योजना की कार्यवाही की जाएगी।
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एमडीडीए में ऑनलाइन स्वीकृति
ऑनलाइन नक्शा स्वीकृति की योजना के तहत मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण में शमन के प्रकरण भी ऑनलाइन व्यवस्था से निस्तारित किए जाएंगे।
जिन विकास क्षेत्रों या विनियमित क्षेत्रों में आनलाइन मानचित्र स्वीकृति करने की व्यवस्था नहीं है, उनमें पूर्व में मानचित्र स्वीकृति या शमन के लिए प्रचलित व्यवस्थानुसार आवेदन स्वीकार कर निस्तारण किया जाएगा।
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चार किस्तों में भी जमा करा सकते हैं शुल्क
स्वैच्छिक शमन योजना के तहत मकान मालिकों पर बोझ न पड़े, इसका भी ध्यान रखा गया है। इसके तहत शमन शुल्क अधिकतम चार समान त्रैमासिक किस्तों में भी जमा किया जा सकता है। जिस पर कोई ब्याज नहीं देना होगा।
हालांकि उक्त निर्धारित अवधि के बाद देय शेष राशि पर 12 प्रतिशत सामान्य ब्याज भी लिया जाएगा। देर से दिए जाने वाले ऐसे शुल्क को जमा करने के लिए अधिकतम छह माह की अवधि निर्धारित की जाती है।
स्वैच्छिक शमन योजना के ये प्रावधान तीन माह तक ही प्रभावी रहेंगे। इस दौरान संबंधित प्राधिकरण या अभिकरण अपने यहां स्थानीय स्तर पर कैंप लगाकर शमन के प्रकरणों का निस्तारण सुनिश्चित करेंगे।
शमन के मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए प्राधिकरण की ओर से स्थल निरीक्षण कर ऐसे मकानों की पुष्टि की आवश्यकता नहीं होगी।
इसके लिए काउंसिल ऑफ आर्कीटेक्ट में पंजीकृत वास्तुविद एवं संबंधित आवेदक की ओर से आवेदन पत्र के साथ संलग्न मानचित्र में प्रदर्शित निर्माण मौके के अनुरूप दर्शाए जाने संबंधी संयुक्त रूप से शपथ पत्र भी देना होगा।
प्रकरणों के निस्तारण के संबंध में प्राधिकरणों को विस्तृत सूचना शासन को भी उपलब्ध करानी होगी।