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घोषणा से पहले खतरे में उत्तराखंड का राज्यगीत!

Wed, 24 Feb 2016 02:52 AM IST
Updated Wed, 24 Feb 2016 02:52 AM IST
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uttarakhand state anthem in trouble.

उत्तराखंड का राज्य गीत घोषणा होने से पहले विवादों में घिर गया है। राज्यगीत के लिए आवेदन करने वाले डॉ. राजेश्वर उनियाल ने चुनौती दी है कि यदि इस गीत की राजकीय घोषणा की जाती है तो इस मामले को उच्च न्यायालय में ले जाएंगे। उनका कहना है कि इस गीत को तैयार करने में शुरू से आखिरी तक कई बार मानकों का उल्लंघन किया गया।

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राज्यगीत तैयार होने से लेकर बनने तक विवादों से घिरा रहा। आवेदन मांगते ही कुछ संगठनों ने भी इसका विरोध करना शुरू कर दिया था। शुरू में इसके पूरी तरह से हिंदी में होने का विरोध किया गया था।
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इसके बाद गीत को बनने में हुई देरी पर सवाल उठे और फिर गीत के लेखक का नाम सामने नहीं लाने को लेकर चयन समिति से सवाल किए गए। अब राज्यगीत तैयार है, जिसकी धुन भी बन गई है तो एक बार फिर से यह विवाद में घिरता नजर आ रहा है। इस बार एक आवेदक डॉ. राजेश्वर उनियाल जो कि महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी (मुंबई) के सदस्य हैं। वह इसके विरोधी हैं।

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चयन समिति के सदस्य से धुन तैयार करने पर सवाल

uttarakhand state anthem in trouble.

डॉ. राजेश्वर उनियाल का कहना है कि राज्यगीत बनाए जाने की प्रक्रिया में कई बार मानकों को उल्लंघन किया गया। कहा कि जो गीत बनकर सामने आया है, वो पूरी तरह से हिंदी में है। बीच में कुछ क्षेत्रीय शब्द अवश्य रखे गए हैं, जो कि मापदंडों के विरुद्ध है। कहा कि जब गीत के चयन की प्रक्रिया खुली रखी गई थी तो धुन की प्रक्रिया को भी इसी प्रकार खुला क्यों नहीं रखा गया।

चयन समिति के सदस्य नरेंद्र सिंह नेगी से ही धुन तैयार कराना भला कहां की निष्पक्षता है। कहा कि इस संबंध में मुख्यमंत्री, संस्कृति सचिव एवं निदेशक को नोटिस भेज दिया गया है। यदि इस गीत की राजकीय घोषणा की जाती है तो इस मामले को उच्च न्यायालय तक ले जाऊंगा। न्यायालय बताएगा कि सच क्या है? मैंने राज्य सरकार के मापदंडों पर आधारित गीत लिखा है, जब उस गीत को मैं जनता के सम्मुख रखूंगा तब राज्य की जनता असली फैसला करेगी।

विभाग की दो टूक
डॉ. राजेश्वर उनियाल की ओर से नोटिस मिल गया है। चयन प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी रखी गई थी। बाकायदा शासनादेश हुआ, विज्ञापन निकाले गए। चयन समिति ने पूरा समय लेकर गीत को चुना तो फिर मानकों के उल्लंघन की बात ही कहां हैं। उन्हें जाना है तो उच्च न्यायालय जाएं, विभाग वहीं जवाब देगा।
-बीना भट्ट, निदेशक, संस्कृति विभाग

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