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टीकाकरण शिविरों में नौनिहालों की जान से खिलवाड़
मनीष चंद्र भट्ट/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 11 Jun 2015 03:26 PM IST
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देहरादून में टीकाकरण के नाम पर कुछ लोग नौनिहालों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं। बकायदा शिविर लगाकर बच्चों को अनाप-शनाप तरीके से टीके लगाए जा रहे हैं।
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टीका लगाने के एवज में शुल्क भी वसूला जा रहा है। मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) कार्यालय ने इस मामले में जांच बैठा दी है। सूत्रों के अनुसार, ग्रामीण और मलिन बस्तियों में विभिन्न जगह ये टीकाकरण शिविर आयोजित हो रहे हैं।
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शिविर के आयोजक पहले स्थानीय लोगों को इस बात का डर दिखाते हैं कि अगर बच्चों को टीके न लगे तो भविष्य में कई बीमारियां हो सकती हैं।
यह भी शिकायतें मिली हैं कि इन शिविरों में टीके लगाते समय मेडिकल साइंस के नियमों का भी पालन नहीं किया जाता है। टीकों को कोल्ड चेन में भी नहीं रखा जा रहा है। इससे नौनिहालों की सेहत भी बिगड़ सकती है। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. एसपी अग्रवाल ने शिकायत मिलने और जांच बैठाने की पुष्टि की है।
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टीकाकरण में ये एहतियात जरूरी
- टीकों कोकोल्ड चेन में रखना जरूरी है
- ध्यान रखें कि टीके एक्सपायरी न हों
- प्रत्येक बच्चे को टीका लगाने के बाद सिरिंज बदली जानी चाहिए
- टीके अधिकृत कंपनी के ही हों
टीकाकरण के शिविर लगाए जाने की शिकायतें मिली हैं। वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले में ऐसे किसी शिविर की अनुमति नहीं दी गई है। शिविर लगाने वालों को चिन्हित किया जा रहा है। हेपेटाइटस-बी और पेंटा वैक्सीन के टीके सरकारी अस्पतालों में निशुल्क लगाए जाते हैं।
- डॉ. एसपी अग्रवाल, सीएमओ
टीकाकरण ठीक से न होने पर बच्चे में इंफेक्शन, रिएक्शन और बुखार हो सकता है। शरीर में जहां पर टीका लगाया जाता है, वहां पर फोड़ा भी बना सकता है। एक्सपायरी टीका लगने या अन्य किस तरह से गलत टीकाकरण से स्थिति जानलेवा हो भी सकती है।
- डॉ. जेपी देवशाली, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ, दून अस्पताल