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Uttararakhand Election 2022: हमेशा हॉटसीट रहा पौड़ी, शिवानंद नौटियाल और हेमवंती नंदन बहुगुणा ने यहीं से लड़ा था चुनाव
Sat, 15 Jan 2022 02:49 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sat, 15 Jan 2022 02:49 PM IST
सार
यूपी में 13 विधान सभा चुनावों में यह सीट हमेशा ही हॉटसीट रही है। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री हिमालय पुत्र हेमवती नंदन बहुगुणा यहां की राजनीति की धुरी रहे हैं।
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हेमवती नंदन बहुगुणा
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
उत्तर प्रदेश विधान सभा में 1952 में ही पौड़ी सीट अस्तित्व में आ गई थी। यहां के कई विधायकों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ी है। डा. शिवानंद नौटियाल को शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में अहम योगदान के लिए आज भी याद किया जाता है। उत्तर प्रदेश में पौड़ी सीट के पहले विधायक चंद्र सिंह रावत बने, तो आखिरी विधायक मोहन सिंह रावत गांववासी रहे हैं।
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यूपी में 13 विधान सभा चुनावों में यह सीट हमेशा ही हॉटसीट रही है। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री हिमालय पुत्र हेमवती नंदन बहुगुणा यहां की राजनीति की धुरी रहे हैं। वर्तमान में आरक्षित सीट पौड़ी में राज्य गठन के बाद यह पांचवां विधान सभा चुनाव है।
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मतदाताओं की संख्या
कुल मतदाता- 92900
पुरुष मतदाता- 46813
महिला मतदाता- 46085
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अब तक के विधायक
राज्य बनने से पहले
चंद्र सिंह रावत (पौड़ी साउथ कम चमोली ईस्ट)- 1952 कांग्रेस।
चंद्र सिंह रावत- 1957, 1962, 1967 कांग्रेस।
डा. शिवानंद नौटियाल- 1969 निर्दलीय।
भगवती चरण निर्मोही- 1974, 1977 कांग्रेस।
नरेंद्र सिंह भंडारी- 1980 सीडीएफ, 1989 जनता दल।
पुष्कर सिंह रौथाण- 1985 कांग्रेस।
डा. हरक सिंह रावत- 1991, 1993 भाजपा।
मोहन सिंह रावत गांववासी- 1996 भाजपा।
राज्य गठन के बाद
नरेंद्र सिंह भंडारी- 2002 कांग्रेस।
यशपाल बेनाम- 2007 निर्दलीय।
सुंदर लाल मंद्रवाल- 2012 कांग्रेस
मुकेश कोली- 2017 भाजपा।
विस क्षेत्र के प्रमुख मुद्दे:
- जिला मुख्यालय पौड़ी को अभी तक ट्रंचिंग ग्राउंड की सुविधा नहीं मिल पाई है।
- मुख्यालय में बस अड्डा विगत 15 वर्षों से निर्माणाधीन ही है।
- कंडोलिया थीम पार्क में करोड़ों की धनराशि खर्च होने के बाद बदहाल पड़ा हुआ है।
- एनसीसी अकादमी देवार को लेकर घोषणा से आगे कोई बात नहीं बन पाई है।
- मुख्यालय में रोपवे का निर्माण कार्य वर्षों से अधर में ही लटका हुआ है।
- विधान सभा के ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी पेयजल, स्वास्थ्य व सड़क सुविधा का अभाव बना हुआ है।
- पलायन बढ़ने के साथ-साथ क्षेत्र में लगातार बेरोजगारी बढ़ती जा रही है।
वादे पूरे या अधूरे
पौड़ी विधान सभा क्षेत्र में विगत पांच वर्षों में विकास कार्यों के नाम पर उपलब्धि शून्य है। क्षेत्रीय विधायक ने युवाओं को रोजगार दिए जाने के क्षेत्र में कोई भी कार्य नहीं किया। जिला अस्पताल के पीपीपी मोड में चले जाने के बाद स्वास्थ्य सुविधाओं में और भी ज्यादा गिरावट ही आई है। प्राथमिक, माध्यमिक या उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी कोई सकारात्मक कार्य देखने को नहीं मिला।
- आशीष नेगी, क्षेत्रीय युवा
पांच साल पहले जिन उम्मीदों के साथ जनता ने विधायक को चुनकर सदन में भेजा था। उन सभी उम्मीदों को निराशा मिली है। मंडल मुख्यालय आज वैभवहीन हो गया है। लेकिन स्थानीय विधायक ने इस दिशा में कोई भी कार्य नहीं किया। जबकि जनता आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करने को मजबूर है।
- नमन चंदोला, सामाजिक कार्यकर्ता
अलग राज्य उत्तराखंड की अवधारणा का मूल भाषा व संस्कृति रही है। हम आज तक एक अदद पुस्तकालय तक नहीं खोल पाए हैं। गढ़वाली-कुमाऊंनी लोकभाषा के गूढ़ साहित्यकारों के साहित्य का संरक्षण भी नहीं हो पा रहा है। राजनीति के दिग्गजों की उपेक्षा से इस दिशा में उत्तराखंड पूरी तरह पिछड़ गया है। उम्मीद करते हैं कि जनप्रतिनिधियों में सजगता आए।
- नरेंद्र सिंह कठैत, वरिष्ठ गढ़वाली साहित्यकार
उज्ज्वला योजना, भूमिधरी में अधिकार, स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से मातृशक्ति को मजबूत किया गया है। लेकिन विधान सभा में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाए जाने की आवश्यकता है।
- नीलम जुयाल, गृहणी
पांच साल में कई पेयजल योजनाएं धरातल पर उतारी हैं। क्षेत्र में पहला महाविद्यालय कल्जीखाल खोला गया। समस्त विद्यालयों को फर्नीचर प्रदान किया गया। 450 किमी से अधिक नई सड़कों निर्माण कार्य हुआ है। वर्षों पुरानी मांग बौंसाल पुल निर्माण किया गया। सीता माता सर्किट की संकल्पना साकार रुप ले रही है। बस अड्डा पौड़ी का निर्माण कार्य अंतिम चरण में हैं। एनसीसी अकादमी विचाराधीन है, लेकिन देवार में ही बनेगी। क्षेत्र में हेली सेवा के लिए भूमि चयन की प्रक्रिया गतिमान है। ल्वाली झील का निर्माण हो गया है। स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार हुआ है। यहां 1 हजार एलपीएम का ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया है। 45 एलपीएम का ऑक्सीजन प्लांट सीएचसी कोट भी स्थापित की गई है। प्रत्येक सीएचसी में एक-एक एंबुलेंस दिलाई गई है।
- मुकेश कोली, विधायक पौड़ी
जिन उम्मीदों व आशाओं के साथ जनता ने भाजपा को प्रचंड बहुमत दिया। लेकिन पौड़ी विधान सभा की जनता को महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, बदहाल सड़क व स्वास्थ्य व्यवस्थाएं ही मिलीं। 2017 में जनता ने जिन्हें विधायक चुना, वे विधायक निधि में भ्रष्टाचार करने में व्यस्त रहे। क्षेत्र की समस्याओं की ओर उनका कोई भी ध्यान नहीं रहा। मुख्यमंत्री राहत कोष ऐसे लोगों को दिया गया, जो अपात्र थे। वास्तविक हकदारों तक राहत कोष की धनराशि नहीं पहुंची। विधायक ने सदन में ल्वाली झील के निर्माण व उससे स्थानीय लोगों को फायदे की बात कही। लेकिन वह धरातल पर कई नहीं दिखता है। सीता माता सर्किट, एनएससी अकादमी देवार कोरी घोषणा बनकर रह गए हैं। मंडल मुख्यालय पौड़ी की इससे पहले कभी भी इतनी दुर्दशा देखने को नहीं मिली।
- नवल किशोर, पूर्व प्रत्याशी कांग्रेस