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शासन से परेशान कुलपति ने दिया इस्तीफा

Tue, 24 Feb 2015 11:37 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 24 Feb 2015 11:37 AM IST
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vice chancellor resigns.

उत्तराखंड सरकार और शासन की बेरुखी से तंग आकर हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एमसी पंत ने इस्तीफा दे दिया है।

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राजभवन ने उनका त्यागपत्र मंजूर कर लिया है। प्रो. पंत शासन की हीला हवाली और अड़ियल रवैये से बेहद आहत थे। कहा कि मैं अपने प्रदेश का भला करने का सपना लेकर आया था, लेकिन डेढ़ साल में ही सपने चकनाचूर हो गए।
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ऐसे हालात में यहां की शिक्षा का भला होना मुश्किल है। अधूरे सपने के साथ वापस जा रहा हूं। प्रो. पंत का प्रभार श्रीदेव सुमन विवि के कुलपति यूएस रावत को सौंपा गया है। इससे पूर्व कुमाऊं विवि, उत्तराखंड तकनीकी विवि के कुलपति भी इस्तीफा देकर प्रदेश को अलविदा कर चुके हैं।
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इससे पहले वर्ष 2013 में प्रदेश के सभी चिकित्सा संस्थानों को साथ लाने के लिए प्रदेश सरकार ने हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा विश्वविद्यालय की घोषणा की। 18 दिसंबर 2013 को लखनऊ के राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के निदेशक प्रो. एमसी पंत को इसका कुलपति बनाया गया।

18 फरवरी 2014 को अधिनियम के तहत विवि का स्थापना कर दी गई। प्रो. पंत को लाने का मकसद प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा के साथ कैंसर जैसी बीमारी के शोध को नया आयाम देना था। मगर कुछ दिनों बाद ही उनसे बेरुखी शुरू हो गई।

प्रो. एमसी पंत का कार्यकाल वर्ष 2016 में पूरा होना था, लेकिन हस्तक्षेपों के चलते उन्होंने इस्तीफा दे दिया। हालांकि इस्तीफे की वजह उन्होंने खराब स्वास्थ्य बताया है। इस्तीफा मंजूर करने के बाद प्रभार श्रीदेव सुमन विवि के कुलपति को सौंपा गया है।

तीन बड़े कामों में डाले रोड़े
1. प्रो. पंत को चिकित्सा विवि के लिए जमीन दिलाने की जिम्मेदारी दी गई थी। प्रो. पंत ने एक बार 33 एकड़, दूसरी बार 22 एकड़ भूमि की जांच कर डीएम से संस्तुति की फाइल शासन को भिजवाई। लेकिन मंजूरी नहीं दी गई। नतीजतन चिकित्सा विवि आज तक किराए के तीन कमरों में चल रहा है।


2. चिकित्सा विवि को शासन ने प्रदेश के सभी मेडिकल और नर्सिंग कालेजों की संबद्धता की जिम्मा सौंपा। इसके लिए संबद्धता शुल्क पर सहमति की फाइल शासन भेजी गई। मगर एक साल तक पत्राचार के दौरान फाइल धूल फांकती रही। आखिरकार दो दिन पहले शासन ने इसे मंजूरी दी।

3.  सूत्रों के मुताबिक प्रो. पंत ने जमीन कम होने के कारण दून हॉस्पिटल (9 एकड़) को मेडिकल कालेज बनाने के बजाए कहीं और 20 एकड़ जमीन पर नया कालेज और अस्पताल खोलने को कहा था। मगर शासन के अफसरों ने जिद नहीं छोड़ी। दून हॉस्पिटल को ही मेडिकल कालेज बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

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