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उत्तराखंड: हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट पर नाराज हुईं उमा भारती, ट्वीट कर कहा- नदी से किया हिंसक खिलवाड़

Fri, 12 Nov 2021 09:18 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 12 Nov 2021 09:18 PM IST
सार

हिमालय क्षेत्रों के देवालयों और मां गंगा में अगाध श्रद्धा रखने वाली पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने शुक्रवार को ट्वीट किए। उन्होंने श्रीनगर के पास अलकनंदा पर बने श्रीनगर हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है।

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uttarakhand news: Uma Bharti got angry over srinagar hydro power project
उमा भारती (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

विस्तार

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हिमालय से विदा होते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती अलकनंदा नदी पर बने श्रीनगर हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट को देखकर नाराज हो गईं। बेहद भावुक अंदाज में उन्होंने कहा कि अलकनंदा के दो टुकड़े करने जैसा हिंसक खिलवाड़ उन्होंने पहली बार देखा है। उन्होंने इस बाबत पीएमओ और मंत्रालय को ट्वीट कर अपनी नाराजगी जताई।

हिमालय क्षेत्रों के देवालयों और मां गंगा में अगाध श्रद्धा रखने वाली पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने शुक्रवार को ट्वीट किए। उन्होंने श्रीनगर के पास अलकनंदा पर बने श्रीनगर हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। एक के बाद एक ट्वीट करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कहा कि वो आज हिमालय से विदा ले रही हैं, लेकिन श्रीनगर से गुजरते हुए उन्होंने गंगा की जो हालत देखी है, उससे वो बेहद आहत हैं।

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उचित कार्रवाई की बात कहते हुए ट्वीटर पर प्रधानमंत्री को किया टैग
उमा भारती ने इसका एक वीडियो भी बनाया है, जिसे उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राज्य सरकार, जल शक्ति केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को उचित कार्रवाई की बात कहते हुए ट्वीटर पर टैग किया है। उमा भारती ने कहा कि उनके गंगा अभियान का मुख्य उद्देश्य मां धारी देवी थीं जो कि बदरी-केदार के रास्ते में स्थित श्रीनगर के पास अलकनंदा (गंगा) के किनारे आसीन थीं। वहां पर राज्य एवं केंद्र सरकार की अनुमति से एक प्राइवेट पार्टी ने पावर प्रोजेक्ट लगाने की चेष्टा की, जिसने धारी देवी को डुबा दिया और गंगा की अविरलता खंडित हो गई।
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उन्होंने आगे लिखा कि गंगा मंत्रालय ने साल 2018 में एक नोटिफिकेशन जारी किया था कि गंगा नदी की धारा किसी भी प्रोजेक्ट में खंडित नहीं होनी चाहिए और हमने उसको पर्यावरणीय प्रवाह नाम दिया था। लेकिन आज (शुक्रवार) दोपहर को ही उन्होंने श्रीनगर में लगे हुए पावर प्रोजेक्ट का बेशर्म एवं निर्दय उल्लंघन देखा है। कई किमी का एक ऐसा हिस्सा दिखाई दिया, जहां पानी तक नहीं था। पावर प्रोजेक्ट के पीक आवर के लिए पूरी गंगा का पानी रोककर नदी के दो टुकड़े कर दिए।

तब धरने पर बैठी थीं उमा और पूर्व मंत्री निशंक

उमा भारती का यह मनाना है कि अगर स्थानीय जनता उनका साथ देती तो वो मंदिर को डूबने नहीं देतीं। इस पूरे मामले में तब स्थानीय लोग दो धड़ों में बंट चुके थे। एक पक्ष बांध निर्माण के विरोध में था और दूसरा बांध बनाने के पक्ष में। अधिकांश लोग वो थे, जो बांध से प्रभावित थे।

जब धारी देवी की मूर्ति को मूल स्थान से उठाया जा रहा था तो इसको लेकर पूर्व जल संसाधन मंत्री उमा भारती और पूर्व मुख्य मंत्री रमेश पोखरियाल मंदिर में धरने पर भी बैठे। लेकिन इसके बाद भी मंदिर के मूल स्थान से मां धारी देवी की मूर्ति को अपलिफ्ट किया गया, जिसका दु:ख आज तक उमा भारती को होता है।

220 से 330 मेगावाट की गई परियोजना
श्रीनगर जलविद्युत परियोजना को वर्ष 2004 में जीवीके कंपनी ने डेकन कंपनी से लिया था। तब इसके निर्माण को 220 मेगावाट रखा गया था, लेकिन बाद में इस परियोजना को बढ़ाते हुए 330 मेगावाट किया गया। जिसके चलते नदी की झील का फैलाव और गहराई भी बढ़ी। श्रीनगर जलविद्युत परियोजना से वर्ष 2015 से लगातार बिजली उत्पादन हो रहा है।

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