इस सरकारी नौकरी की लिखित परीक्षा में हुई ऐसी धांधली, पढ़ने के बाद सकते में आ जाएंगे आप
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अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के पूर्व सदस्यों ने 6 मार्च 2016 को हुई ग्राम पंचायत विकास अधिकारी पदों की लिखित परीक्षा में धांधली के नए खुलासे किए हैं।
जिसमें परीक्षा के बाद ओएमआर शीट्स को दो सप्ताह तक गुप्त स्थान पर रख कर छेड़छाड़ करने के बाद रिजल्ट घोषित करने की बात कही है। पूर्व सदस्यों ने पूरे भर्ती प्रकरण की सीबीआई जांच कराके दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
रविवार को परेड ग्राउंड स्थित एक रेस्टोरेंट में आयोजित प्रेसवार्ता में आयोग के पूर्व सदस्य दीवान सिंह भैंसोडा व महेश चंद्र ने कहा कि चयन आयोग के गठन के बाद सहायक लेखाकार, कंप्यूटर ऑपरेटर व वीपीडीओ पदों की भर्ती की गई। आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष आरबीएस रावत, सचिव एमएस कन्याल व परीक्षा नियंत्रक आरएस पोखरिया की देखरेख में उक्त पदों की भर्ती हुई।
अभ्यर्थियों ने धांधली की आशंका जताते हुए विरोध प्रदर्शन किया
6 मार्च 2016 को वीपीडीओ के 196 पदों की परीक्षा आयोजित हुई। जिसका परिणाम 29 मार्च को घोषित किया गया। इस पर अभ्यर्थियों ने धांधली की आशंका जताते हुए विरोध प्रदर्शन किया।
इस मामले में तत्कालीन आयोग के अध्यक्ष आरबीएस रावत ने पद से इस्तीफा दे दिया था। पूर्व सदस्यों ने कहा कि झूठे दस्तावेजों के आधार पर भर्ती प्रकरण में उन्हें भी फंसाने का प्रयास किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग के तत्कालीन अधिकारी बोर्ड बैठक के नाम पर सदस्यों से फर्जी हस्ताक्षर कराते थे। वीपीडीओ भर्ती से पहले जो भी भर्ती आयोग ने कराई है। उसमें भी धांधली की पूरी संभावना है। सरकार को भर्ती प्रकरण की सीबीआई जांच करनी चाहिए और दोषी अधिकारियों को तत्काल वर्तमान सेवा के पदों से निलंबित किया जाए।
यह है भर्ती प्रकरण
अभ्यर्थियों की ओर से दायर 13 याचिकाओं को खारिज कर हाईकोर्ट ने एक दिसंबर 2017 को वीपीडीओ भर्ती को निरस्त कर दोबारा से लिखित परीक्षा कराने के आदेश दिए। आयोग ने 25 फरवरी 2018 को दूसरी बार परीक्षा कराई। जिसका हाल ही में परिणाम घोषित किया गया। पूर्व परीक्षा में चयनित हुए 196 अभ्यर्थियों में दूसरी बार की परीक्षा में मात्र आठ अभ्यर्थियों का चयन हुआ। वो भी राज्य आंदोलनकारी व अनुसूचित जाति के आरक्षित कोटे से हैं। इससे जाहिर है कि पूर्व में हुई परीक्षा में बड़े स्तर पर धांधली की गई।
प्रदेश सरकार को दी क्लीन चिट
आयोग के पूर्व सदस्यों ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मई 2016 को भर्ती प्रकरण पर तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दोबारा जांच के आदेश दिए। प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर भर्ती को निरस्त करने के आदेश दिए। सरकार के जीरो टॉलरेंस करप्शन के चलते वर्तमान में आयोग ने अध्यक्ष एस. राजू, सचिव संतोष बडोनी व परीक्षा नियंत्रक एनएस डांगी के नेतृत्व में उच्च मानदंडों को लागू कर पारदर्शिता व निष्पक्षता में अपनी पहचान बनाई है।