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उत्तराखंड के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों को राज्य सपंत्ति विभाग ने भेजा वसूली का नोटिस

Thu, 17 Oct 2019 02:28 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 17 Oct 2019 02:28 PM IST
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uttarakhand three former cm got notice for clearing dues
मानव संसाधन एवं विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक (निशंक) - फोटो : एएनआई

उत्तराखंड के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों को राज्य संपत्ति विभाग ने वसूली का नोटिस भेजा है। विभाग ने तीन भगत सिंह कोश्यारी, डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक (हाल में एचआरडी मिनिस्टर) और विजय बहुगुणा को पानी और बिजली का बकाया चुकाने के लिए नोटिस भेजा है। कोश्यारी पर करीब 11 लाख, बहुगुणा पर 3.5 लाख, डॉ. निशंक पर चार लाख रुपये के करीब बिजली और पानी का बकाया है।

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बता दें कि हाईकोर्ट ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्रियों से उनके आवास का किराया बाजार की दर से वसूलने का आदेश दिया था। इस पर उत्तराखंड सरकार 31 मार्च 2019 तक इन सुविधाओं को निशुल्क करने का अध्यादेश लेकर आई। इस अध्यादेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। 
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इस अध्यादेश में पानी-बिजली के बकाए पर कुछ नहीं कहा गया है। इसलिए संपत्ति विभाग ने तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों को यह नोटिस भेजे हैं। पूर्व मुख्यमंत्रियों में से मेजर जनरल (सेनि) भुवन चंद्र खंडूड़ी ने ही पानी और बिजली का बकाया बिल चुकाया है। 
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वसूली माफ करने के मामले में सुनवाई शुक्रवार को
हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों से किराया वसूली व अन्य सुविधाओं में छूट देने के लिए जारी अध्यादेश को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए 18 अक्तूबर की तिथि नियत की है। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कोर्ट को अवगत कराया गया कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को नोटिस तामील हो गए हैं। 

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार देहरादून की रुलक संस्था ने अध्यादेश के खिलाफ दायर जनहित याचिका में कहा था कि राज्य सरकार ने अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर पूर्व मुख्यमंत्रियों को व्यक्तिगत लाभ और सेवाएं देने के लिए यह अध्यादेश पास किया है जो असांविधानिक है।


याचिका में कहा कि सरकार ने यह अध्यादेश हाईकोर्ट के आदेश को ताक में रखकर पास किया है। यह आदेश पूर्व मुख्यमंत्रियों को व्यक्तिगत लाभ और सेवा देने के लिए है।यह जनता से मिले राजस्व का दुरुपयोग है। याचिका में अध्यादेश को निष्प्रभावी घोषित करने की मांग की गई है।

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