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रस्किन बांड की 'द सांग ऑफ इंडिया' पुस्तक लांच, 16 साल की उम्र से लेकर लेखक बनने की कहानी को पिरोया
Wed, 29 Jul 2020 04:08 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Wed, 29 Jul 2020 04:08 PM IST
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ruskin bond
- फोटो : File Photo
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मशहूर अंग्रेजी लेखक और पद्मभूषण रस्किन बांड की जिंदगी पर आधारित किताब द सांग ऑफ इंडिया दिल्ली में लांच की गई। इस किताब में रस्किन के 16 साल की उम्र से लेकर लेखक बनने तक की कहानी को पिरोया गया है। इससे पूर्व उनके जीवन पर आधारित तीन पुस्तकें आ चुकी हैं।
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द सांग ऑफ इंडिया उनके संस्मरण की चौथी किस्त है। इससे पहले उनके संस्मरण से जुड़ी लुकिंग फॉर रेनबो (2017), टेल द क्लाउड्स बाई (2017), कमिंग राउंड द माउंटेन (2019) आ चुकी है। बांड के साहित्यिक जीवन के 70 साल पूरे होने पर दिल्ली में इसका विमोचन हुआ है। यह पुस्तक सन 1951 की पृष्ठभूमि पर लिखी गई है।
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द सांग ऑफ इंडिया में बॉन्ड 16 साल की अपनी अवस्था की कहानी बयां करते हैं और बताते हैं कि कैसे उन्होंने अपनी लेखन यात्रा शुरू करने के लिए संघर्ष किया। स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उनकी मां ने उन्हें 1951 में बेहतर भविष्य के लिए इंग्लैंड के भेज दिया। वहीं जाकर उन्होंने किराने की दुकान और बाद में फोटो स्टूडियो में काम करते हुए अपनी पहली पुस्तक द रूम ऑन द रूफ लिखी। पुस्तक के लिए 50 पाउंड राशि मिलने के बाद वह 1957 में वापस देहरादून चले आए।
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जहां उन्होंने अपनी आजीविका चलाने के लिए छोटी-छोटी कहानियां लिखीं। 1963 में रस्किन पहाड़ों की रानी मसूरी आए और यहां छावनी परिषद में उन्होंने घर लिया। द सांग ऑफ इंडिया में रस्किन द्वारा इंगलैंड में बिताए कुछ सालों का भी याद जिक्र है। उन्होंने अपना पहले धनादेश को प्राप्त करने अपनी कहानी प्रकाशित होने और नए दोस्त मिलने जैसी छोटी-छोटी खुशियों का भी किताब में जिक्र किया है।
उन्होंने कहा कि द सांग ऑफ इंडिया मेरे लंबे लेखन करियर के 70 साल का प्रतीक है जो तब शुरू हुआ जब वह 16 साल के थे। इन सात दशक में उन्होंने बच्चों के लिए और बड़ों के लिए भी सैकड़ों कहानियां लिखीं और 86 की उम्र में भी लिख रहे है। रस्किन बॉन्ड की एक नई किताब द सांग ऑफ इंडिया को पफिन बुक्स, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने प्रकाशित किया है।