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उत्तराखंड में कहीं भी तोड़ेंगे ट्रैफिक, आना होगा दून

Sat, 25 Oct 2014 11:06 AM IST
मनमीत रावत/अमर उजाला, देहरादून
मनमीत रावत/अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 25 Oct 2014 11:06 AM IST
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uttarakhand traffic rule

शासन ने जिलों में एआरटीओ से वाणिज्यिक वाहनों की परमिट शर्तों के उल्लंघन पर कार्रवाई का अधिकार छीन लिया है। अब वाहन संचालकों ने परमिट शर्तों का उल्लंघन किया तो सीज या चालान वाहनों का निस्तारण संभागीय कार्यालय देहरादून में होगा।

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इसके बाद अब उत्तरकाशी, रुड़की, ऋषिकेश, टिहरी और हरिद्वार के वाहन संचालकों को जुर्माना भुगतने या सीज वाहन छुड़ाने देहरादून संभागीय परिवहन प्राधिकरण आना पडे़गा। मंगलवार को जारी आदेश में शासन ने सहायक संभागीय परिवहन अधिकारियों से यह अधिकार छीन कर क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण सचिव को सौंप दिया है। यह आदेश पौड़ी, अल्मोड़ा संभाग में भी लागू होंगे।
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शासन ने अब तक संभाग के सभी चार जिलों में यह सहूलियत दे रखी थी कि वाणिज्य वाहन अगर एसटीए के ट्रैफिक नियम तोड़ता है तो कार्रवाई सहायक संभागीय परिवहन कार्यालय करता था। अब यह अधिकार संभागीय परिवहन अधिकारी या आरटीए सचिव दिनेश चंद्र पठोई को सौंप दिए गए हैं।
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इसलिए पड़ी जरूरत

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सूत्रों के अनुसार, शासन को विभिन्न जिलों में स्थित सहायक संभागीय कार्यालयों से लगातार शिकायत मिल रही थी। इसके बाद शासन स्तर पर हुई बैठक में नए आदेश पर फैसला लिया गया। आरटीए सचिव दिनेश चंद्र पठोई ने बताया कि ऐसा यातायात नियम सख्त करने के लिए किया गया है।

सिर्फ राज्य परिवहन प्राधिकरण नियमों पर लागू
नया आदेश सिर्फ परमिट शर्तों पर लागू होगा। दरअसल वाणिज्यिक वाहन दो नियमों से बंधे होते हैं। एक केंद्र द्वारा बनाए मोटर व्हीकल (एमवी) एक्ट और दूसरा राज्य परिवहन प्राधिकरण के नियम। आम बोल चाल में राज्य के नियमों को ‘परमिट शर्त’ भी कहते हैं। इसमें ओवरलोडिंग, परमिट शर्तों मसलन, नंबर प्लेट नियम विपरीत होना, चालक का आचरण, यूनिफार्म, ओवर स्पीड, बिना कागज वाहन संचालन आदि शामिल है।  

राज्य परिवहन प्राधिकरण में दो तरह की सजा
राज्य परिवहन प्राधिकरण में दो तरह की सजा का प्रावधान है। एक कम्पाउंडिंग चालान और दूसरा सुनवाई वाले मामले। कई मामलों में आरटीए सचिव को भी अधिकार नहीं है कि वह चालान या सीज वाहन का कम्पाउंड (जुर्माना) भुगतान कर वाहन रिलीज करवा दे। आदेश के तहत कई मामले इतने गंभीर होते हैं कि उन्हें आरटीए सचिव एसटीए मीटिंग में रखेगा। वहां सुनवाई के बाद सजा का प्रावधान तय होता है।

बीच का रास्ता भी
आदेश में कुछ राहत भी है। मसलन, अगर वाहन उत्तरकाशी में सीज होता है तो संचालक को उत्तरकाशी के सहायक सहायक संभागीय कार्यालय में शपथ पत्र देकर बताना होगा कि वह कार्रवाई का सम्मान करता है और प्राधिकरण सचिव या प्राधिकरण बैठक का फैसला मानेगा। इसके बाद फैसला होने तक वह वाहन संचालित कर सकेगा। यह शपथ पत्र सहायक संभागीय परिवहन कार्यालय देहरादून आएगा, जहां एआरटीए सचिव वाहन संचालक को तय तिथि पर बुलाकर निस्तारण कर देगा।

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