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उत्तराखंड में नौ साल की बच्ची जलवायु परिवर्तन से परेशान, उठाया ये कदम

Thu, 30 Mar 2017 10:27 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो / अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 30 Mar 2017 10:27 AM IST
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uttarakhand nine year old girl filed petition in ngt
ngt - फोटो : अमर उजाला

एक तरफ जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों में बढ़ोतरी हो रही है वहीं दूसरी ओर से सरकार प्रभावी कदम उठाने में विफल है।

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इसे देखते हुए नौ साल की एक बच्ची ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में  याचिका दाखिल की है। एनजीटी ने याचिका पर गौर करने के बाद केंद्रीय प्राधिकरणों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले में केंद्रीय वन एवं  पर्यावरण मंत्रालय और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) से दो हफ्तों में जवाब मांगा है।

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जलवायु परिवर्तन संबंधी मुद्दों को भी जांचे-परखें

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जल विद्युत परियोजना

एनजीटी में यह याचिका उत्तराखंड की रिद्धिमा पांडे ने अपने अभिभावक और अधिवक्ता के जरिए दाखिल की है।

रिद्धिमा ने याचिका के तहत मांग की है कि सभी जिम्मेदार प्राधिकरणों को आदेश दिया जाए कि वे परियोजनाओं को पर्यावरण मंजूरी देते समय जलवायु परिवर्तन संबंधी मुद्दों को भी जांचे-परखें। 

सुनवाई के दौरान याची की ओर से पेश एडवोकेट राहुल चौधरी ने कहा कि भारत भी जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों की चपेट में है। वहीं पूरे देश में इसके दुष्प्रभावों को महसूस किया जा रहा है।

वयस्कों के मुकाबले बच्चों पर प्रदूषण का ज्यादा असर

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बनारस में बढ़ता वायु प्रदूषण - फोटो : अमर उजाला

याचिका में कहा गया है कि वयस्कों के मुकाबले बच्चों पर प्रदूषण का ज्यादा असर पड़ता है। खासतौर से जीवाश्म ईंधन जलाए जाने के कारण होने वाले प्रदूषण से वैश्विक स्तर पर  जलवायु परिवर्तन की समस्याएं उपज रही हैं। इनमें समुद्रों के जलस्तर में  बढ़ोत्तरी, मैंग्रोव का खत्म होना, ग्लेशियर का पिघलना और शुद्ध पेयजल  आपूर्ति का प्रभावित होना अहम हैं।

याचिका में हालिया सीएजी की ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर कहा गया है कि केंद्र सरकार जीवाश्म ईंधन को रोकने के मुकाबले नवीकरणीय ऊर्जा को प्रोत्साहित करने और तय लक्ष्यों को हासिल करने में विफल रही है। जलवायु परिवर्तन को लेकर तैयार राष्ट्रीय एक्शन प्लान में भी यह तय किया गया था कि 2012 से 2014 तक विद्युत ऊर्जा के साथ नवीकरणीय ऊर्जा में नौ फीसदी बढ़त हासिल की जाएगी।

हालांकि सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक इस लक्ष्य का आधा यानी 4.28 फीसदी ही हासिल किया जा सका। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पर्यावरणीय कानूनों को लागू करने के मामले में भी कमी महसूस की गई है। जबकि यह एक वैश्विक समस्या बन चुकी है।

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