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उत्तराखंड: पिथौरागढ़ के पूर्व विधायक केसी पुनेठा का निधन, राज्य निर्माण आंदोलन में दिया था अहम योगदान

Thu, 24 Sep 2020 10:41 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिथौरागढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिथौरागढ़ Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 24 Sep 2020 10:41 PM IST
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Uttarakhand: Pithoragarh Former MLA KC Punetha dies after Suffer Disease
केसी पुनेठा - फोटो : अमर उजाला

उत्तराखंड की पिथौरागढ़ विधानसभा क्षेत्र से उत्तर प्रदेश में दो बार विधायक रहे कृष्ण चंद्र पुनेठा (70) का बुधवार रात निधन हो गया। फोर्ती स्थित पैतृक आवास में उन्होंने अंतिम सांस ली। वह काफी समय से बीमार थे।

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हालात में सुधार न होने पर दो हफ्ते पहले ही मुंबई के अस्पताल से उन्हें वापस लाया गया था। फोर्ती के श्मशान घाट में बृहस्पतिवार को उनका अंतिम संस्कार किया गया। इकलौते बेटे मयंक ने चिता को मुखाग्नि दी। उत्तराखंड राज्य निर्माण में में उनका अहम योगदान रहा है।
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सांसद अजय भट्ट, सांसद अजय टम्टा, राज्यसभा सदस्य प्रदीप टम्टा, जिला पंचायत अध्यक्ष ज्योति राय, लोहाघाट के विधायक पूरन सिंह फर्त्याल, चंपावत के विधायक कैलाश गहतोड़ी, दर्जा मंत्री हयात सिंह माहरा, प्रमुख विनीता फर्त्याल, पूर्व कृषि मंत्री महेंद्र सिंह माहरा, पूर्व प्रमुख योगेश मेहता, पूर्व विधायक हेमेश खर्कवाल, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष शंकर दत्त पांडेय, कांग्रेस नेता मथुरा दत्त जोशी समेत कई संगठनों ने उनके निधन पर शोक जताया है। 
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राज्य की विधानसभा में दस्तक देने का सपना नहीं हो पाया पूरा
उत्तर प्रदेश विधानसभा के दो बार विधायक रहे केसी पुनेठा उस दौर के बेहद कद्दावर नेता थे। सौम्य, सरल और दूरदर्शिता के लिए क्षेत्र में मशहूर पुनेठा ने उत्तराखंड राज्य निर्माण के लिए भी लड़ाई लड़ी। 

 इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि जिस राज्य को बनाने में उनकी प्रमुख भूमिका रही, उस विधानसभा के सदन में नहीं पहुंच सके। शुरू के दो विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी रहे, लेकिन सदन में पहुंचने का सपना पूरा नहीं हो सका। केसी पुनेठा 1991 और 1996 में पिथौरागढ़ से विधायक बने।


दोनों ही बार भाजपा ने यूपी में सरकार भी बनाई। विकासवादी सोच और दूरदर्शी नजरिये के चलते क्षेत्र के विकास की नींव रखने में उन्होंने एक शिल्पी की भूमिका निभाई। नवंबर 2000 में उत्तराखंड राज्य बनने पर उन्हें हिल्ट्रॉन और जैविक परिषद के अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। इसे उन्होंने बखूबी निभाया। जैविक खेती के साथ पशुपालन को बढ़ावा दे लोगों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया।

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