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Uttarakhand: नकल कानून की साख पर आई तो मुख्यमंत्री धामी पीछे नहीं हटे, सीबीआई जांच का कठोर फैसला लिया

Tue, 30 Sep 2025 01:50 PM IST
रेनू सकलानी माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Tue, 30 Sep 2025 01:50 PM IST
सार

सीएम धामी ने कहा कि एसआईटी जांच हो रही है, इस बात पर युवा नहीं माने और एक स्वर में सीबीआई जांच की बात कही। फिर उन्होंने कहा, जितनी भी मांगें आई हैं उन पर सरकार की ओर से सकारात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद सीएम धामी की ओर से पेपर लीक प्रकरण की सीबीआई जांच की संस्तुति के बाद बेरोजगार संघ के पदाधिकारियों ने धरना स्थगित करने का फैसला लिया।

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Uttarakhand news when credibility of copying law came into question CM Dhami did not back down
सीएम धामी - फोटो : सूचना विभाग

विस्तार

पेपर लीक प्रकरणों के बाद राज्य के इतिहास में पहली बार किसी सरकार ने इसे रोकने के लिए सबसे सख्त कानून बनाया था। यह कानून मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ऐतिहासिक कदमों में से एक है। खुद सीएम से लेकर भाजपा उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम व निवारण के उपाय) अध्यादेश 2023 को निष्पक्ष-पारदर्शी भर्ती परीक्षा कराने के साथ नकल माफिया पर शिकंजे के लिए बड़ी उपलब्धि मान रहे थे।

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सरकार का मानना है कि सख्त नकलरोधी कानून के लिए 100 से अधिक नकल माफिया को जेल भेजा गया। दूसरी बार नए कानून के तहत जब हाकम सिंह की एक दिन पहले गिरफ्तारी हुई तो सरकार और पार्टी में उत्साह दिखा लेकिन परीक्षा के दिन हरिद्वार के एक केंद्र से प्रश्नपत्र के तीन पेज सोशल मीडिया पर वायरल होने से कहीं न कहीं इस कानून की साख दांव पर लग गई।
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इसे बचाना भी सीएम के लिए एक चुनौती थी। हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की न्यायिक निगरानी में एसआईटी जांच की घोषणा की लेकिन आंदोलन कर रहे युवाओं ने सेवानिवृत्त जज बीएस वर्मा के भाजपा नेताओं से रिश्ते निकाल दिए। सरकार ने अगले दिन हाईकोर्ट के रिटायर्ड न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की अध्यक्षता में आयोग का गठन किया। अब सीबीआई जांच का कठोर फैसला लिया।

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