उत्तराखंड: अधिकारियों, कर्मचारियों और शिक्षकों पर 'काम नहीं तो वेतन नहीं' लागू
- छुट्टी लेकर हड़ताल में शामिल हुए तो अनुपस्थित माने जाएंगे
- अनुपस्थित अवधि का वेतन नहीं मिलेगा, मार्च माह का वेतन भी रोका जाएगा
- मुख्य सचिव ने जारी किए आदेश, अधिकारियों को तामील करने को कहा
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उत्तराखंड में लंबित मांगों को लेकर कर्मचारी संगठनों की हड़ताल और कार्यबहिष्कार की चेतावनियों पर कड़ा रुख दिखाते हुए प्रदेश सरकार ने विभागों, निगमों व सार्वजनिक उपक्रमों में तैनात अधिकारियों, कर्मचारियों व शिक्षकों पर काम नहीं तो वेतन नहीं का आदेश लागू कर दिया है। जो कर्मचारी अवकाश लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल या आंदोलन कार्यक्रम में शामिल होगा, उसको स्वत: अनुपस्थित मानते हुए उसका अनुपस्थित अवधि का वेतन रोक दिया जाएगा। साथ ही मार्च महीने का वेतन भी अगले आदेशों तक जारी नहीं किया जाएगा।
मुख्य सचिव ओम प्रकाश के निर्देश पर अपर मुख्य सचिव कार्मिक एवं सतर्कता राधा रतूड़ी ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों, प्रभारी सचिवों, विभागाध्यक्षों, कार्यालयाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों, निगमों व संस्थानों के प्रबंध निदेशकों व वरिष्ठ कोषाधिकारियों व कोषाधिकारियों को जारी आदेशों पर कड़ाई से अमल करने को कहा गया है।
आदेश में कहा गया है कि विभिन्न कर्मचारी संगठन अपनी मांगों के संबंध में प्राय: हड़ताल व कार्यबहिष्कार करते हैं। इससे जनसामान्य को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। राज्य की संचालित जनहित की योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी होती है। कर्मचारियों की जाने वाली हड़ताल राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली के तहत प्रतिबंधित है। हड़ताल व कार्यबहिष्कार के लिए जो कर्मचारी अवकाश लेगा और अनिश्चितकालीन हड़ताल व आंदोलन कार्यक्रम में भाग लेगा, उसको स्वत: गैरहाजिर माना जाएगा। इस अवधि का वेतन जारी नहीं होगा और अगले आदेश तक मार्च महीने का वेतन भी रोका जाएगा।
मिनिस्टीरियल कर्मचारियों कार्य बहिष्कार पांच से
उत्तराखंड फेडरेशन ऑफ मिनिस्टीरियल सर्विसेज एसोसिएशन की ओर से विभिन्न मांगों को लेकर के चलाए जा रहे आंदोलन का पहला चरण बुधवार को पूरा हो गया। एसोसिएशन के प्रांतीय मीडिया प्रवक्ता और देहरादून के अध्यक्ष पंचम सिंह बिष्ट ने बताया कि अब पांच से आठ अप्रैल तक कार्य बहिष्कार किया जाएगा।
एसोसिएशन ने कहा है कि सरकार की ओर से मिनिस्टीरियल कर्मियों से 10, 16, 26 वर्ष पर दिए गए एसीपी और एमएसीपी के लाभ की वसूली का आदेश जब तक वापस नहीं लिया जाता तब तक पूरे प्रदेश में करीब 35,000 कर्मचारी चरणबद्ध आंदोलन चलाएंगे। आंदोलन के दूसरे चरण में प्रदेशभर के मिनिस्टरियल कर्मचारी पांच से आठ अप्रैल तक हस्ताक्षर पंजिका में हस्ताक्षर करने के पश्चात पूर्ण रूप से कार्य बहिष्कार करेंगे और कार्य बहिष्कार के दौरान गेट मीटिंग एवं जन जागरण अभियान चलाएंगे।
पंचम सिंह बिष्ट ने बताया कि 12 अप्रैल को सभी जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन कर जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा जाएगा। 13 अप्रैल को प्रांतीय बैठक में अनिश्चितकालीन हड़ताल का निर्णय लिया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि शासन से स्पष्ट निर्णय न होने के कारण प्रदेश में 500 से अधिक कर्मचारियों के पेंशन के प्रकरण लटक गए हैं। उन्हें दो-तीन माह से पेंशन नहीं मिल पा रही है। यदि सरकार सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो 13 अप्रैल की होने वाली बैठक में पेंशनरों को भी आंदोलन में शामिल करने का निर्णय लिया जा सकता है।