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उत्तराखंडः मैदान में बारिश-ओलावृष्टि, पहाड़ाें पर बर्फबारी, गंगोत्री-यमुनोत्री हाईवे बंद

Fri, 13 Mar 2020 07:23 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 13 Mar 2020 07:23 PM IST
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uttarakhand weather today: rain and fresh snowfall continue from three days
गंगोत्री हाईवे बंद - फोटो : अमर उजाला

राजधानी देहरादून में गुरुवार की शाम से रुक-रुक कर हो रही बारिश का सिलसिला आज यानी शुक्रवार को भी जारी है। राजधानी दून समेत आसपास के इलाकों में शुक्रवार को पूरे दिन बारिश होती रही। कई क्षेत्रों में बादलों की गरज और चमक के साथ बड़े-बड़े ओले भी गिरे। बड़े-बड़े ओलों से लोगों ने खुद को चोटिल होने से बचाने के लिए शेड की आड़ ली। 

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बारिश बर्फबारी से यमुनोत्री एवं गंगोत्री हाईवे समेत आधा दर्जन संपर्क मार्ग अवरुद्ध हो गए और कई क्षेत्रों में बिजली व पेयजल आपूर्ति ठप हो गई। गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के साथ ही मुखबा, हर्षिल, धराली, सुक्की, जानकीचट्टी, खरसाली, सांकरी आदि ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ की चादर बिछ गई है। गंगोत्री हाईवे पर सुक्की से आगे वाहनों की आवाजाही ठप पड़ी है, जबकि यमुनोत्री हाईवे पर भी हनुमानचट्टी से आगे यातायात जोखिम भरा बना हुआ है। यहां बीआरओ और एनएच के कर्मचारी मशीनों से बर्फ हटाने के काम में जुटे हुए हैं, लेकिन बर्फबारी का सिलसिला जारी रहने से यातायात बहाली में दिक्कत आ रही हैं।
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जिले के निचले इलाकों में मार्च माह में भी मानसून जैसी बारिश ने समस्या खड़ी कर दी हैं। जगह-जगह भूस्खलन सक्रिय होने से सड़कें अवरुद्ध हो रही हैं। गंगोत्री हाईवे बृहस्पतिवार रात करीब नौ बजे धरासू पुल के पास भूस्खलन से अवरुद्ध हुआ। इस दौरान यहां एक यूटीलिटी वाहन फंस गया। इसमें सवार लोगों ने किसी तरह भाग कर अपनी जान बचाई, लेकिन मलबे में दबने से वाहन क्षतिग्रस्त हो गया। यहां शुक्रवार सुबह करीब दस बजे यातायात बहाल हो पाया। यमुनोत्री हाईवे भी डामटा, कुथनौर एवं छटांगा में भूस्खलन से अवरुद्ध होने के कारण यहां करीब दस घंटे तक यातायात प्रभावित रहा।
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छटांगा में अभी यातायात बहाली के प्रयास चल रहे हैं। इसके अलावा आराकोट-चीवां, चीवां-मौंडा, टिकोची-सरतली, हर्षिल-मुखबा, खरसाली आदि मोटर मार्ग भी भूस्खलन एवं बर्फबारी के चलते अवरुद्ध हैं। बारिश और बर्फबारी के चलते तापमान में जबर्दस्त गिरावट आने से मार्च माह में भी कड़ाके की ठंड पड़ रही है। शुक्रवार को जिला मुख्यालय समेत निचली घाटियों में अधिकतम तापमान 11 डिग्री और न्यूनतम 6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जबकि यमुनोत्री एवं गंगोत्री धाम समेत बर्फबारी वाले इलाकों में अधिकतम तापमान 2 डिग्री और न्यूनतम माइनस 4 डिग्री सेल्सियस रहा। इस बार नवंबर माह से शुरू हुई ठंड से होली के बाद भी निजात नहीं मिलने से लोग परेशान हैं।

बदरीनाथ, हेमकुंड सहित ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी

गढ़वाल में शुक्रवार को भी मौसम का मिजाज बिगड़ा रहा। रुद्रप्रयाग जिले में केदारनाथ, मदमहेश्वर, तुंगनाथ, चंद्रशिला सहित ऊंचे स्थानों पर जोरदार बर्फबारी हुई। जिला मुख्यालय समेत मैदानी हिस्सों में देर शाम तक बारिश होने से जनजीवन प्रभावित हुआ। चमोली जिले में बदरीनाथ धाम, हेमकुंड साहिब, रुद्रनाथ, लाल माटी, फूलों की घाटी, गोरसों और औली के साथ ही ऊंचाई वाले क्षेत्रों में दिनभर रुक-रुककर बर्फबारी और निचले क्षेत्रों में बारिश का सिलसिला बना रहा। बारिश-बर्फबारी से ठंड बढ़ गई है। 

ऑल वेदर रोड वाले हिस्सों में बदहाल हुई सड़क
बारिश के चलते ऑल वेदर रोड वाले हिस्सों में सड़कें बदहाल हो गई हैं। जगह-जगह जल भराव होने के साथ ही पहाड़ी से मलबा आने का भय बना हुआ है। जिला मुख्यालय पर ज्ञानसू के अलावा बड़ेथी चुंगी, मातली, धरासू बैंड, ब्रह्मखाल क्षेत्र में सड़कों का बड़ा हिस्सा तालाब में तब्दील होने से यहां आवाजाही खासी जोखिम भरी हो गई है। संबंधित एजेंसियों द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिए जाने से स्थानीय लोगों में रोष व्याप्त है।
 

आवश्यक सेवाओं पर भी पड़ी मौसम की मार

विद्युत, पेयजल आदि व्यवस्थाओं पर भी बारिश और बर्फबारी भारी पड़ी है। पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त होने से बड़कोट नगर की पेयजल आपूर्ति बृहस्पतिवार शाम से ठप पड़ी है। खरसाली गांव में भी तीन दिनों से पेयजल आपूर्ति ठप है।

इस हाल में लोग बारिश का पानी एकत्र कर काम चलाने को मजबूर हैं। भारी बारिश से बिजली की लाइन क्षतिग्रस्त होने से दशगी भंडारस्यूं क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति बृहस्पतिवार शाम को ठप हो गई थी, जिसे शुक्रवार दोपहर करीब ढाई बजे बहाल किया जा सका।

बर्फबारी वाले क्षेत्रों में पशु चारे का संकट भी गहरा गया है। सुक्की गांव निवासी मोहन सिंह राणा ने बताया कि पूरा क्षेत्र बीते दिसंबर माह से बर्फ से ढका होने के कारण पशुओं के लिए चारा उपलब्ध नहीं है। घरों में जमा चारा भी खत्म हो गया है। उन्होंने पशुपालन विभाग से पशु चारा उपलब्ध कराने की मांग की है।

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