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उत्तराखंड : देवस्थानम बोर्ड पर मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत और त्रिवेंद्र सिंह रावत जुदा-जुदा
Sun, 11 Apr 2021 09:18 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sun, 11 Apr 2021 09:18 AM IST
सार
- त्रिवेंद्र बोले, हमने एक भी नया मंदिर देवस्थानम बोर्ड में नहीं जोड़ा था, बोले- बदरी और केदारनाथ मंदिर तो पहले एक्ट से संचालित होते थे
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मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह
- फोटो : ट्विटर
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विस्तार
उत्तराखंड देवस्थानम बोर्ड पर पुनर्विचार करने और 51 मंदिरों को बाहर रखने की घोषणा पर मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जुदा-जुदा नजर आ रहे हैं।
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पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि उनकी सरकार में चारधाम देवस्थानम बोर्ड में एक भी मंदिर शामिल नहीं किया गया था। श्री बदरीनाथ और श्री केदारनाथ के मंदिर बदरी-केदार मंदिर समिति के जरिए एक एक्ट से पहले से ही संचालित होते हैं। इसी के तहत 51 मंदिर आते हैं।
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देवस्थानम बोर्ड पर त्रिवेंद्र की इस प्रतिक्रिया को मुख्यमंत्री के उस बयान पर असहमति के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने कहा कि 51 मंदिर बोर्ड से बाहर किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को हरिद्वार में चारधाम देवस्थानम बोर्ड के फैसले पर पुनर्विचार करने और 51 मंदिरों को बोर्ड से बाहर रखने की घोषणा की थी।
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पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र से जब इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यमुनोत्री धाम मंदिर को एसडीएम की देखरेख में संचालित किया जाता है। वर्ष 2003 तक श्री गंगोत्री धाम का मंदिर में भी प्रशासक के तौर पर एसडीएम की देखरेख में संचालित होता था। अब किन कारणों से एसडीएम की व्यवस्था बदली उसके लिए पिछला अध्ययन करना पड़ेगा।
सरकार का देवस्थानम बोर्ड बनाने का उद्देश्य केवल वहां आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्था का संचालन करना था। खुद मंदिर समितियों ने माता वैष्णोदेवी श्राइन बोर्ड की तर्ज पर यहां भी बोर्ड बनाने का सुझाव दिया था। यहां तक कि समितियां श्री पूर्णागिरी और श्री चितई के लिए भी ऐसी व्यवस्था चाहते रहे।
जहां तक वर्षों से इन मंदिरों में पूजा अर्चना कर रहे पंडों और पुरोहितों के हक- हकूक की बात है, हमने उनसे कोई छेड़छाड़ नहीं की। क्योंकि पंडा-पुरोहित सैकड़ों वर्षों से इन मंदिरों में पूजा अर्चना करते हैं इसलिए उनके अधिकारों को बनाए रखा गया। केवल यात्रियों के लिए बेहतर प्रबंधन के लिए बोर्ड का गठन किया गया।
अच्छा है महालक्ष्मी योजना का नाम मिल गया
जच्चा बच्चा के लिए उनके समय में शुरू की गई सौभाग्यवती योजना का नाम बदलकर कैबिनेट में महालक्ष्मी योजना किए जाने के सवाल पर पूर्व सीएम ने कहा कि अच्छा है कि योजना को महालक्ष्मी जैसा व्यापक नाम मिल गया।