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बिना नियम, काहे का हंगामा भाई...

Tue, 23 Jul 2013 06:13 PM IST
देहरादून/ब्यूरो
देहरादून/ब्यूरो Updated Tue, 23 Jul 2013 06:13 PM IST
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Van operator may not permit private school van

राजधानी में बच्चों को ढोने के लिए वैन संचालक निजी तौर पर स्कूल वैन का परमिट नहीं ले सकते हैं। ऐसे में बिना परमिट के वैन से स्कूली बच्चों को ढोया जाना लाजमी है। क्योंकि परमिट मिलेगा नहीं और घर चलाने के लिए कमाई का जरिया चाहिए।

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हालांकि बिना परमिट के सवारी संख्या को ताक पर रख देना इनके संचालन पर सवाल खड़े कर देता है। और इन पर कार्रवाई की जाती है। सोमवार को पुलिस की कार्रवाई के बाद से वैन संचालक परिवहन विभाग के चक्कर काटकर अपनी गाड़ियां वैध कराने के तरीके पूछ रहे हैं।
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लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। दून में सवा सौ से ज्यादा और प्रदेश में सात सौ से ज्यादा स्कूल वैन अवैध तरीके से बच्चों को ढोती हैं। अब पुलिस ने दस दिन का समय देकर सभी को अपना वाहन वैध कराने की चेतावनी दी है। ऐसे में दस दिन बाद फिर इन पर चाबुक चलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।
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बचाव का केवल एक तरीका
अगर वैन संचालक अपनी वैन को कार्रवाई से बचाना चाहते हैं तो वह स्कूल कैब का परमिट परिवहन विभाग से ले सकते हैं। लेकिन यह परमिट उन वाहनों को ही दिया जा सकता है जो एक निश्चित स्कूल के लिए हो और स्कूल के नेतृत्व में ही उनका संचालन होता है। इसका टैक्स प्रति सिटी तीन माह के लिए 90 रुपये पड़ता है।

ऐसा संभव नहीं
एक-एक स्कूल वैन अपने क्षेत्र के दो से तीन स्कूल के बच्चे उठाती हैं। ऐसे में एक स्कूल से कांट्रेक्ट कर लेकर वैन चलाना लाजमी नहीं है। वहीं दूसरी ओर यह भी समस्या है कि स्कूल संचालक खुद इन वैन संचालकों को कांट्रेक्ट लेटर देने के लिए तैयार नहीं होते हैं।


यहां ले सकते हैं निजी परमिट
स्कूल वैन के मानकों को पूरा करने पर दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ आदि राज्यों में वाहन संचालक निजी तौर पर वैन के लिए स्कूल परमिट ले सकते हैं।

'हम परमिट के लिए मानक पूरे करने को तैयार हैं। 2008 से लगातार स्कूल वैन परमिट जारी किए जाने की मांग भी कर रहे हैं। लेकिन आज तक समाधान नहीं किया गया। अब आगे स्थाई समाधान निकले के बाद ही स्कूल वैनों का संचालन होगा।'
सचिन गुप्प्ता, प्रदेश अध्यक्ष स्कूल वैन एसोसिएशन

'शासन से मंजूरी के बाद ही स्कूल वैन परमिट नियम लागू हो सकता है। इस समय केवल मैक्सी कैब ही वैन संचालकों के लिए एक मात्र तरीका है।'
डीसी पठोई, संभागीय परिवहन अधिकारी

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