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पहाड़ में सोलर निवेशकों का दर्द : दिन के समय कई-कई घंटे बिजली कटौती से सौर ऊर्जा उत्पादन घटा

Wed, 18 Aug 2021 12:23 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal राकेश खंडूड़ी , अमर उजाला, देहरादून
राकेश खंडूड़ी , अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 18 Aug 2021 12:23 PM IST
सार

प्लांट लगाने के लिए बैंक से उठाए गए कर्ज की किस्तें चुकाने के लिए यह जरूरी है कि उनके सौर ऊर्जा संयंत्र क्षमता के अनुरूप उत्पादन करें ताकि उन्हें पर्याप्त आय हो सके, लेकिन टिहरी से लेकर उत्तरकाशी तक जहां-जहां सोलर प्लांट लगाए जा चुके हैं, वहां विकासकर्ता बिजली कटौती को लेकर व्यथित हैं।

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uttarakhand news: Solar power production reduced due to power cuts for several hours in mountain area
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

पहाड़ में सौर ऊर्जा के जरिये आत्मनिर्भर बनाने की राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना की राह में बाधाएं खत्म होने का नाम नहीं ले रहीं। कोविडकाल की दुश्वारियों के बीच जिन स्थानीय लोगों ने करोड़ों की लागत से सौर ऊर्जा के संयंत्र स्थापित किए अब वे सुबह से शाम तक घंटों बिजली कटौती की समस्या से परेशान हैं। 

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बत्ती गुल होने से उन्हें खासा घाटा हो रहा है। प्लांट लगाने के लिए बैंक से उठाए गए कर्ज की किस्तें चुकाने के लिए यह जरूरी है कि उनके सौर ऊर्जा संयंत्र क्षमता के अनुरूप उत्पादन करें ताकि उन्हें पर्याप्त आय हो सके, लेकिन टिहरी से लेकर उत्तरकाशी तक जहां-जहां सोलर प्लांट लगाए जा चुके हैं, वहां विकासकर्ता बिजली कटौती को लेकर व्यथित हैं।
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एक साल में 400 घंटे पावर कट
उत्तरकाशी जिले के टिकरी गांव में 200 किलोवाट का सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने वाले विकासकर्ता आमोद पंवार के मुताबिक, पिछले एक साल में उन्हें 400 घंटे बिजली कटौती की मार झेलनी पड़ी। कटौती होने से उन्हें हर महीने 35 हजार का नुकसान हुआ। उन्होंने प्लांट लगाने के लिए एक करोड़ का निवेश किया है, जिसमें उन्होंने 80 लाख रुपये का लोन लिया है। आमोद के मुताबिक, वह विद्युत नियामक आयोग में याचिका दायर कर नुकसान की भरपाई की मांग करेंगे।
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ये चार बड़ी समस्या  
1. सोलर तभी उत्पादन करता है जब बिजली आती है। जब बिजली बंद हो जाती है तो उत्पादन बंद हो जाता है। पहाड़ में शट डाउन की समस्या है। इसके लिए समयसीमा के मानक तय नहीं हैं। 
2. उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने डीम्ड जनरेशन का मानक तय कर रखा है। इससे शटडाउन से होने वाले नुकसान की भरपाई होगी लेकिन यह नाकाफी है। इसमें संशोधन की जरूरत है। 
3. मीटिरिंग सिस्टम ऑनलाइन नहीं है, जबकि सभी सोलर प्लांट्स में ऑटोमेटिक मीटर रीडर (एएमआर) लगे हैं। 
4. पहाड़ और मैदानी क्षेत्र की लागत को एक माना गया है। जबकि पहाड़ में प्लांट लगाने की लागत ज्यादा होती है।

पहाड़ में तस्वीर बदल सकती है योजना
सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने वाले विकास कर्ताओं का मानना है कि अगर बिजली कटौती, बैंक लोन और भू उपयोग परिवर्तन की समस्याओं का इलाज हो गया तो सौर ऊर्जा योजना पहाड़ में रोजगार की तस्वीर बदल सकती है। खेतों में ऊर्जा का उत्पादन करने के साथ खेती व बागवानी भी की जा सकती है।

283 में से 67 परियोजनाएं पूरी
मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के तहत आवंटित 283 परियोजनाओं में से  67 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। 130 परियोजनाओं पर काम चल रहा है। योजना के लिए सरकार को 1051 आवेदन प्राप्त हुए थे। जिनें से 416 को परियोजना आवंटन पत्र जारी हुए थे। 

बिजली कटौती का मामला हमारे संज्ञान में है। यह मसला यूपीसीएल के स्तर पर भी उठाया गया है। ऐसी स्थिति में विकास कर्ता को राहत देने के लिए विद्युत नियामक आयोग ने व्यवस्था दे रखी है, लेकिन इसमें और सुधार की आवश्यकता है। इसलिए आयोग को एक याचिका दी जा रही है ताकि विकासकर्ता को राहत मिल सके। 

- एके त्यागी, मुख्य परियोजना अधिकारी, उत्तराखंड अक्षय विकास अभिकरण ऊर्जा (उरेडा) 

बिजली कटौती पहाड़ में एक बड़ी समस्या है। विकासकर्ताओं ने बैंक से लोन लेकर प्लांट इस उम्मीद से लगाए हैं कि सौर ऊर्जा के उत्पादन से होने वाले राजस्व से वे अपनी कर्ज की किस्तें चुका देंगे, लेकिन पूरे पहाड़ में बिजली कटौती की समस्या है। सरकार को इस समस्या का समाधान करना चाहिए या विद्युत नियामक आयोग ऐसी व्यवस्था करे कि विकासकर्ताओं के नुकसान की पूरी भरपाई हो सके। 
- मनीष राजकेश, महासचिव, उत्तराखंड सौर ऊर्जा विकासकर्ता संघ

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