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उत्तराखंड: देहरादून में बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि, बदरीनाथ -यमुनोत्री घाटी में बर्फबारी, धारचूला में नाला उफनाया

Wed, 06 May 2020 09:27 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 06 May 2020 09:27 PM IST
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Uttarakhand Weather Forecast Today Latest Update in Hindi: rain, thunder storm and hailstorm alert
उत्तराखंड में ओले गिरे - फोटो : अमर उजाला

उत्तराखंड में आज दोपहर बाद मौसम ने फिर करवट बदली। राजधानी देहरादून समेत कई जगह करीब आधे घंटे तक जबरदस्त ओलावृष्टि  हुई। वहीं, बुधवार को बदरीनाथ धाम, हेमकुंड साहिब, फूलों की घाटी, घांघरिया, रुद्रनाथ, लाल माटी के साथ ही ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हुई। बर्फबारी से बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तैयारियां भी प्रभावित हो गईं हैं। कुमाऊं में पिथौरागढ़- धारचूला राष्ट्रीय राजमार्ग पर बुधवार को मूसलाधार बारिश के बीच फांफू नाला उफना गया। अचानक नाला उफनाने से वहां से जा रहे लोग सहम गए।

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उत्तरकाशी में लॉकडाउन के कारण दिक्कतें झेल रहे किसानों पर मौसम का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन तेज हवाओं के साथ हो रही बारिश और ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी फसलों को बर्बाद कर दिया है। इससे काश्तकारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
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बुधवार को भी जिला मुख्यालय सहित यमुना घाटी के कई क्षेत्रों में भारी बारिश और ओलावृष्टि हुई। इससे गेंहू, मटर, फ्रेंचबीन, सेब, आडू, खुमानी आदि नकदी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा। वहीं रोजाना हो रही बारिश से मई माह में भी ठंड का अहसास बना हुआ है।
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उत्तरकाशी नगर क्षेत्र में बुधवार को अधिकतम तापमान 21 डिग्री तथा न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस रहा। जबकि गंगोत्री व यमुनोत्री धाम सहित अन्य ऊंचाई वाले इलाकों में अधिकतम तापमान 9 डिग्री तथा न्यूनतम तापमान माइनस 2 डिग्री तक पहुंच गया।

खेतों में घुसा मलबा, फसलें चौपट, स्रोत क्षतिग्रस्त

बुधवार को फिर बिगड़े मौसम ने पहाड़ में ।काश्तकारों की वर्षभर की मेहनत पर पानी फिर गया। चमोली जिले के साथ ही लंबगांव में ओलावृष्टि से खेतों में गेहूं, जौ, सरसों की फसल के साथ ही साग-सब्जी की पौध नष्ट हो गई। साथ ही फल-फूलों के उत्पादों को भी नुकसान पहुंचा है। जबकि जखोली ब्लाक में अतिवृष्टि से मलबा खेतों में जा घुसा और पेयजल स्रोत के साथ ही रास्ता क्षतिग्रस्त हो गया।

जखोली ब्लाक के भरदार पट्टी के सेम गांव में मूसलाधार बारिश के कारण बरसाती नाले के उफान पर आने से मलबा खड़ी फसलों से भरे खेतों व सब्जी के बाड़ों में जा घुसा। मलबे से गांव का पेयजल स्रोत भी क्षतिग्रस्त हो गया, अब गांव में पेयजल संकट पैदा हो गया है। ब्लॉक प्रमुख प्रदीप थपलियाल और जखोली के तहसीलदार ने गांव पहुंचकर नुकसान का जायजा लिया। उन्होंने मुआवजे का भरोसा दिया और पेयजल स्रोत व लाइन ठीक करने के लिए जलसंस्थान के अधिकारियों को आदेश दिए। इस मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता एलपी डिमरी, कनिष्ठ उप प्रमुख कवींद्र सिंह सिंधवाल, आशा डिमरी समेत कई ग्रामीण मौजूद थे।

वहीं चमोली जिले में पोखरी के हापला, नैल, नौली, सिदेली, मसोली, गुड़म, तोणजी, सलना, रडुवा, जौरासी, कांडई, डुंगर, महड़, भिकोना और बंगथल क्षेत्र में ओलावृष्टि से अधिक नुकसान हुआ है। काश्तकार सत्येंद्र नेगी, सूबेदार मातबर नेगी, भगत भंडारी, विजया, कांता देवी और विमला देवी का कहना है कि छह माह की मेहनत बर्बाद हो गई है। गेहूं टूटकर जमीन पर बिखरे पड़े हैं। काश्तकारों ने प्रशासन से फसल का मुआवजा देने की मांग की।

वहीं लंबगांव के प्रतापनगर ब्लॉक के भदूरा, ओण, उपली रमोली, रौणद रमोली, रैका, धारमंडल और ढुुंगमंदार पट्टी के गांवों मसूर, मटर के अलावा संतरा, नींबू, माल्टा आडू, खुबानी, अखरोट आदि बागवानी की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। प्रतापनगर के पूर्व विधायक विक्रम नेगी, ब्लॉक प्रमुख प्रदीप रमोला, प्रधान चंद्रशेखर पैन्यूली, लोकपाल कंडियाल, रामलाल नौटियाल, पप्पू सिंह चौहान, जिला पंचायत सदस्य रेखा असवाल, संजू रांगड़, नीलम बिष्ट आदि ने सरकार से किसानों को फसलों का मुआवजा देने और किसान ऋण माफ करने की मांग की। डीएचओ डॉ. डीके तिवारी का कहना है कि क्षति के आकलन की रिपोर्ट मंगाई है।

सोमेश्वर घाटी में 50 नाली से अधिक भूमि मलबे से पटी

सोमेश्वर के धौलरा (टोटासिलिंग), कांटली, रौल्याणा में मंगलवार रात अतिवृष्टि ने भारी तबाही मचाई। इन गांवों की करीब 50 नाली से अधिक उपजाऊ भूमि मलबे से पट गई है। अकेले धौलरा में ही 30 नाली उपजाऊ भूमि मलबे में पटी है। क्षेत्र में 12 मवेशी मारे गए हैं। कोसी नदी में बहे 35 वर्षीय नेपाली मजदूर बीरू बहादुर का अब तक पता नहीं लग सका है। सोमेश्वर घाटी के पांच दर्जन से अधिक गांवों में गेहूं, आलू, प्याज, लहसुन, लौकी, तुरई, बैंगन, शिमला मिर्च और ककड़ी के पौधे नष्ट हो गए हैं। वहीं, ओलावृष्टि ने बुधवार को कपकोट क्षेत्र में लाहुर, सुमगढ़, गांसी में जबरदस्त तबाही मचाई है। ओलों से फसल, सब्जी और फलों को जबरदस्त नुकसान पहुंचा है। शामा, गोगिना क्षेत्र में भी बुधवार को जबरदस्त बारिश हुई।

पिथौरागढ़ में मूनाकोट ब्लॉक समेत हिस्सों में बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। इससे काफी फसल बर्बाद हो गई है। मुवानी-चौबाटी सड़क तीन दिन पूर्व भारी बारिश से जगह-जगह बंद है। वहीं, मंगलवार रात पिथौरागढ़-घाट और घाट-पनार सड़क पर मलबा आ गया। इससे बुधवार की सुबह मैदानी क्षेत्रों से पिथौरागढ़ की ओर आ रहे वाहन फंस गए, जबकि पिथौरागढ़ से मैदानी क्षेत्रों को जा रहे वाहन मीना बाजार में ही फंसे रहे। सुबह 9 बजे मलबा हटने के बाद आवाजाही सुचारु हुई।

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