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Professional Course: उत्तराखंड में महंगी हो सकती है प्रोफेशनल कोर्स की पढ़ाई, सात अक्तूबर को होगा फैसला

Tue, 04 Oct 2022 06:35 AM IST
अलका त्यागी बिशन सिंह बोरा, अमर उजाला, देहरादून
बिशन सिंह बोरा, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 04 Oct 2022 06:35 AM IST
सार

उच्च शिक्षा सचिव एवं नियामक समिति के सदस्य सचिव शैलेश बगोली के मुताबिक निजी विश्वविद्यालयों में संसाधनों के आधार पर फीस तय होगी। इनमें व्यवसायिक पाठ्यक्रमों की फीस तय करने को लेकर प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति बनी है।

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Uttarakhand News: Professional course studies can be expensive
प्रोफेशनल कोर्स की पढ़ाई(प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : pixabay

विस्तार

उत्तराखंड में संचालित हो रहे 21 निजी विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में प्रोफेशनल कोर्स की पढ़ाई जल्द महंगी हो सकती है। इनकी ओर से शासन को औसतन 20 से 30 प्रतिशत फीस वृद्धि का प्रस्ताव भेजा गया है। सात अक्तूबर को प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति की बैठक में इस पर निर्णय होगा।

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उच्च शिक्षा सचिव एवं नियामक समिति के सदस्य सचिव शैलेश बगोली के मुताबिक निजी विश्वविद्यालयों में संसाधनों के आधार पर फीस तय होगी। इनमें व्यवसायिक पाठ्यक्रमों की फीस तय करने को लेकर प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति बनी है। वर्ष 2019 से समिति में अध्यक्ष का पद खाली चल रहा था। यही वजह थी कि समिति की पिछले काफी समय से बैठक न होने से व्यवसायिक पाठ्यक्रमों की फीस रिवाइज नहीं हो पाई थी।
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सरकार ने इसी वर्ष फरवरी में प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति के अध्यक्ष पद पर न्यायाधीश महबूब अली (सेनि.) की नियुक्ति की है। समिति की सात अक्तूबर को बैठक होनी है। इसमें बीएड, एलएलबी, एमबीए, कृषि, उद्यान, बीटेक आदि व्यवसायिक पाठ्यक्रमों की फीस तय होनी है। फीस महाविद्यालयों में संसाधनों के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है।

संसाधनों के हिसाब से फीस तय होगी

फीस को लेकर शिक्षा से संबंधित हर विभाग की अपनी सब कमेटी है, जो प्रस्तावों की स्क्रूटनी के बाद अपनी सिफारिश नियामक समिति को सौंपेगी। हाल ही में समिति की दो से तीन बैठकें हो चुकी हैं। निजी विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों में उपलब्ध संसाधनों के हिसाब से फीस तय की जाएगी।
- शैलेश बगोली, उच्च शिक्षा सचिव एवं शुल्क नियामक समिति के सदस्य सचिव


पांच साल से फीस में कोई वृद्धि नहीं हुई

हर तीन साल में फीस रिवाइज होने की व्यवस्था है, लेकिन पिछले पांच साल से फीस में कोई वृद्धि नहीं हुई। निजी विश्वविद्यालयों ने इस साल औसतन 20 से 30 प्रतिशत फीस वृद्धि का प्रस्ताव भेजा है। शिक्षकों के वेतन एवं महंगाई को देखते हुए फीस में वृद्धि होनी चाहिए।
- सुनील अग्रवाल, उपाध्यक्ष, अखिल भारतीय निजी विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय एसोसिएशन

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