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उत्तराखंड: राजाजी टाइगर रिजर्व में सफारी बंद, अब 15 नवंबर से दोबारा होगी शुरू

Fri, 08 Oct 2021 09:08 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Fri, 08 Oct 2021 09:08 PM IST
सार

नई दिल्ली निवासी अधिवक्ता गौरव कुमार बंसल की ओर से दाखिल किए गए प्रार्थनापत्र पर सुनवाई करते हुए एनटीसीए के सहायक वन महानिरीक्षक हेमंत सिंह की ओर से मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को लिखे पत्र में टाइगर रिजर्व को पर्यटकों के लिए खोलने पर कड़ी आपत्ति जताई है।

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Uttarakhand News: Rajaji Tiger Reserve Closed for Tourist after NTCA Objection
जंगल सफारी - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

राजाजी टाइगर रिजर्व को पर्यटकों के लिए 15 नवंबर के बजाय एक अक्तूबर से ही खोले जाने पर नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) ने कड़ी आपत्ति जताई है। साथ ही मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को टाइगर रिजर्व को तत्काल पर्यटकों के लिए बंद करने के आदेश जारी किए हैं। 

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इसके अलावा एनटीसीए के सहायक वन महानिरीक्षक ने मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के आदेश पर हाल ही में सत्यनारायण मंदिर से लेकर कासरो तक और चीला रेंज में क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट जोन में नए सफारी कॉरिडोर बनाने और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए दोनों कोरिडोर को भी तत्काल प्रभाव से पर्यटकों के लिए बंद करने के आदेश जारी किए हैं।
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नई दिल्ली निवासी अधिवक्ता गौरव कुमार बंसल की ओर से दाखिल किए गए प्रार्थनापत्र पर सुनवाई करते हुए एनटीसीए के सहायक वन महानिरीक्षक हेमंत सिंह की ओर से मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को लिखे पत्र में टाइगर रिजर्व को पर्यटकों के लिए खोलने पर कड़ी आपत्ति जताई है।

कहा कि टाइगर रिजर्व को अक्तूबर में खोला जाना और क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट जोन में पर्यटन गतिविधियां बढ़ाना वन्यजीव संरक्षण अधिनियम-1972 और एनटीसीए की ओर से जारी राष्ट्रीय व्याघ्र संरक्षण अधिनियम का खुला उल्लंघन है।

एनटीसीए के आदेश के बाद रिजर्व प्रशासन ने टाइगर रिजर्व को तत्काल प्रभाव से पर्यटकों के लिए बंद कर दिया है। निदेशक डीके सिंह ने बताया कि चीला और मोतीचूर रेंज के दोनों गेट पर्यटकों के लिए बंद कर दिए गए हैं। क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट जोन में खोले गए दो नए कोरिडोर को भी सफारी के लिए बंद कर दिया गया है।

जिम कॉर्बेट पार्क का नाम बदलने के पक्ष में नहीं वन मंत्री हरक सिंह

विश्व प्रसिद्ध जिम कॉर्बेट पार्क का नाम बदले जाने को लेकर केंद्र और राज्य के वन मंत्रियों की राय जुदा-जुदा है। जहां पिछले दिनों केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री अश्वनी कुमार चौबे ने जिम कॉर्बेट का नाम बदलकर रामगंगा नेशनल पार्क रखे जाने के संकेत दिए, वहीं राज्य के वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत इस संभावना से खुलकर असहमति जता दी। उनका कहना है कि इसकी न तो कोई जरूरत है और ना ही राज्य की ओर से ऐसा कोई प्रस्ताव केंद्र को गया है। कहा-जिम कॉर्बेट का नाम विश्वविख्यात है। इसलिए पार्क का नाम बदले जाने को कोई औचित्य नहीं है। 

पिछले दिनों केंद्रीय राज्य मंत्री पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन अश्वनी कुमार चौबे ने कॉर्बेट नेशनल पार्क का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने वन अधिकारियों से इसके बारे में विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों के साथ बातचीत में पार्क का नाम रामगंगा नेशनल पार्क रखे जाने पर भी चर्चा की। इतना ही नहीं जाते हुए उन्होंने पार्क की विजिटर बुक पर अपने अनुभव लिखे तो इसमें पार्क का नाम रामगंगा नेशनल पार्क ही लिखा। माना जा रहा है कि  केंद्र सरकार जल्द ही जिम कार्बेट नेशनल पार्क का नाम रामगंगा नेशनल पार्क रखने की घोषणा कर सकती है। 

इस संबंध में प्रदेश के वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने अमर उजाला को बताया कि जिम कॉर्बेट को कुमाऊं या गढ़वाल से नहीं जोड़ा जा सकता। यह पार्क दुनिया में अपनी पहचान रखता है। यह प्रश्न ही औचित्यहीन है। इस बारे में राज्य सरकार की ओर से कोई प्रस्ताव नहीं गया है और न ही केंद्र की ओर से राज्य के पास ऐसा कोई प्रस्ताव आया है।

केंद्रीय मंत्री ने पार्क की विजिटर बुक में पार्क का नाम रामगंगा नेशनल पार्क क्यों लिखा, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा की यदि केंद्र की ओर से वाकई में ऐसा प्रस्ताव है तो जिम कॉर्बेट के साथ रामगंगा नाम भी जोड़ा जा सकता है, लेकिन जिम कॉर्बेट नाम ही हटा देना किसी भी तरह से सही नहीं है। इधर, सूत्रों का कहना है कि अगर केंद्र सरकार अपने स्तर से नाम बदलती भी है तो उसे प्रस्ताव पर राज्य सरकार की मंजूरी भी लेनी होगी। बहरहाल, कॉर्बेट पार्क के नाम पर प्रदेश में एक ही पार्टी के भीतर पक्ष-विपक्ष की राजनीति शुरू हो चुकी है।

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