उत्तराखंड: इस साल प्रदेश की सड़कों पर ज्यादा खतरनाक हो गया सफर, दुर्घटना संभावित क्षेत्र बढ़े
प्रदेश में 2020 तक कुल 715 दुर्घटना संभावित क्षेत्र थे। सबसे ज्यादा नैनीताल जिले में हैं। इन सभी जगहों पर 800 से ज्यादा बोर्ड और संकेतकों को लगा दिया गया था, लेकिन इस साल पूरे सितंबर में पहाड़ों और मैदानी इलाकों में जमकर बारिश हुई।
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इस साल देरी से हुई बारिश के कारण प्रदेश की सड़कों पर सफर पहले से अधिक खतरनाक हो गया है। लगातार यहां दुर्घटना संभावित इलाकों की संख्या में इजाफा हो रहा है। हालांकि, पुलिस हर जगह सुरक्षा के प्रबंध भी कर रही है। मौजूदा चारधाम यात्रा को देखते हुए सड़कों पर यातायात पुलिस की तैनाती भी बढ़ा दी गई है। ताकि, लोगों को यहां आने पर परेशानियों का सामना न करना पड़े।
प्रदेश में 2020 तक कुल 715 दुर्घटना संभावित क्षेत्र
दरअसल, प्रदेश में 2020 तक कुल 715 दुर्घटना संभावित क्षेत्र थे। सबसे ज्यादा नैनीताल जिले में हैं। इन सभी जगहों पर 800 से ज्यादा बोर्ड और संकेतकों को लगा दिया गया था, लेकिन इस साल पूरे सितंबर पहाड़ों और मैदानी इलाकों में जमकर बारिश हुई। इस कारण पहाड़ दरके और सड़कें बह गईं। जैसे-तैसे इन्हें दुरुस्त कराकर यातायात सुचारू किया गया, लेकिन यह इलाके अब दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में तब्दील हो गए हैं। ऐसे नए दुर्घटना संभावित इलाके तकरीबन 40 से 50 मानें जा रहे हैं।
यातायात पुलिस के अनुसार यह फिलहाल अस्थाई क्षेत्र हैं। यहां पर अस्थाई तौर पर संकेतक लगाए जाने के साथ-साथ पुलिस के जवान भी तैनात किए गए हैं। ताकि, इन क्षेत्रों से निकलने वाले वाहनों को आगे की स्थिति के बारे में बताया जा सके। चारधाम यात्रा के मद्देनजर पुलिस ने अतिरिक्त व्यवस्था की है। जहां पर पहाड़ियां दरकने की संभावना है उन क्षेत्रों में पुलिस चेकपोस्ट बनाए गए है। इसके अलावा पुलिस की वेबसाइट पर भी सारे इलाकों के बारे में जानकारी अपलोड की गई है।
कहां कितने दुर्घटना संभावित क्षेत्र
उत्तरकाशी- 25
टिहरी- 58
पौड़ी- 53
चमोली-64
रुद्रप्रयाग- 26
देहरादून- 58
हरिद्वार-34
नैनीताल- 79
ऊधमसिंहनगर- 76
अल्मोड़ा- 65
पिथौरागढ़- 62
चंपावत- 56
बागेश्वर- 59
कुल 715 दुर्घटना संभावित क्षेत्र हैं। करीब 800 जगहों पर चेतावनी बोर्ड व अन्य चीजें लगा दी गई हैं। दुर्घटना संभावित इलाकों में चेतावनी बोर्ड लगवा दिए गए हैं। चारधाम यात्रा के मद्देनजर अतिरिक्त व्यवस्थाएं की गई हैं ताकि, लोगों को परेशानी न हो। इसके साथ ही जहां पर सड़कें धंसी हैं या पहाड़ दरकें हैं वहां पर निगरानी के लिए फोर्स तैनात की गई है। ताकि, समय रहते लोगों को सूचना दी जा सके।
- मुख्तार मोहसीन, डायरेक्टर ट्रैफिक