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उत्तराखंड: भालुओं को भी रेडियो कॉलर लगाने की तैयारी, मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने में मिलेगी मदद 

Thu, 02 Sep 2021 10:32 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal अरविंद सिंह, अमर उजाला, देहरादून
अरविंद सिंह, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 02 Sep 2021 10:32 AM IST
सार

मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक जेएस सुहाग ने बताया कि चमोली, रुद्रप्रयाग समेत पर्वतीय जिलों में भालू हर साल इंसानों, पालतू मवेशियों पर हमले कर रहे हैं। इसके चलते हमलावर भालुओं को रेडियो कॉलर लगाने व उनकी निगरानी की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है।

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uttarakhand news: Preparations to put install radio collars on bears
भालुओं को लगाया जाएगा रेडियो कॉलर - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

राज्य के पर्वतीय इलाकों में मानव-भालू संघर्ष रोकने और भालुओं की निगरानी के लिए वन विभाग रेडियो कॉलर लगाने की तैयारी है। भालुओं के लिए वन विभाग की ओर से जर्मनी से अत्याधुनिक रेडियो कॉलर मंगाए गए हैं। पहले चरण में चमोली और रुद्रप्रयाग के चार भालुओं को रेडियो कॉलर लगाया जाएगा। 

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अगले चरणों में अन्य जिलों में भालुओं को रेडियो कॉलर लगाने की तैयारी है। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक जेएस सुहाग ने बताया कि चमोली, रुद्रप्रयाग समेत पर्वतीय जिलों में भालू हर साल इंसानों, पालतू मवेशियों पर हमले कर रहे हैं। इसके चलते हमलावर भालुओं को रेडियो कॉलर लगाने व उनकी निगरानी की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है। इसी के चलते हाथियों और तेंदुओं के बाद अब भालुओं को भी रेडियो कॉलन लगाने की तैयारी है।
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भालुओं के हमले में 56 ग्रामीणों की हो चुकी है मौत
वन विभाग के ही आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2000 से लेकर 2019 के बीच राज्य के उच्च और मध्य हिमालयी क्षेत्रों में विभिन्न जिलों में भालुओं के हमले में 56 लोगों की मौत चुकी है। जबकि 1575 लोग घायल हुए थे। घायलों में तमाम ऐसे ग्रामीण शामिल हैं जो पूरी जिंदगी के लिए अपाहिज हो गए। 
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उत्तराखंड में पाई जाती हैं भालुओं की तीन प्रजातियां 

वन्यजीव विज्ञानियों के अनुसार उत्तराखंड में भालुओं की तीन प्रजातियां पाई जाती हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जहां सफेद भालू पाए जाते हैं। वहीं, मध्य हिमालयी क्षेत्रों में काले भालू बहुतायत में पाए जाते हैं। जबकि, निचले इलाकों में स्लोथ भालू की संख्या ज्यादा है।

वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिथौरागढ़, टिहरी और उत्तरकाशी में 200 भालू चिह्नित किए गए थे। जबकि चंपावत, नैनीताल और बद्रीनाथ जैसे इलाकों में इनकी संख्या 100 से अधिक आंकी गई है। प्रदेश में भालू की वास्तविक संख्या कितनी है, इसका आंकड़ा फिलहाल वन विभाग के पास नहीं है।

भालू के बारे में कुछ रोचक जानकारियां 
- भालू दुनिया के उन चुनिंदा वन्यजीवों में शामिल है, जो धरती के प्रत्येक महाद्वीप में पाए जाते हैं। 
- अमेरिका के अलास्का, कनाडा और रूस में सबसे अधिक भालू पाए जाते हैं।
- भालू का औसत वजन 150 से लेकर 370 किलोग्राम होता है, लेकिन कई ध्रुवीय भालुओं का वजन 1000 किलोग्राम से अधिक पाया गया है।
- भालू 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दूरी तय कर सकता है। 
- कुत्तों और हाथियों की तर्ज पर भालू के भी सूंघने की क्षमता लाजवाब होती है। भालू कई किलोमीटर दूर से ही शिकार की गंध को सूंघ लेता है। 
- मांस और मछली भालू का प्रिय भोजन है।, लेकिन कई भालू पौधों और कीड़ों को भी खाते हैं। 
- भालू बिना आराम किए एक बार में 100 किलोमीटर तैर सकता है।

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