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आसमानी हलचल: पृथ्वी के करीब आया शनि, आसानी से देख सकते हैं इसके छल्ले और चांद

Sat, 31 Jul 2021 04:05 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal डॉ. गिरीश रंजन तिवारी, अमर उजाला, नैनीताल
डॉ. गिरीश रंजन तिवारी, अमर उजाला, नैनीताल Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 31 Jul 2021 04:05 PM IST
सार

सूर्य के चारों ओर अपनी कक्षाओं में घूमते हुए शनि और पृथ्वी दो अगस्त को तो एक दूसरे के सर्वाधिक निकट हो जाएंगे। बहुत निकट होने के कारण वैसे भी इन दिनों  शनि ग्रह बेहद चमकीला नजर आ रहा है।

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uttarakhand news : saturn came closest to earth see its rings and moon
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : NASA

विस्तार

इन दिनों आकाश में बेहद आकर्षक नजारा दिखाई दे रहा है। आकाश थोड़ा भी साफ हो तो शनि और बृहस्पति सूर्य के परिक्रमा वाले मार्ग पर सारी रात बेहद चमकदार नजर आ रहे हैं। शनि पृथ्वी के बेहद पास है, यहां तक कि साधारण टेलिस्कोप से इसके खूबसूरत छल्ले और चांद देखे जा सकते हैं।

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सूर्य के चारों ओर अपनी कक्षाओं में घूमते हुए शनि और पृथ्वी दो अगस्त को तो एक दूसरे के सर्वाधिक निकट हो जाएंगे। बहुत निकट होने के कारण वैसे भी इन दिनों  शनि ग्रह बेहद चमकीला नजर आ रहा है।
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पृथ्वी से शनि की दूरी लगातार बदलती रहती है क्योंकि दोनों ग्रह लगातार अलग-अलग मार्ग पर अंतरिक्ष में यात्रा करते हैं। इस यात्रा में जब ये दोनों निकटतम होते हैं तो उनके बीच की दूरी एक अरब बीस करोड़ किलोमीटर होती है जो कि पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी से आठ गुना अधिक है।
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ये स्थिति तब होती है जब ये दोनों ग्रह सूर्य के एक ही तरफ  की कक्षाओं में आमने-सामने होते हैं। जब पृथ्वी और शनि आपस में सूर्य की विपरीत दिशाओं में पहुंच जाते हैं  तो वे एक दूसरे से सर्वाधिक दूरी एक अरब  65 करोड़ किमी पर होते हैं जो  पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी से 11 गुना है।

शनि ग्रह अंतरिक्ष में 34000 किमी प्रति घंटे की तीव्र गति से पृथ्वी के 29.5 वर्षों में सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करता है। इस दौरान हर एक वर्ष और 13 दिन के बाद एक बार शनि और पृथ्वी निकटतम दूरी पर होते हैं।  इस वर्ष यह अवसर दो अगस्त की रात को पड़ेगा।

इस रात शनि के छल्ले पृथ्वी की सीध में होंगे और इनके बर्फीले कण सूर्य की रोशनी पड़ने से चमकीले नजर आएंगे जो एक साधारण टेलिस्कोप या दूरबीन से देखे जा सकेंगे। साथ ही शनि के कुछ चांद भी देखे जा सकेंगे।

आर्य भट्ट शोध एवं प्रेक्षण विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. शशिभूषण पांडे ने बताया कि  शनि ग्रह अब अक्तूबर तक रात भर आकाश में पूर्व से पश्चिम की ओर सूर्य वाले मार्ग पर ही नजर आएगा।

बहुत विशाल लेकिन वजन में हल्का है शनि

शनि हमारे सौर मंडल में आकार के हिसाब से बृहस्पति के बाद दूसरे नंबर का ग्रह है। इसकी विशालता का अंदाज इन तथ्यों से लगाया जा सकता है कि शनि का व्यास भूमध्यरेखा पर पृथ्वी के व्यास का 9.44 गुना, क्षेत्रफल पृथ्वी से 83.7 गुना, आयतन पृथ्वी से 763.6 गुना, वजन पृथ्वी से 95.2 गुना ज्यादा है लेकिन गैसीय संरचना के कारण इसका घनत्व पृथ्वी के मात्र दसवें हिस्से के बराबर है यानी शनि आसानी से पानी में तैर सकता है।

हाल ही में सर्वाधिक चंद्रमाओं वाला ग्रह बन गया शनि
लगभग पौने दो वर्ष पूर्व तक 79 चंद्रमाओं के साथ बृहस्पति ग्रह चंद्रमाओं का राजा कहलाता था। शनि 62 चंद्रमाओं के साथ दूसरे नंबर पर था। अक्तूबर 2019 में वैज्ञानिकों ने शनि के 20 नए चंद्रमाओं की खोज की पुष्टि की तब से शनि सर्वाधिक 82 चंद्रमाओं वाला ग्रह बन गया है।

इन नए खोजे गए सभी चंद्रमाओं का व्यास लगभग पांच किलोमीटर है। इनमें से सत्रह शनि ग्रह की परिक्रमा पीछे की ओर उल्टी दिशा में करते हैं। अन्य तीन शनि के घूमने की दिशा में ही परिक्रमा करते हैं। शनि के निकट के चंद्रमा दो वर्ष में जबकि दूर के चंद्रमा तीन वर्ष से अधिक में उसकी परिक्रमा करते हैं।

पृथ्वी से नजर आते हैं केवल सात चांद
शनि ग्रह के सात चंद्रमा ऐसे हैं जिन्हें पृथ्वी से साधारण टेलिस्कोप से देखा जा सकता है। इनमें सबसे प्रमुख है टाइटन। अन्य में रिया, डायोन, टेथिस, एन्सेलेडस और मीमास शामिल हैं। शनि के अनेक चांद ऐसे भी हैं जिनका अभी नाम नहीं रखा गया है।

पीछे से आ रहा बृहस्पति भी 19 को होगा सर्वाधिक निकट
बृहस्पति ग्रह भी इन दिनों पृथ्वी के बहुत निकट और चमकीला नजर आने लगा है। 19 अगस्त को यह भी पृथ्वी के सर्वाधिक निकट होगा। अपनी कक्षाओं में सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हुए जब बृहस्पति और पृथ्वी सूर्य की विपरीत दिशाओं में सर्वाधिक दूरी पर होते हैं तब उनके बीच की दूरी 96 करोड़ 80 लाख किमी होती है और जब वे सूर्य की एक ही दिशा में सबसे नजदीक आते हैं तो यह दूरी 38 करोड़ किमी घट कर 58 करोड़ 80 लाख किमी रह जाती है।

यह स्थिति प्रत्येक 399 दिन में आती है। इस वर्ष ये दोनों ग्रह 19 अगस्त को सबसे निकट होंगे। इस दौरान बृहस्पति शुक्र्त ग्रह से भी ज्यादा चमकीला नजर आता है। एक सामान्य दूरबीन से भी बृहस्पति की विभिन्न रंगीन पट्टियां और चार चांद यूरोपा, लोए गैनीमीड और कैलिस्टो नजर आ सकते हैं। अगस्त से नवंबर तक भी बृहस्पति आकाश में साफ  और बहुत चमकीला नजर आएगा।

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