{"_id":"6221a07c4a583a15861ff62f","slug":"uttarakhand-politics-speculation-to-send-congress-candidates-to-rajasthan-or-chhattisgarh","type":"story","status":"publish","title_hn":"उत्तराखंड की सियासत: कांग्रेस प्रत्याशियों को राजस्थान या छत्तीसगढ़ भेजने की अटकलें, पढ़िए पूरी खबर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उत्तराखंड की सियासत: कांग्रेस प्रत्याशियों को राजस्थान या छत्तीसगढ़ भेजने की अटकलें, पढ़िए पूरी खबर
Fri, 04 Mar 2022 10:59 AM IST
रेनू सकलानी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: रेनू सकलानी
Updated Fri, 04 Mar 2022 10:59 AM IST
सार
2012 में कांग्रेस 32 और भाजपा 31 सीटों पर सिमट गई थी। 10 मार्च को ईवीएम के पिटारे से नतीजों की कुछ ऐसी ही तस्वीर बनीं तो सरकार बनाने के लिए पार्टियां पूरा जोर लगाएंगी।
विज्ञापन
ganesh godiyal, harish rawat, pritam singh
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव का नतीजा आने से पहले भाजपा और कांग्रेसी दिग्गज अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं। लेकिन कांटे का मुकाबला होने की वजह से उनके दिल भी धक-धक कर रहे हैं। इस बीच सियासी हलकों में अटकलें तेज हैं कि कांग्रेस अपने जिताऊ माने जाने वाले प्रत्याशियों को राजस्थान या छत्तीसगढ़ भेज सकती है।
विज्ञापन
हालांकि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ऐसी किसी भी संभावना से साफ इनकार कर रहे हैं। गोदियाल कहते हैं कि उन्हें कोई डर नहीं है, लेकिन भाजपा येन केन प्रकरण सत्ता प्राप्त करना चाहती है। उत्तराखंड में कांग्रेस दूध की जली है, इसलिए छांछ भी फूंक-फूंक कर पीना चाहती है।
विज्ञापन
सियासी हलकों में यदि ये कयासबाजियां तेजी से हो रही हैं कि उसने अपने जिताऊ प्रत्याशियों को कांग्रेस शासित राज्य राजस्थान व छत्तीसगढ़ भेजने की तैयारी कर ली है तो इसे कोई हैरानी वाली बात नहीं होगी। स्वयं गोदियाल कह रहे हैं कि 2016 में भाजपा ने जो किया, वह बताता है कि वह हर हाल में सत्ता प्राप्त करना चाहती है। वह कर्नाटक, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए कहते हैं कि भाजपा के लिए सत्ता के आगे कोई नैतिकता नहीं है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें...माननीयों ने तोड़े नियम: मुख्यमंत्री धामी सहित 44 विधायकों ने नहीं दिया संपत्ति का ब्योरा, आरटीआई में हुआ खुलासा
मुकाबला कड़ा है, ये दिग्गज भी जानते हैं
बाहर से कांग्रेसी दिग्गज चाहे 40 से अधिक सीटें जीतने का दावा कर रहे हों, लेकिन धरातल से जो फीडबैक प्राप्त हो रहा है, उसमें वह अधिकांश सीटों पर कांग्रेस बेहद कड़े मुकाबले में फंसी है। सियासी जानकारों का मानना है कि हालात 2012 वाले हो जाएं तो कोई अचरज वाली बात नहीं होगी। 2012 में कांग्रेस 32 और भाजपा 31 सीटों पर सिमट गई थी। 10 मार्च को ईवीएम के पिटारे से नतीजों की कुछ ऐसी ही तस्वीर बनी तो इस बार भाजपा सरकार बनाने का दांव चलने से बिल्कुल नहीं चूकेगी।
तैयार हो रही है रणनीति
कांग्रेसी हलकों में चर्चा गर्म है कि पार्टी आलाकमान चुनाव परिणाम से पहले और उसके बाद की स्थितियों के आधार पर अपनी रणनीति बना रहा है। पंजाब, गोवा और उत्तराखंड में कांग्रेस सत्ता प्राप्ति के लिए पूरी ताकत लगा रही है। जोड़ तोड़ और तोड़ फोड़ की राजनीति से बचाव के लिए कांग्रेस ऐसा कवच तैयार करने की सोच रही है कि जिसे भेदना भाजपा के लिए दुष्कर हो जाए। इसमें प्रत्याशियों और जीत के बाद विधायकों को अज्ञात ठिकानों पर भेजने का विकल्प भी शामिल है।