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उत्तराखंड : शनिवार को तीसरे दिन भी यमुनोत्री हाईवे बंद, बदरीनाथ मार्ग लामबगड़ में खुला

Sat, 22 May 2021 06:49 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 22 May 2021 06:49 PM IST
सार

यमुनोत्री हाईवे खनेड़ा पुल सहित धरासू बैंड के पास, छटांगा, पालीगाड़ व कुथनौर आदि जगह-जगह मलबा व बोल्डर आने से बंद हो गया था।

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Uttarakhand Weather Forecast Today Updates in Hindi: cloudy weather in many area, these highways still blocked
यमुनोत्री हाईवे - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

बीते गुरुवार को खनेड़ा पुल के पास मलबा व बोल्डर आने से बंद यमुनोत्री हाईवे शनिवार को तीसरे दिन भी नहीं खुल पाया, जिससे यातायात बाधित होने के साथ यमुनोत्री धाम सहित गीठ व ओेजरी पट्टी के दर्जनों गांवों का तहसील व जिला मुख्यालय से संपर्क कटा हुआ है।

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शुक्रवार को यहां बड़े-बड़े बोल्डरों को ड्रिल मशीन से तोड़ा गया, लेकिन भारी मात्रा में मलबा व बोल्डर पसरा होने के कारण हाईवे खोलने में एजेंसी को दिक्कत हुई। सड़क के नीचे आधा दर्जन आवासीय भवन व होटल को भी खतरा बना हुआ है।
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इधर निर्माण एजेंसी के परियोजना प्रबंधक कादिर अहमद का कहना है कि कठोर चट्टानी बोल्डरों को हटाने में दिक्कत हो रही है। बताया कि ड्रिल मशीन से बोल्डर तोड़े गए हैं। उन्होंने अब रविवार कल तक हाईवे खुलने की बात कही।

बीते दिनों हुई भारी बारिश से यमुनोत्री धाम को जोड़ने वाला पैदल मार्ग भिडियाली गाड़ और भैरव मंदिर के निकट मलबा व बोल्डर आने से क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे पैदल आवाजाही जोखिमभरी होने के साथ खच्चरों की आवाजाही बंद हो गई है।

यमुनोत्री धाम से लौटे तीर्थ पुरोहित आशुतोष उनियाल ने बताया कि पैदल मार्ग पर कई जगह मलबा व बोल्डर आने से क्षतिग्रस्त हो गया।  लोनिवि के साइट इंचार्ज रविंद्र चौहान ने भी बारिश से नुकसान की बात स्वीकार की है। उन्होंने कहा कि रास्ते को दुरुस्त करने लिए मजदूर लगा दिए गए हैं।

मलेथा में जर्जर भवन गिरा, एक की मौत

श्रीनगर के मलेथा में शनिवार को एक जर्जर भवन गिर गया। हादसे में एक बुजुर्ग महिला की मौत हुई है।

लामबगड़ में तीसरे दिन वाहनों की आवाजाही सुचारू हो गई

बदरीनाथ हाईवे पर लामबगड़ में तीसरे दिन वाहनों की आवाजाही सुचारू हो गई है, जबकि रडांग बैंड में हाईवे का करीब 50 मीटर हिस्सा ध्वस्त होने से हाईवे को सुचारू होने में समय लग सकता है। हालांकि सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) यहां हाईवे सुचारू करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था में जुटा हुआ है। बीआरओ के अधिकारियों का कहना है कि लगभग तीन दिनों में हाईवे को सुचारू कर दिया जाएगा।

20 मई को अतिवृष्टि से लामबगड़ नाला उफान पर आ गया था, जबकि रडांग बैंड में सड़क का 50 मीटर हिस्सा ध्वस्त हो गया था और बैनाकुली में भी हाईवे पर मलबा आने से यहां एनएच की मशीनें मलबे में दब गई थीं। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने शनिवार को तीसरे दिन लामबगड़ में हाईवे को सुचारू कर दिया है, लेकिन रडांग बैंड में अभी हाईवे का सुधारीकरण कार्य चल रहा है।

यहां अलकनंदा से भी भू कटाव हो रहा है, जिससे जल्द हाईवे दुरुस्त करने में समय लग सकता है। हनुमान चट्टी में भी हाईवे कई जगहों पर ध्वस्त पड़ा है। यहां हाईवे किनारे पुश्ते भी टूटे हैं। पिछले एक वर्ष से जोशीमठ से बदरीनाथ तक ऑलवेदर रोड परियोजना कार्य चल रहा है, जिससे जगह-जगह हिल कटिंग कार्य अधूरा पड़ा है।

भारी बारिश होने पर पहाड़ियों से भूस्खलन होने के चलते हाईवे को भारी क्षति पहुंची है। बीआरओ के कमांडर मनीष कपिल का कहना है कि रडांग बैंड पर हाईवे को सुचारू करने में कम से कम तीन दिन लग सकते हैं। मौके पर पर्याप्त मात्रा में मशीनें और मैन पावर की तैनाती की गई है। 

सेना के वाहनों की आवाजाही भी रुकी 
बदरीनाथ हाईवे धार्मिक के साथ ही सामरिक महत्व से भी बेहद महत्वपूर्ण है। यह मार्ग चीन सीमा क्षेत्र को जोड़ता है। हाईवे बंद होने से सेना के वाहनों की आवाजाही भी तीन दिनों से रुकी हुई है। इस बार बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा स्थगित है, जिससे बीआरओ के सम्मुख यात्रा का दबाव नहीं है। बदरीनाथ धाम में बेहद कम लोग ही मौजूद हैं, जबकि माणा गांव के ग्रामीणों की आवाजाही भी कम है, जिससे बीआरओ को हाईवे सुचारू करने के लिए पर्याप्त समय मिल गया है।

समुद्री चक्रवात ताऊते का असर कम होने के साथ ही बदला मौसम का मिजाज 

समुद्री चक्रवात ताऊते का असर खत्म होने के साथ ही उतराखंड समेत तमाम हिमालयी और मैदानी राज्यों में शुक्रवार को भी मौसम का मिजाज दोबारा अचानक बदल गया। राजधानी दून में जहां सुबह हल्की बूंदाबांदी के बाद दोपहर बाद चटक धूप खिली, वही पर्वतीय क्षेत्रों में कहीं-कहीं बारिश भी हुई।

आखिरकार दो दिन तक मौसम के बदले मिजाज और झमाझम बारिश से लोगों को निजात मिली। वैसे शुक्रवार को सुबह सूर्य निकलने के साथ ही थोड़ी देर बाद मौसम का मिजाज अचानक बदल गया। आसमान में काले घने बादल छा गए और देखते ही देखते हल्की बूंदाबांदी भी होने लगी। एक बार लगा कि मौसम विज्ञानियों की भविष्यवाणी गलत साबित होगी और राजधानी व आसपास के इलाकों में झमाझम बारिश होगी।

लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ थोड़ी देर बाद ही न सिर्फ हल्की बूंदाबांदी रुक गई वरन, पूरे दिन भर चटक धूप भी खिली रही। दूसरी और मौसम विज्ञानियों ने संभावना जताई है कि शनिवार को राज्य के कुछ पर्वतीय क्षेत्रों में हल्की बूंदाबांदी होने के साथ ही बारिश होने के साथ ही बर्फबारी की भी संभावना है ।जहां तक मैदानी क्षेत्रों का सवाल है तो मैदान में मौसम साफ रहेगा।

ताऊते तूफान का दून की ट्रेनों पर भी पड़ा असर

कई राज्यों में तबाही मचाने वाले समुद्री चक्रवात ताऊते का देहरादून से संचालित होने वाली ट्रेनों पर भी असर पड़ा है। समुद्री चक्रवात के चलते गुजरात के ओखा से देहरादून आने वाली ओखा एक्सप्रेस का संचालन नहीं हो पाया।

स्टेशन अधीक्षक (संचालन) सीताराम शंकर ने बताया कि चक्रवात के चलते ओखा एक्सप्रेस आज देहरादून नहीं आएगी। पिछले दिनों चक्रवात को देखते हुए इस ट्रेन को बंद कर दिया गया था। इसका संचालन रविवार को देहरादून से शुरू होगा। इस ट्रेन में मुजफ्फरनगर, नई दिल्ली, गुड़गांव, रेवाड़ी, अलवर, जयपुर होते हुए द्वारिका जाना वाले यात्री भी सफर करते हैं। 

बता दें कि कोरोना संकट के चलते रेलवे बोर्ड ने देहरादून से संचालित होने वाली ज्यादातर ट्रेनों का संचालन बंद कर दिया है। फिलहाल देहरादून-प्रयागराज लिंक एक्सप्रेस, देहरादून-ओखा ओखा एक्सप्रेस, देहरादून-हावड़ा उपासना एक्सप्रेस जैसी चुनिंदा ट्रेनों का ही संचालन किया जा रहा है। देहरादून से नई दिल्ली शताब्दी और जनशताब्दी पर भी रोक लगा दी गई है।

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