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Uttarakhand@23: ये तो हमारे सपनो का उत्तराखंड नहीं, 22 साल में भी ये सपने रह गए अधूरे, पढ़िए स्पेशल इंटरव्यू

Wed, 09 Nov 2022 07:47 PM IST
अलका त्यागी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 09 Nov 2022 07:47 PM IST
सार

गढ़वाल सांसद एवं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि प्रदेश के लोगों ने अलग राज्य को लेकर जो सपना देखा था, उनके मन में जो सोच थी अभी उसे पूरा नहीं किया जा सका है।

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Uttarakhand State Foundation Day 2022 Special Interview tirath singh rawat and nishank
गढ़वाल सांसद तीरथ सिंह रावत - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

उत्तराखंड का आज 23 वां स्थापना दिवस मनाने जा रहे हैं, लेकिन यहां के लोगों ने अलग राज्य को लेकर जो सपने देखे थे, उसे पूरा करने के लिए अभी बहुत कुछ करने की जरूरत है। यह कहना है गढ़वाल सांसद एवं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत का। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में उन्होंने कहा कि प्रदेश के लोगों ने अलग राज्य को लेकर जो सपना देखा था, उनके मन में जो सोच थी अभी उसे पूरा नहीं किया जा सका है। इस दिशा में हम आगे बढ़े हैं, लेकिन अब भी बहुत कुछ करने की जरूरत है। प्रस्तुत है उनसे बातचीत के कुछ प्रमुख अंश। 

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सवाल: क्या 22 सालों में आपके सपनों का उत्तराखंड बना 
जवाब: देखिए और प्रयास करने की जरूरत है, अलग उत्तराखंड राज्य के प्रति मन में जो भाव था उस दिशा में बहुत कुछ करने की जरूरत है। इतने वर्षों में बहुत कुछ हुआ जो पहले नहीं हुआ था। सड़कें, बिजली, पानी बहुत से क्षेत्र में काम हुए, लेकिन एक प्लान बनाकर अभी बहुत कुछ करने की जरूरत है।  
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सवाल : क्या मानते हैं कि उत्तराखंड राज्य में अन्य राज्यों से अधिक भ्रष्टाचार है 
जवाब : मुस्कराते हुए, देखिए मैं यह नहीं कह सकता कि अन्य राज्यों की अपेक्षा में क्या हुआ, लेकिन इस पर अंकुश लगाने की आवश्यकता है। इस तरह के जो भी प्रकरण हैं उस पर कैसे रोक लगे इस पर काम करना होगा। कार्यों में पारदर्शिता की जरूरत है। 

सवाल : वैष्णों देवी की तर्ज पर चारधाम के प्रबंधन को बोर्ड बनना चाहिए 
जवाब : प्रबंधन बोर्ड की बात नहीं कर सकता, यात्रा बड़ी है, अपेक्षा से अधिक लोग आए हैं, इसके लिए मोदी जी ने केदारनाथ और बदरीनाथ में काम किया है। यात्रियों को सुविधाएं मिल रही हैं और सुविधाएं दी जाएंगी, जो प्रधानमंत्री जी की प्राथमिकता में है।  

सवाल : स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं से आप संतुष्ट हैं ? 
जवाब : जिस तरह हम चाहते थे अभी उस दिशा में बहुत कुछ करने की जरूरत है। शिक्षा में बदलाव की जरूरत है। खासकर प्राथमिक शिक्षा में। पहाड़ में डाक्टर रुकते नहीं हैं। उन्हें पहाड़ में कैसे रोका जा सके। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं में और सुधार की जरूरत है। स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में सुधार हो रहा है और सुधार की जरूरत है।  

सवाल : क्या उत्तराखंड के उद्योगों में हरियाणा की तर्ज पर स्थानीय युवाओं के रोजगार के लिए कानून बनना चाहिए। 
जवाब : हमने पहले से उत्तराखंड के नौजवानों के लिए 70 प्रतिशत रोजगार तय किया है। रोजगार में उन्हें प्राथमिकता मिलनी चाहिए। इस दिशा में आगे और क्या किया जा सकता है देेेखेंगे इस पर बात की जाएगी।

Uttarakhand State Foundation Day 2022 Special Interview tirath singh rawat and nishank
रमेश पोखरियाल निशंक (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

अभी सर्वश्रेष्ठ उत्तराखंड बनाने को काफी कुछ करना है बाकी : निशंक

हमने काफी कुछ किया है और अभी सर्वश्रेष्ठ राज्य बनने के लिए हमें और भी कुछ करना बाकी है। सूबे के पांचवें पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में सवालों का बेबाकी से जवाब दिया।
 
सवाल : क्या 22 सालों में आपके सपनों का उत्तराखंड बना ।
जवाब : उत्तराखंड की स्थापना यहां के लोगों के बड़े संघर्ष का परिणाम है। समग्र रूप से देखा जाए तो हम कह सकते हैं कि राज्य स्थापना के बाद यहां के लोगों की आशाओं और अपेक्षाओं के अनुरूप हमने नए उत्तराखंड निर्माण के लिए समर्पित भाव से प्रयास किया। हमने शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, बागवानी, रेल सड़क संपर्क, उद्योग सहकारिता, ढांचागत अवस्थापना में अभूतपूर्व प्रगति की। हम फार्मा और ऑटो मैनुफैक्चरिंग के हब बने। मुझे लगता है कि अभी भी काफी कुछ करना बाकी है। हम लोगों में उत्तराखंड को सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने की क्षमता है, जिस दिशा में लगातार काम करते रहना पड़ेगा।

सवाल : राजधानी देहरादून से क्या आप संतुष्ट हैं ।
जवाब : जैसा मैंने कहा कि हमें जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना है। मौजूदा समय में गैरसैंण में ग्रीष्मकालीन राजधानी है। वहां विधानसभा का सत्र भी चलता है। प्रदेश के लोगों के हित में देहरादून को अस्थायी राजधानी बनाया गया था। मुझे लगता है कि राजधानी से अधिक हमारा मुख्य फोकस जनकल्याणकारी योजनाओं के सृजन और उनके समयबद्ध क्रियान्वयन पर होना चाहिए था।

सवाल : क्या मानते हैं कि उत्तराखंड में अन्य राज्यों से अधिक भ्रष्टाचार है।
जवाब : यहां पर तुलना का कोई अर्थ नहीं है। हमारी यही कोशिश है कि जिस किसी स्तर पर भ्रष्टाचार हो, उसे मिटाने के लिए हर संभव कदम उठाए जाने चाहिए। उत्तराखंड में एक भ्रष्टाचार मुक्त सरकार देना हमारी प्रतिबद्धता है। हमने अपने क्रियाकलापों से भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश की अभिकल्पना को साकार किया है। 

सवाल : क्या वैष्णो देवी की तर्ज पर चार धाम प्रबंधन बोर्ड को बनना चाहिए। 
जवाब : प्रधानमंत्री मोदी के कुशल नेतृत्व में हमारा अपना बेहतर प्रबंधन सर्वोत्कृष्ट होगा, ऐसा विश्वास है। हमारी सरकार का प्रयास है कि उत्तराखंड में आए हर पर्यटक को हर सुविधा मिले। उसे एक अलौकिक अनुभूति का अहसास हो। 

सवाल : क्या आप प्रदेश की स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं से संतुष्ट हैं।
जवाब : जैसा मैंने पूर्व में कहा कि हमारी मुख्य दो दशकों से अधिक की यात्रा में स्वास्थ्य और शिक्षा में पर्याप्त ध्यान दिया गया। स्वास्थ्य क्षेत्र में हमने न केवल मेडिकल, पैरामेडिकल और नर्सिंग शिक्षा का विस्तार किया है, बल्कि प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराई है। जहां तक शिक्षा की बात है, हमने विद्यालीय और उच्च शिक्षा में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। देश के शीर्ष स्कूल और विवि आज उत्तराखंड में स्थापित हैं।

सवाल : क्या उत्तराखंड के उद्योगों में हरियाणा की तर्ज पर स्थानीय युवाओं के रोजगार के लिए कानून बनना चाहिए।
जवाब : मुझे याद है कि अपने मुख्यमंत्री काल में हमने उद्योगों में 70 प्रतिशत स्थानीय युवाओं को लिए स्थान देने की बात कही थी। परंतु, कहीं न कहीं कौशल युक्त श्रम शक्ति की उपलब्धता अपने आप में चुनौती बन जाती है। ऐसी स्थिति में आप कुछ भी नियम बना लें, उसका ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। हमें पूरी लगन, मेहनत, संकल्प शक्ति से अपने युवाओं को विश्वस्तरीय शिक्षा और कौशल प्रदान करने की आवश्यकता है, ताकि वे न भारत बल्कि पूरे विश्व में सफल हों। उन्होंने कहा कि इस बात की खुशी है कि देशभर में मोदी सरकार ने नेशनल एजुकेशन पॉलिसी लागू की है।
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