Uttarkashi Tunnel Rescue: रोबोटिक्स सिस्टम से पता चलेगी श्रमिकों की मनोस्थिति, लखनऊ से पहुंचे वैज्ञानिक
वैज्ञानिक मिलिंद राज ने बताया कि वह राहत एवं बचाव कार्य में लगे कर्नल दीपक पाटिल के बुलाने पर यहां मदद के लिए आए हैं। उन्होंने बताया कि रेस्क्यू रोबोटिक्स सिस्टम बहुत ही पॉवरफुल है। जो खासतौर पर सिलक्यारा सुरंग हादसे में काफी मददगार हो सकता है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सुरंग के अंदर फंसे श्रमिकों की मानसिक स्थिति जानने के लिए रेस्क्यू रोबोटिक्स सिस्टम की मदद ली जाएगी। सोमवार को लखनऊ से रेस्क्यू रोबोटिक्स वैज्ञानिक मिलिंद राज सिलक्यारा पहुंचे। उन्होंने बताया कि इस तकनीक से 24 घंटे सुरंग के अंदर फंसे मजदूरों की मानसिक स्थिति पर नजर रखी सकेगी।
रेस्क्यू रोबोटिक्स वैज्ञानिक मिलिंद राज ने बताया कि वह राहत एवं बचाव कार्य में लगे कर्नल दीपक पाटिल के बुलाने पर यहां मदद के लिए आए हैं। उन्होंने बताया कि रेस्क्यू रोबोटिक्स सिस्टम बहुत ही पॉवरफुल है। जो खासतौर पर सिलक्यारा सुरंग हादसे में काफी मददगार हो सकता है। यह उन जगहों पर हाई स्पीड इंटरनेट सर्विस दे सकता है, जहां मुश्किल से नेटवर्क पहुंचता है।
41 जिंदगियां बचाने की जद्दोजहद: अब सुरंग में मोर्चे पर उतरेगी रैट माइनर्स, जानें क्यों खास है यह टीम
यह सिस्टम सुरंग के अंदर फंसे सभी 41 श्रमिकों की सेहत पर लाइफलाइन पाइप के जरिए नजर रखेगा। यदि श्रमिकों की सेहत में गिरावट आती है या वह असामान्य व्यवहार करते हैं यह सिस्टम इसकी भी जानकारी देगा। यह विडियो, ऑडियो एनालिसिस के साथ सपोर्ट सिस्टम के द्वारा मदद करेगा।
#WATCH | Uttarkashi (Uttarakhand) tunnel rescue | Robotics expert Milind Raj says, "I am here for the mental well-being of the 41 workers stuck in the Silkyara tunnel. This is a homegrown indigenous technology...We have systems to monitor the health of workers round the clock.… pic.twitter.com/gaWtUWNzxL
— ANI (@ANI) November 27, 2023
वायर और वायरलेस दोनों सिस्टम
उन्होंने बताया कि इस रोबोट में वायर और वायरलेस दोनों सिस्टम है। वायर में दिक्कत हुई तो वायरलेस सिस्टम काम करेगा। इस सिस्टम की मदद से हानिकारक गैसों जैसे मीथेन व कार्बन डाई ऑक्साइड का भी पता लगाया जा सकेगा। मिलिंद राज के मुताबिक सेंसर युक्त डिवाइस को लाइफलाइन पाइप से अंदर भेजा जाएगा।
जबकि एक सिस्टम बाहर रहेगा। उन्होंने बताया कि जनवरी 2023 में लखनऊ में अलाया अपार्टमेंट गिरने पर भी उन्होंने रेस्क्यू रोबोटिक्स से मदद की थी। वहां फंसे 14 लोगों को सकुशल बाहर निकालने में इस सिस्टम से काफी मदद मिली थी।