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उत्तराखंडः आखिर त्रिवेंद्र-मदन की विदाई क्यों?, शपथग्रहण समारोह के बाद सबकी जुबान पर रहा सवाल
Sat, 13 Mar 2021 01:49 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sat, 13 Mar 2021 01:49 PM IST
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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के मंत्रिमंडल में सभी पुराने मंत्रियों को रखा गया है। केवल मदन कौशिक को कैबिनेट से बाहर रखा गया। त्रिवेंद्र के बाद कौशिक की इस विदाई के सियासी मायने टटोले जा रहे हैं। शपथ ग्रहण समारोह के बाद हर किसी की जुबान पर यह सवाल था।
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कौशिक को बेशक भाजपा संगठन की कमान सौंपी गई है और सियासी जानकार इसे उनके राजनीतिक भविष्य के लिए एक बड़ा दांव भी मान रहे हैं, लेकिन सियासी हलकों में यह सवाल रहा है कि आखिर त्रिवेंद्र और कौशिक की ही सरकार से विदाई क्यों हुई? कहीं दोनों दिग्गजों की विदाई की वजह कुंभ का विवाद तो नहीं?
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पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, दोनों चेहरों के बदले जाने के लिए एक बड़ी वजह कुंभ मेले की व्यवस्थाएं मानी जा रही हैं। इन्हें लेकर वहां का साधु-संत समाज खुलकर नाराजगी जाहिर करता रहा है। माना जा रहा है कि यह नाराजगी केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंची, जिसे बेहद गंभीरता से लिया गया।
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मुख्यमंत्री बनते ही संतों के बीच गए तीरथ
मुख्यमंत्री बनने के बाद तीरथ सिंह रावत जिस अंदाज में हरिद्वार कुंभ मेले के पहले शाही स्नान पर्व पर साधु संतों के बीच पहुंचे, उसने उनकी प्राथमिकता को साफ कर दिया। केंद्रीय नेतृत्व उनसे ऐसी ही आशा कर रहा था। कोविड-19 महामारी की बंदिशों के बीच उन्होंने बयान दिया कि कुंभ मेले में लोगों पर कोई रोक-टोक नहीं होगी। उनके इस बयान को साधु संत समाज ने हाथों-हाथ लिया। जिस उत्साह के साथ संतों ने उनका स्वागत किया।
धर्मसंकट में थे त्रिवेंद्र
जानकारों के मुताबिक, साधु संतों की नाराजगी का अंदाजा सरकार को था तो, लेकिन उस पर कोविड-19 महामारी की रोकथाम को लेकर बंदिशों को लागू करने का भारी दबाव था। एक ओर कोर्ट की नजर और दूसरी ओर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशा-निर्देशों को लागू करने का दबाव। इस धर्मसंकट में कुंभ मेले की व्यवस्थाएं प्रभावित हुईं, जो विवाद की वजह बन गया।