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Dehradun News: डाकपत्थर महाविद्यालय बना एबीवीपी का अभेद्य किला

Wed, 08 Nov 2023 12:04 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Wed, 08 Nov 2023 12:04 AM IST
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Veer Shaheed Kesari Chand Government Post
I10 बार एबीवीपी ने दर्ज की जीत, दो बार बागी जीते
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Iधीरे-धीरे कम हुई एनएसयूआई की ताकतI

वीर शहीद केसरी चंद राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय डाकपत्थर के स्थापना काल के तीन वर्षों को छोड़ दे तो छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी और आर्यन संगठन की सीधी टक्कर रही है। शुरूआत के तीनों वर्षों तक छात्रसंघ चुनाव में एनएसयूआई के प्रत्याशी अध्यक्ष पद पर काबिज रहे। लेकिन उसके बाद एनएसयूआई की ताकत कमजोर पड़ गई और छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी और आर्यन छात्र संगठन का उदय हो गया। एबीवीपी ने अब तक 10 बार अध्यक्ष पद के चुनाव में जीत हासिल की है।

महाविद्यालय में वर्ष 1998 में एनएसयूआई के भावनी शंकर उर्फ विकास शर्मा अध्यक्ष रहे। दूसरे चुनाव में एनएसयूआई के अमित त्यागी और तीसरे चुनाव में एनएसयूआई के मासूम अंसारी अध्यक्ष निर्वाचित हुए। उसके बाद से आज तक एनएसयूआई का अध्यक्ष नहीं बना। 2003 में एबीवीपी के विपुल अग्रवाल ने पहली बार संगठन का खाता खोला।
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वर्ष 2004 में एबीवीपी के विनीत चौहान और 2005 के चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी अरुण तोमर अध्यक्ष चुने गए। वर्ष 2006 में एबीवीपी के गुरप्रीत सिंह, वर्ष 2007 से लगातार क्रमश: आर्यन छात्र संगठन के मनीष चतुर्वेदी, उत्तम मेहरा, दिलीप सिंह, अध्यक्ष चुने गए। वर्ष 2010 में एक बार फिर से एबीवीपी के नितीश पुंडीर ने अध्यक्ष पद पर कब्जा किया। 2011 से लगातार दो वर्षों से आर्यन संगठन के दिलीप और राहुल शर्मा अध्यक्ष निर्वाचित हुए।
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दो साल बाद फिर से एबीवीपी ने अध्यक्ष पद हासिल किया। विपिन रावत, खजान राणा क्रमश: अध्यक्ष चुने गए। वर्ष 2015 में एक फिर आर्यन छात्र संगठन के अरविंद चौहान अध्यक्ष चुने गए। वर्ष 2016 में एबीवीपी के प्रेम नौटियाल और 2017 भाग्यश्री की जीत हुई। वर्ष 2018 में एबीवीपी के बागी गुट से सलमान, 2019 एबीवीपी के बागी गुट से प्रिंस राणा अध्यक्ष चुने गए। वर्ष 2020 और वर्ष 2021 में कोरोना महामारी के चलते चुनाव नहीं हो पाए। 2022 में एबीवीपी की लक्ष्मी वर्मा जीती और अब एक बार फिर वर्ष 2023 में आशीष बिष्ट ने अध्यक्ष पद पर जीत प्राप्त कर एबीवीपी के परचम को बुलंद किया है।
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