भाजपा-कांग्रेस कार्यकर्ताओं में झड़प के दौरान हंसने पर दरोगा निलंबित, पढ़ें क्या है पूरा मामला
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कांग्रेस भवन के पास भाजपा और कांग्रेस के बीच हुई धक्का-मुक्की में बिंदाल पुलिस चौकी के दरोगा शांति प्रसाद पर कार्रवाई की गाज गिर गई। वीडियो फुटेज में दरोगा हंसते हुए दिखने पर उन्हें निलंबित कर दिया गया।
अधिकारियों और खुफिया तंत्र की चूक की वजह से एक माह में भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ता दो बार टकरा चुके हैं। दोनों बार दरोगाओं को बलि का बकरा बनाकर विरोध के स्वरों को दबाने की कोशिश की गई है। जबकि कांग्रेस सीओ सिटी के खिलाफ आवाज बुलंद किए है। एडीजी अशोक कुमार का कहना है कि अभी जांच चल रही है, जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर कार्रवाई होगी।
भाजपाइयाें के राफेल प्रकरण में कांग्रेस दफ्तर पर विरोध मार्च के दौरान 19 दिसंबर को भाजपा और कांग्रेस के बीच धक्का-मुक्की हो गई थी। भाजपाई एस्ले हाल के पास बनाए बैरियर को तोड़कर कांग्रेस दफ्तर के गेट तक पहुंच गए थे। इसी दौरान कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के पोस्टर आदि फाड़ दिए।
इस मामले में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने अपर पुलिस महानिदेशक से मिलकर भाजपाइयों के साथ सीओ सिटी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। एडीजी ने डीआईजी अजय रौतेला से इस मामले में आख्या मांगी थी।
भाजपाइयों के बैरियर तोड़कर आगे बढ़ने के दौरान वीडियो फुटेज में बिंदाल पुलिस चौकी पर तैनात दारोगा शांति प्रसाद चमोली हंसते हुए नजर आ रहे हैं। अधिकारियों को यह बात बेहद नागवार गुजरी है। इसी आधार पर ड्यूटी में लापवाही बरतने के आरोप में शांति प्रसाद को निलंबित कर दिया गया। इसके अलावा धारा चौकी प्रभारी कुलदीप पंत की तरफ से कोतवाली में राजपुर रोड स्थित कांग्रेस भवन के गेट पर लगे पोस्टर फाड़ने के आरोप में 15-20 भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ अभियोग पंजीकृत कराया गया है।
कांग्रेस और भाजपा के बीच एक माह में टकराव की यह दूसरी घटना है। निकाय चुनाव में हुए झगड़े को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं से भाजपा समर्थकों ने रायपुर थाने के अंदर की पुलिस की मौजूदगी में मारपीट की थी। सत्ता से जुड़ा मामला होने के कारण पुलिस ने इस पर चुप्पी साध ली थी।
विरोध में थाने पर प्रदर्शन करने आए कांग्रेस कार्यकर्ताओं से भाजपाइयों ने सामने आकर धक्का-मुक्की की थी। कई घंटे तक रायपुर थाने में दोनों दलों के बीच नारेबाजी चलती रही। उस समय भी अधिकारियों की चूक की वजह से यह नौबत आई थी, तब भी एक दरोगा को निलंबित कर अधिकारियों ने पल्ला झाड़ लिया था। कांग्रेस भवन उत्पात में यही नीति अपनाकर अन्य अधिकारियों को बचाने की कोशिश की गई है।