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चारधाम यात्रा 2019: लामबगड़ में 45 घंटे बाद सुचारू हुआ बदरीनाथ हाईवे, लेकिन खतरा बरकरार 

Thu, 05 Sep 2019 09:48 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 05 Sep 2019 09:48 AM IST
सार

- हाईवे खुलने के बाद बदरीनाथ से 40 यात्रा वाहन सुरक्षित निकाले
- 500 तीर्थयात्री अपने वाहनों से पहुंचे बदरीनाथ धाम 

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uttarakhand news: today char dham yatra high way and weather update
कुछ इस तरह खतरनाक बना है हाईवे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बदरीनाथ हाईवे लामबगड़ में आज 45 घंटे बाद वाहनों की आवाजाही के लिए खुल गया। हाईवे सुचारू होने पर बदरीनाथ धाम पर आ रहे तीर्थयात्रियों के साथ ही स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली। हालांकि लामबगड़ चट्टान पर अभी भी बड़े-बड़े बोल्डर अटके हुए हैं। जिससे यहां कभी भी फिर हाईवे अवरुद्ध हो सकता है। हाईवे खुलने पर बदरीनाथ धाम में रोके गए 40 यात्रा वाहनों को उनके गंतव्य के लिए भेजा गया। वहीं शाम को देहरादून के कई इलाकों झमाझम बारिश शुरू हो गई। जिससे एक ओर जहां लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिली तो वहीं शहर में जलभराव के हालात पैदा हो गए।

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बदरीनाथ हाईवे बीते मंगलवार को शाम पांच बजे चट्टान का एक बड़ा हिस्सा टूटने के बाद अवरुद्ध हो गया था। चीन सीमा से जुड़ी और बदरीनाथ यात्रा का एकमात्र मार्ग होने के कारण प्रशासन की ओर से एनएच पर हाईवे को यथाशीघ्र खोलने का दबाव बनाया गया। जिसके बाद खतरे के बीच ही एनएच की कार्यदायी संस्था मेकाफेरी कंपनी की दो जेसीबी मशीनों से आज दोपहर दो बजे हाईवे को सुचारू किया गया।

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हाईवे सुचारु होने के बाद लगभग 500 तीर्थयात्री अपने वाहनों से बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा पर गए। गोविंदघाट थाने के थानाध्यक्ष बृजमोहन राणा ने बताया कि लामबगड़ में बदरीनाथ हाईवे को सुचारू कर दिया गया है। यहां पर पुलिस और एसडीआरएफ की टीम तैनात की गई है। चट्टान से बोल्डर और मलबा आने पर हाईवे पर वाहनों की आवाजाही रोक दी जाएगी। फिलहाल यात्रा सुचारू रूप से चल रही है। केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री यात्रा सुचारू है। वहीं  पिथौरागढ़ में थल-मुनस्यारी स्टेट हाईवे सहित 11 सड़कें बंद हैं। अन्य दस बंद ग्रामीण क्षेत्र की सड़कें हैं। सड़कों को खोलने का काम जारी है। यहां बादल छाए हैं।

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गुजरात के यात्री की हार्ट अटैक से मौत
यमुनोत्री धाम की यात्रा पर आए गुजरात के एक तीर्थयात्री की हृदय गति रुकने से मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक गुजरात के तीर्थयात्रियों का दल चार धाम यात्रा पर निकला था। इसके तहत बुधवार को सभी लोग जानकीचट्टी से पांच किमी की पैदल चढ़ाई कर यमुनोत्री धाम पहुंचे, लेकिन दोपहर करीब डेढ़ बजे मंदिर से दर्शन करने के बाद लौटते वक्त अचानक 66 वर्षीय प्रवीन भाई पुत्र भगवान भाई निवासी भावनगर, गुजरात की तबियत बिगड़ गई। दल में शामिल अन्य तीर्थयात्री व आसपास मौजूद पुलिस कर्मी उन्हें जानकीचट्टी स्थित स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने यात्री को मृत घोषित कर दिया। चौकी इंचार्ज सतवीर सिंह ने बताया कि यात्री की मौत हृदय गति रुकने से हुई है।
 

स्थायी समाधान नहीं होने से बढ़ा लामबगड़ में भूस्खलन का दायरा

बदरीनाथ हाईवे पर लामबगड़ भूस्खलन क्षेत्र अब नासूर बन गया है। जिम्मेदार विभाग कई वर्षों में इसका स्थायी समाधान नहीं ढूंढ सके हैं। सुधारीकरण के नाम पर भारी भरकम रकम खर्च होने के बावजूद भूस्खलन क्षेत्र का दायरा लगातार बढ़ता ही जा रहा है।

स्थायी ट्रीटमेंट न होने की एक बड़ी वजह के पीछे एनजीटी की रोक भी बताई जा रही है। बताया गया है कि सुधारीकरण कार्य में जुटी मेकाफेरी कंपनी ने लामबगड़ पहाड़ी के शीघ्र भाग से ट्रीटमेंट कार्य शुरू करने के लिए यहां 60 पेड़ों के कटान की अनुमति मांगी थी, लेकिन एनजीटी से इसकी अनुमति नहीं मिलने से यह काम शुरू नहीं हो सका है। 

बदरीनाथ और हेमकुंड यात्रा के साथ ही चीन सीमा से जुड़ा क्षेत्र होने से बदरीनाथ हाईवे सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, इसके बावजूद हाईवे को सुधारने की दशा में धरातल पर गंभीर प्रयास होते नहीं दिखे हैं। आज इस राजमार्ग पर कई डेंजर जोन बन चुके हैं। लामबगड़ भूस्खलन जोन तो खतरनाक रूप ले चुका है। यहां वर्ष 1999 में भूस्खलन शुरू हो गया था। ट्रीटमेंट के नाम पर सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) और लोनिवि एनएच खंड की ओर से भारी भरकम धनराशि खर्च की जा चुकी है, लेकिन अभी तक भूस्खलन का स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सका है।

प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2016 में लामबगड़ भूस्खलन क्षेत्र के सुधारीकरण का कार्य बीआरओ से हटाकर एनएच को दे दिया। एनएच ने मेकाफेरी कंपनी को इसके ट्रीटमेंट के लिए 97 करोड़ रुपये दिए। कंपनी ने अलकनंदा साइड से दीवार का निर्माण कार्य तो किया, लेकिन हाईवे के लिए सिरदर्द बनी चट्टान पर कोई सुधारीकरण कार्य नहीं हो पाया है, जिससे यहां भूस्खलन का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। लामबगड़ चट्टान का करीब 800 मीटर हिस्सा दरक रहा है। थोड़ी बारिश होने पर भी चट्टान से बोल्डर और मलबा तेजी से अलकनंदा तक छिटक रहा है। 

एनजीटी की रोक के चलते लामबगड़ में सुधारीकरण कार्य नहीं हो पा रहा है। लामबगड़ में वैकल्पिक मार्ग के निर्माण के लिए सर्वे भी कराया गया है। यात्रियों की सुरक्षा के लिए पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें लगाई गई हैं। हाईवे को जल्द ही सुचारु कर लिया जाएगा। 
-स्वाति एस भदौरिया, डीएम, चमोली

भारी बारिश से नारायणबगड़ बाजार में आया मलबा

मंगलवार रात को नारायणबगड़ क्षेत्र में बारिश से कॉलोनियों के बाहर मलबा आ गया। लोग बारिश में डर के कारण रातभर अपने घरों से बाहर रहे। सुबह बारिश बंद होने के बाद लागों ने अपने घरों में जाकर राहत की सांस ली। पहाड़ी से आये मलबे में सड़क पर कई वाहन भी फंस गये। सुबह बीआरओ की मशीनों से मलबा हटाकर यातायात बहाल किया गया।

पिछले चार सालों से नारायणबगड़ के ऊपरी भाग में बारिश के दौरान मलबा आने से लोग खौफ के साये में जी रहे हैं। तीन दिन पहले भी बारिश से इंटर कालेज और अस्पताल परिसर में मलबा भर गया था। मंगलवार रात 10 बजे जैसे ही बारिश शुरू हुई तो लोग अपने घरों से बाहर आ गये। इसी दौरान कुछ देर बाद पहाड़ी से मलबा और पत्थर आने से लोगों में अफरा-तफरी मच गई। रात को अपने घर की छतों और आसपास खड़े लोगों ने भागकर जान बचाई। सुबह चार बजे जब बारिश बंद हुई तो लोगों ने राहत की सांस ली और अपने घरों में गये। बारिश में पहाड़ी से आया पूरा मलबा कर्णप्रयाग-ग्वालदम सड़क के अलावा जीत सिंह मार्केट, इंटर कॉलेज गेट और अस्पताल के आगे भर गया।

सुबह जैसे ही सड़क पर वाहन चलने लगे तो कई गाड़ियों के टायर मलबे में धंस गये। बाद में मलबा हटाकर वाहनों की आवाजाही शुरू की गई। व्यापार संघ अध्यक्ष जयबीर कंडारी और स्थानीय निवासी धर्म सिंह ने कहा कि कई बार प्रशासन से पहाड़ी का ट्रीटमेंट करने के लिए कहा जा चुका है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। बार-बार मलबा और कीचड़ आने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश में लोग रात को अपने घरों में जाने से डर रहे हैं और बाजार में धूल उड़ने से दुकानदारों का सामान खराब हो रहा है। उन्होंने तुरंत व्यवस्थाएं दुरस्त करने की मांग की है। 

बारिश से डरते हैं पिंडरघाटी के लोग

आपदा की दृष्टि से संवेदनशील पिंडर घाटी के नारायणबगड़, थराली और देवाल कस्बे सहित 30 गांव खतरे की जद में है। इन गांवों में लोगों को बारिश से ढर लगने लगा है।  पिंडरघाटी में 2010 के बाद लगातार आपदाएं आने से लोग दहशत में हैं।

नारायणबगड़ बाजार में करीब 200 मीटर के दायरे में पूरी जमीन धंस रही है। बलुई दोमट और चिकनी मिट्टी प्रधान क्षेत्र होने से पूरा क्षेत्र संवेदनशील बना है। पिछले दिनों मुख्य बाजार, कॉलेज हॉस्टल और अस्पताल परिसर में मलबा आने से अभी भी हालात बद्तर  हैं। प्रशासन ने भ्याड़ी, त्यूला, छपाली, कालजाबर, झंगोरगाड़ गांवों को अति संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है, जबकि हरमनी, पेनगढ़, चिडिंगा तल्ला, मौणा आदि संवेदनशील श्रेणी में आते हैं। वहीं थराली में भी लगातार भूस्खलन होने से लोग बारिश के दौरान लोग दहशत में हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि गदेरों के किनारे सुरक्षा दीवार तक नहीं बनाई गई है। वर्तमान समय में थराली में 12 से अधिक गांव विस्थापन की लिस्ट में हैं। इसके अलावा देवाल ब्लॉक में रैन, गरसों, पदमल्ला, तलौर, कैल, फल्दियागांव, बमणबेरा, उलंगरा, झलिया, कुलिंग, ल्वाणी आदि गावों में लोग खतरे के साए में जी रहे हैं। रविंद्र सिंह, शीशपाल, जीवन मिश्रा, पुष्कर सिंह, रणजीत सिंह, उमेश, खड़क सिंह, बलवंत आदि ने कहा कि कई बार ग्रामीण डीएम से गांवों की सुरक्षा के लिए गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कोई नहीं सुन रहा है। वही एसडीएम केएस नेगी ने कहा विस्थापन होने वाले गांवों की सूची शासन को भेजी जा चुकी है। गांवों में गदेरों के किनारे सुरक्षा दीवार बनाने की कार्रवाई चल रही है।

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