उत्तराखंड मौसमः अगले 24 घंटे के लिए येलो अलर्ट जारी, चिन्यालीसौड़ बाईपास रोड की सुरक्षा दीवार का 30 मीटर हिस्सा ढहा
मौसम विभाग ने अगले 24 घटों में अल्मोड़ा, नैनीताल व पिथौरागढ़ आदि जिलों के लिए येलो अलर्ट भी जारी किया है। देहरादून में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।
विस्तार
मानसून की सक्रियता बढ़ने से सोमवार देर रात से मंगलवार को पूरे दिन राजधानी दून के साथ पहाड़ी जिलों में झमाझम बारिश हुई। इससे पिछले कई दिनों से गर्मी से जूझ रहे लोगों ने राहत की सांस ली।
उत्तराखंड: पिथौरागढ़ में बारिश के बाद पुल बहे, जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे लोग, तस्वीरें...
मौसम विभाग ने अगले 24 घटों में अल्मोड़ा, नैनीताल व पिथौरागढ़ आदि जिलों के लिए येलो अलर्ट भी जारी किया है। देहरादून में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। चमोली जनपद में मंगलवार देर रात से हो रही बारिश जारी है, बारिश से मौसम में ठंडक आ गई है। जनपद में बदरीनाथ हाइवे सुचारू है। वहीं 21 संपर्क मार्ग मलबा आने से अवरुद्ध पड़े हैं।
चिन्यालीसौड़ बाईपास रोड की सुरक्षा दीवार का 30 मीटर हिस्सा ढहा
गंगोत्री हाईवे के लिए महत्वपूर्ण चिन्यालीसौड़ बाईपास रोड की सुरक्षा दीवार 30 मीटर हिस्सा बुधवार की सुबह ढह गया। दो दिनों से लगातार बारिश के चलते यहां दीवार भर-भराकर गिर गई। मलबे के चलते यातायात बाधित हो गया। जिसे खुलवाने पहुंची बीआरओ की टीम का ग्रामीणों ने घेराव कर दिया।
लोगों ने ऑलवेदर रोड निर्माण के चलते ध्वस्त खेती और पशु चुगान के रास्तों का पुनर्निर्माण न होने पर नाराजगी जताई। इस दौरान दीवार के पुननिर्माण से पहले रास्तों के पुननिर्माण की मांग उठाई गई। आश्वासन पर ग्रामीणों का गुस्सा शांत हुआ।
बैली ब्रिज को बचाने के लिए सुरक्षा एवं बचाव कार्य शुरू
उत्तरकाशी के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हर्षिल में खतरे की जद में आए बैली ब्रिज को बचाने के लिए सुरक्षा एवं बचाव कार्य शुरू हो गया है। बुधवार सुबह ही लोनिवि और लोनिवि विश्व बैंक के अफसरों की टीम पहुंची। बैली ब्रिज को बचाने के लिए सुरक्षा दीवार निर्माण का कार्य शुरू किया गया। बता दें कि बैली ब्रिज के निकट नए आरसीसी पुल निर्माण की नींव के लिए खोदाई करने से हर्षिल पुल के एबटमेंट पर दरारें आई हैं।
दून में चौराहे हुए लबालब
जोरदार बारिश से मंगलवार को राजधानी दून का मिजाज पूरी तरह बदल गया। महाराजा अग्रसेन चौक, दिलाराम चौक, कनक चौक, घंटाघर, चकराता रोड, लालपुर, किशननगर चौक, सर्वे चौक, कारगी चौक, आईएसबीटी, माजरा, जीएमएस रोड, डालनवाला, राजपुर रोड, नेहरू कॉलोनी, धर्मपुर, इंदिरानगर, बसंत विहार समेत ज्यादातर इलाकों में जलभराव हो गया। चौराहों पर जलभराव होने से यातायात व्यवस्था चरमरा गई और काफी देर तक जाम लगा रहा। यातायात बहाल कराने में पुलिसकर्मियों को भी जद्दोजहद करनी पड़ी।
नदियों का जलस्तर बढ़ने से अटकी लोगों की सांसें
रिस्पना और बिंदाल जैसी नदियों का जलस्तर बढ़ने से किनारे बसे लोगों की सांसें अटकी रहीं। गनीमत रही कि बारिश थमने के साथ ही नदियों के जलस्तर भी कम हो गया। इसके बाद लोगों ने राहत की सांस ली। वहीं कई इलाकों में बिजली गुल हो गई। ऐसे में लोगों को पेयजल संकट से भी जूझना पड़ा।
बारिश से मौसम हुआ सुहावना, किसानों के चेहरे खिले
हरिद्वार में मंगलवार को शुरू हुई बारिश से मौसम सुहावना हो गया। वहीं, किसानों के चेहरे भी खिल उठे। मौसम विभाग ने 14 जुलाई को भी बारिश होने की उम्मीद जताई है। मंगलवार को दोपहर शहर में झमाझम बारिश शुरू हो गई।
इससे उमसभरी गर्मी से परेशान लोगों को बड़ी राहत मिली। बारिश से मौसम भी खुगवार हो गया। लोगों ने इसका जमकर लुत्फ उठाया। बारिश से खेतों में पानी की कमी भी पूरी हो गई। किसानों ने खेतों में धान की रोपाई करने की तैयारी भी शुरू कर दी है।
उनका कहना है कि अब वे खेतों को तैयार करके धान की रोपाई शुरू कर सकेंगे। आईआईटी रुड़की में स्थित कृषि मौसम वेधशाला के अनुसार मंगलवार को अधिकतम 31.5 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बताया कि 18 जुलाई तक जनपद में 80 एमएम बारिश होने की संभावना है।
हरिद्वार में हुई बारिश से कई स्थानों पर जलभराव भी हुआ। बारिश से भगत सिंह चौक और ज्वालापुर के अनेक क्षेत्रों में लोगों को जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ा। नालों की सफाई नहीं होने से बाजारों में दुकानों के बाहर भी बारिश का पानी जमा रहा। व्यापारियों ने कहा कि जलभराव होने से लोगों को परेशानी का सामना पड़ता है। प्रशासन को समय रहते सभी नालों की सफाई करानी चाहिए थी।
वनाग्नि और बदल फटने का अध्ययन करेगी समिति
प्रदेश में बादल फटने और वनाग्नि की बढ़ती घटनाओं की रोकथाम के लिए मैग्नेटिक टेक्नोलॉजी की ओर से उपलब्ध कराए गए प्रस्ताव के अध्ययन एवं तकनीक मूल्यांकन के लिए शासन ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। जो निजी कंपनी के प्रस्ताव का विस्तृत अध्ययन कर दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट शासन को सौंपेगी।
आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग के सचिव एसए मुरूगेशन के हस्ताक्षर से जारी आदेश में उत्तराखंड अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र के निदेशक की अध्यक्षता में गठित समिति में मौसम केंद्र देहरादून के निदेशक और ऐरीज नैनीताल के वैज्ञनिक-ई बतौर सदस्य शामिल किए गए हैं। जो राज्य में बढ़ती वनाग्नि एवं बदल फटने की घटनाओं को कम करने का दावा करने वाली कंपनी मैग्नेटिक टेक्नोलॉजी की ओर से उपलब्ध कराए गए प्रस्तावों का आकलन और तकनीक मूल्यांकन कर दो सप्ताह में अपनी तथ्यात्मक रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराएगी।
आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि उत्तराखंड आपदा की दृष्टि से अति संवेदनशील राज्य है, जहां लगातार दैवी आपदा आती रहती हैं। दैवी आपदा के दौरान राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने और जान-माल की क्षति को कम करने के लिए राज्य सरकार अपने स्तर पर लगातार प्रयासरत है। इसी क्रम में मैग्नेटिक टेक्नोलॉजी की ओर से दिए गए वनाग्नि एवं बदल फटने की घटनाओं को कम करने संबंधी प्रस्तावों के अध्ययन के लिए समिति गठित की गई है। यदि कंपनी का दावा सही पाया जाता है तो इस परियोजना को राज्य में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जाएगा।
हमने आपदा प्रबंधन को लेकर तैयारी पूरी की हुई है। मौसम विभाग की ओर से समय से बुलेटिन भेज जा रहा है। हमने जिलाधिकारियों के स्तर तक बजट और जेसीबी उपलब्ध कराई हैं। आपदा की स्थिति से निपटने के लिए हम पूरी तरह से तैयार हैं।
- डॉ. धन सिंह रावत, मंत्री, आपदा प्रबंधन
ग्लेशियर खिसकने से मल्ला जोहार में सौ से अधिक बकरियां दबीं
मुनस्यारी के मल्ला जोहार में नंदा देवी बेस कैंप के पास ग्लेशियर खिसकने से बुग्याल में चर रहीं 100 से अधिक भेड़, बकरियां बर्फ में दब गई हैं। ग्लेशियर टूटने से चरवाहों का राशन और अन्य सामान भी बर्फ में दब गया है। यह घटना चार दिन पुरानी है। मार्ग खुलने के बाद मंगलवार को मुनस्यारी पहुंचे सरपंच ने यह जानकारी दी।
होकरा निवासी मनोहर सिंह मेहता, कोटा निवासी विशन सिंह पछाईं और क्वीरी निवासी खुशाल सिंह अपने भेड़, बकरियों को चराने के लिए नंदा देवी बेस कैंप गए थे। बताया जा रहा है कि जब भेड़, बकरियां नंदा देवी बेस कैंप से नीचे उतर रहीं थीं कि तभी ग्लेशियर खिसक गया।
इस दौरान 100 से अधिक भेड़, बकरियां बर्फ में दब गई। कुछ भेड़, बकरियों को चरवाहों ने बर्फ से निकालकर सुरक्षित बचा लिया, जबकि सौ भेड़, बकरियां बर्फ में दब कर मर चुकीं हैं। ग्लेशियर खिसकने से मार्ग भी बंद हो गया था।
मार्ग खुलने के बाद मंगलवार को मुनस्यारी पहुंचे ल्वां गांव के वन सरपंच केदार सिंह ल्वाल ने यह सूचना दी। उन्होंने बताया कि ग्लेशियर की चपेट में आने से चरवाहों के टेंट, राशन और बिस्तर भी बर्फ में दब गया है।