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चुनावी दौर में भीड़ के फ्रंट पर बड़े चेहरे पड़ रहे छोटे

Fri, 25 Nov 2016 09:30 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 25 Nov 2016 09:30 AM IST
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uttarakhand public not interested in rally of big leaders
अमित शाह की रैली - फोटो : file photo

उत्तराखंड में आयोजित हो रही जनसभाओं में भीड़ जुटाने में भाजपा-कांग्रेस दोनों के पसीने छूट रहे हैं।

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दोनों ही दल में यात्राओं से अपना जनसमर्थन दिखाने की प्रतिस्पर्धा चल रही है, लेकिन अगर कुछ स्थानीय नेता अपना दम न दिखाते तो भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से लेकर सीएम हरीश रावत की जनसभाओं में कुर्सियां भी खाली रह जातीं।

भाजपा में अभी तक शाह की रैलियों में प्रदेश संगठन के जताए दावों के अनुरूप भीड़ नहीं दिखी, जबकि कांग्रेस की धीमी शुरूआत ही उनके रणनीतिकारों की चिंता बढ़ा रही है। भाजपा की परिवर्तन यात्रा की शुरूआत कांग्रेस की सतत विकास संकल्प यात्रा के मुकाबले बेहतर दिखी।
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राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की जनसभा में भीड़ जुटाने में प्रदेश के बड़े नेता नहीं, बल्कि पार्टी में नए नए शामिल हुए पूर्व विधायकों के कंधों पर छोड़ दी गई। दून की रैली में उमेश शर्मा काऊ-गणेश जोशी तो अल्मोड़ा में रेखा आर्य के साथ आई भीड़ जनसभाओं में रौनक ले आई। यात्रा से पहले हरिद्वार में शाह की रैली में भी कुंवर प्रणव के साथ आई भीड़ ही समां बांध पाई।
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इसके अलावा केंद्रीय नेताओं थावर चंद गहलोत, धमेंद्र प्रधान, उमा भारती, सुरेश प्रभु की जिन क्षेत्रों में जनसभाएं हुईं, वहां स्थानीय नेताओं को जमकर पसीना बहाना पड़ा, जबकि इन जनसभाओं में प्रदेश के आला पदाधिकारियों सहित कई सांसद, विधायक भी मौजूद रहे। 

भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि राहत इस बात की है कि उनकी यात्रा कांग्रेस से अधिक भीड़ जुटाऊ साबित हो रही है। भाजपा के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि प्रदेश में पार्टी के बड़े चेहरों का तिलिस्म भीड़ में तब्दील नहीं हो रहा।

अगर स्थानीय नेताओं पर खुद का वजूद दिखाने का दबाव न हो तो जनसभाओं में लोग को जुटाना आसान नहीं रहेगा। दूसरी तरफ कांग्रेस की सतत विकास संकल्प यात्रा गृह मंत्री प्रीतम सिंह के क्षेत्र चकराता में जुटी भीड़ से भले उत्साहित है, लेकिन यात्रा को अन्य क्षेत्रों में भीड़ का टोटा सहना पड़ा।

यात्रा की खानपुर विधानसभा से हुई शुरूआत ही डांसर बुलाकर भीड़ जुटाने के आरोपों से घिर गई। मंच पर दिख रही सीएम हरीश रावत और प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय की जुगलबंदी का असर अभी दिखना शुरू नहीं हुआ है।


कांग्रेस सिर्फ इस बात से राहत महसूस कर रही है कि उनकी यात्रा केंद्रीय नेताओं की जनसभाओं के बिना चल रही है। कांग्रेस को आस है कि जब उनकी सेंट्रल लीडरशिप उतरेगी तो मैदान में जनसैलाब उमड़ेगा।

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