उत्तराखंड: कैट में सुनवाई को नैनीताल सर्किट से दिल्ली स्थानांतरित करने का आदेश खारिज
नैनीताल हाईकोर्ट ने कैट में हो रही सुनवाई को नैनीताल सर्किट से दिल्ली स्थानांतरित किए जाने के आदेश को अपोषणीय मानते हुए खारिज कर दिया है।
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नैनीताल हाईकोर्ट ने संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारियों को बाहर से संविदा पर नियुक्त करने संबंधी केंद्र सरकार की नीति के खिलाफ उत्तराखंड के आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी की याचिका पर सुनवाई की। हाईकोर्ट ने कैट में हो रही सुनवाई को नैनीताल सर्किट से दिल्ली स्थानांतरित किए जाने के आदेश को अपोषणीय मानते हुए खारिज कर दिया है।
चतुर्वेदी ने इन पर्सन इस मामले में कोर्ट में बहस की थी
मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। पूर्व में कोर्ट ने संजीव चतुर्वेदी को इस मामले में स्वयं अपने मामले की पैरवी करने की अनुमति दी थी जिसके बाद चतुर्वेदी ने इन पर्सन इस मामले में कोर्ट में बहस की थी। मामले के अनुसार हल्द्वानी में मुख्य वन संरक्षक के रूप में तैनात संजीव चतुर्वेदी ने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि मामले में उनकी याचिका सुनवाई के लिए ट्रिब्यूनल की इलाहाबाद बेंच, नैनीताल सर्किट से दिल्ली बेंच को स्थानांतरित कर दी गई थी।
उन्होंने फरवरी 2020 में कैट की नैनीताल बेंच के समक्ष एक मामला दायर किया था, जिसमें संयुक्त सचिव और उससे ऊपर के स्तर के अधिकारियों के लिए 360-डिग्री मूल्यांकन (अप्रेजल) प्रणाली और सरकारी पदों पर निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों की सीधी भर्ती की नीति को चुनौती दी गई थी। याचिका में इसे विभिन्न कैडरों के माध्यम से आने वाले अधिकारियों के हितों के भी विरुद्ध बताया गया था। इस पर कैट की नैनीताल सर्किट बेंच सुनवाई कर रही थी। बाद में मामला कैट की दिल्ली पीठ को रेफर कर दिया गया।
सुनवाई नैनीताल में ही करने की अपील
इसे संजीव चतुर्वेदी ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए इस मामले की सुनवाई नैनीताल में ही करने की अपील की थी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि कैट की विभिन्न बेंचों का सुनवाई का अधिकार एक समान है, कोई बेंच दूसरे के अधीन या उससे ऊपर नहीं है। इस मामले में केंद्र सरकार का यह कहना स्वीकार्य नहीं है कि इस मामले में राष्ट्रीय प्रतिक्रिया की संभावना है और नियुक्ति की प्रक्रिया दिल्ली में ही होती है वहीं संबंधित रिकॉर्ड भी उपलब्ध है अत: इसकी सुनवाई दिल्ली में ही की जाए।
कोर्ट ने कहा कि केंद्र के लिए संबंधित रिकॉर्ड यहां भेजना कोई मुश्किल कार्य नहीं है। जबकि हल्द्वानी में सेवारत रहते हुए चतुर्वेदी के लिए हर सुनवाई पर दिल्ली जाना आर्थिक, मानसिक और शारिरिक रूप से भी दुष्कर है। कोर्ट ने चतुर्वेदी की इस दलील को स्वीकार किया कि कैट संबंधी प्रावधानों में कहीं यह उल्लेख नहीं है कि राष्ट्रीय प्रतिक्रिया व परिणाम वाले मामलों की सुनवाई केवल दिल्ली बेंच में ही होगी। ऐसे में मामले को दिल्ली बेंच को स्थानांतरित करने का कोई भी उचित आधार नहीं है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने कैट के उस निर्णय को खारिज कर दिया जिसके तबहत सुनवाई को दिल्ली स्थानांतरित किया गया था।