उत्तराखंड: कुमाऊं के सबसे बड़े सुशीला तिवारी अस्पताल में स्क्रब टायफस की जांच बंद
- शेड्यूल में शामिल नहीं, एसटीएच में निशुल्क होती थी जांच
- बाहर से जांच कराने में चुकाने पड़ते हैं दो से ढाई हजार रुपये
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उत्तराखंड में कुमाऊं के सबसे बड़े डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल (एसटीएच) में स्क्रब टायफस की जांच बंद कर दी गई है। ऐसे में मरीजों को निजी लैब में महंगे दामों पर जांच करानी पड़ रही है। उधर, गढ़वाल में श्रीनगर मेडिकल कॉलेज और देहरादून मेडिकल कॉलेज में स्क्रब टायफस की जांच हो रही है।
आईसीएमआर के प्रोजेक्ट के तहत राजकीय मेडिकल कालेज हल्द्वानी में स्क्रब टायफस की जांच शुरू हुई थी। राजकीय मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा का कहना है कि केंद्र सरकार का प्रोजेक्ट आया था। दो वर्ष तक जांच की गई और प्रोजेक्ट पूरा होने पर जांच बंद कर दी गई।
फिलहाल स्क्रब टायफस की जांच नहीं हो रही है। इधर, मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अशोक ने बताया कि इस वर्ष भी अगस्त-सितंबर में नैनीताल, अल्मोड़ा, बागेश्वर से आठ मामले स्क्रब टायफस के आए थे। निजी पैथोलॉजी में दो से ढाई हजार रुपये में इसकी जांच होती है।
प्रदेश में कब कितने केस सामने आए
वर्ष कुल केस
2017 1110
2018 1011
2019 756
जानलेवा भी साबित हो सकता है स्क्रब टायफस
स्क्रब टायफस माइट (एक प्रकार का कीड़ा) के काटने से होता है। इसमें तेज बुखार आता है। हृदय, किडनी, दिमाग या शरीर के अन्य किसी महत्वपूर्ण अंग पर इसका असर हो सकता है। कई बार मरीज मल्टीआर्गन फेल होने की स्थिति में होता है, जिससे मौत हो जाती है।
स्क्रब टायफस को जांच शेड्यूल में शामिल नहीं किया गया है। स्क्रब टायफस को शेड्यूल में शामिल करने के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। अभी कोविड और स्वाइन फ्लू पर फोकस किया जा रहा है।
-डॉ. अमिता उप्रेती स्वास्थ्य महानिदेशक।