फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   uttarakhand news: natural oxygen plant peepal is being neglected

पीपल: कुदरती ऑक्सीजन प्लांट होने के बाद भी हो रही पीपल की उपेक्षा, न कोई शोध हो रहा, न ही पौधरोपण

Fri, 09 Jul 2021 02:08 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal अरविंद सिंह, अमर उजाला, देहरादून
अरविंद सिंह, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 09 Jul 2021 02:08 PM IST
सार

वन विभाग के पौधरोपण कार्यक्रमों में भी पीपल वृक्ष सिरे से नदारद है। इतना ही नहीं यदि आम व्यक्ति भी नर्सरियों से पीपल वृक्ष खरीद कर लगाना चाहे तो ज्यादातर में नर्सरियों में पीपल वृक्ष नहीं मिल पा रहे हैं।

विज्ञापन
uttarakhand news: natural oxygen plant peepal is being neglected
पीपल का पेड़ - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

धर्मग्रंथों में पीपल को देववृक्ष की संज्ञा दी गई है। पेरिस में आयोजित जलवायु परिवर्तन महासम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने भी पीपल की महत्ता का जिक्र किया था। कोरोना काल में ऑक्सीजन की अहमियत सबसे मानी। लेकिन ऑक्सीजन का जखीरा माने जाने वाले पीपल को लेकर केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के साथ ही राज्यों के वन महकमे गंभीर नहीं हैं। पीपल पर कोई अहम शोध भी नहीं हो रहा है।

विज्ञापन


वन विभाग के पौधरोपण कार्यक्रमों में भी पीपल वृक्ष सिरे से नदारद है। इतना ही नहीं यदि आम व्यक्ति भी नर्सरियों से पीपल वृक्ष खरीद कर लगाना चाहे तो ज्यादातर नर्सरियों में पीपल वृक्ष नहीं मिल पा रहे हैं। यह स्थिति तब है जबकि केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने सभी राज्यों को पत्र लिखकर पीपल वृक्ष के संरक्षण व उनके संवर्धन को लेकर दिशा निर्देश जारी किए हैं।
विज्ञापन


धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक वृक्षों में सबसे अधिक पवित्र माना गया है पीपल
हिंदू धर्म में पीपल वृक्ष को अन्य वृक्षों की तुलना में बहुत अधिक पवित्र माना गया है पद्म पुराण के अनुसार पीपल वृक्ष में भगवान विष्णु का वास होता है। इसीलिए पीपल वृक्ष को देव वृक्ष भी कहा गया है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक सोमवती अमावस्या को पीपल के वृक्ष में साक्षात भगवान विष्णु और लक्ष्मी का वास होता है, ऐसे में सोमवती अमावस्या जैसे धार्मिक पर्वों पर पीपल की पूजा का प्रावधान है।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रतिदिन 230 लीटर ऑक्सीजन गैस उत्सर्जित करता है पीपल
वैज्ञानिक शोधों में यह बात सामने आई है कि एक पीपल वृक्ष प्रतिदिन औसतन 230 लीटर ऑक्सीजन गैस उत्सर्जित करता है, जिससे सात स्वस्थ लोगों को ऑक्सीजन गैस मिलती है। इतना ही नहीं वैज्ञानिकों की मानें तो पीपल वृक्ष जिस क्षेत्र में अधिक संख्या में होते हैं वहां का औसत तापमान भी अन्य क्षेत्रों की तुलना में 3 से 4 डिग्री कम होता है। जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिलती है। वैज्ञानिक शोधों में यह बात सामने आई है कि पीपल वृक्ष जहरीली कार्बन डाइऑक्साइड गैस को अवशोषित करने के साथ ही प्राणवायु ऑक्सीजन को उत्सर्जित करता है।

बोधि ट्री,  द ट्री ऑफ़ इंटेलिजेंस, दरखते लरांजा जैसे नामों से जाना जाता है पीपल

बता दें कि भारत समेत दुनिया के कई देशों में पाए जाने वाले पीपल को कई नामों से जाना जाता है। आम हिंदी भाषा में जहां इसे पीपल वृक्ष कहा जाता है। वहीं इसे बोधि ट्री, द ट्री ऑफ़ इंटेलिजेंस के नाम से भी जाना जाता है।  संस्कृत भाषा में इसे पिप्पल, मराठी में पिंपल, नेपाली पंजाबी में पीपल, गुजराती भाषा में पीपरों, तमिल में अरशु, मलयालम में अराचू और पर्शियन भाषा में दरखते लरंजा के नाम से जाना जाता है।

चिकित्सकीय गुणों से भरपूर होता है पीपल वृक्ष
बता दें कि पीपल वृक्ष न सिर्फ वैज्ञानिक व धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है वरन पीपल वृक्ष औषधीय गुणों से भी भरपूर होता है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में पीपल के गुणों का विस्तृत वर्णन मिलता है। पीपल की पत्तियों और छाल से घाव, सूजन और दर्द में आराम मिलता है।

पीपल खून को साफ करने के साथ ही सुजोक, कफ, डायबिटीज, लिकोरिया व सांस की बीमारियों में फायदेमंद होता है। इसके अलावा पीपल वृक्ष का उपयोग हकलाहट दूर करने, दमा रोग, शारीरिक कमजोरी, कब्ज, पेचिश, पीलिया , मधुमेह, मूत्ररोग, गले के रोग, बांझपन, चर्मरोग, फोड़ा फुंसी जैसे रोगों को दूर करने में इस्तेमाल किया जाता है।

समुद्र तल से 1000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर पाया जाता है पीपल वृक्ष
वनस्पति विज्ञानियों की मानें तो पीपल वृक्ष समुद्र तल से 1000 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर पाया जाता है। जहां तक मंदसौर विज्ञानियों के मुताबिक देश के उप हिमालई क्षेत्रों के अलावा मध्य भारत के तमाम राज्यों में पीपल बहुतायत से पाया जाता है।

तेजी से बदलते दौर में पीपल की मांग कम है। पूरे साल पीपल के 200 पौधे ही बिक पाते हैं। जबकि पूर्व में पीपल के पेड़ों की मांग ज्यादा थी। पीपल को अब लोग सिर्फ पूजा पाठ के लिए ही खरीद कर ले जाते हैं। 
- विश्वजीत ठाकुर, संचालक ठाकुर नर्सरी

संस्थान के वैज्ञानिकों की ओर से पीपल को लेकर फिलहाल कोई शोध नहीं किया जा रहा है। पीपल वृक्ष को लेकर शोध की जरूरत भी नहीं है। फाइकस प्रजाति के वृक्षों में शामिल पीपल हर जगह पाया जाता है। ऐसे में इसे लेकर शोध की कोई आवश्यकता भी नहीं है।
- अरुण सिंह रावत, निदेशक , वन अनुसंधान संस्थान

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed