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देहरादून: दो साल में भी पूरे नहीं हो पाए ‘दो महीने’, नहीं हो रही राजकीय दून मेडिकल अस्पताल में एमआरआई जांच

Sat, 13 Nov 2021 12:56 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal मनीष चंद्र भट्ट , अमर उजाला, देहरादून
मनीष चंद्र भट्ट , अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 13 Nov 2021 12:56 PM IST
सार

दून अस्पताल में लगाई गई एमआरआई मशीन की जांच के बेहतर परिणाम देने की निर्धारित 10 साल की अवधि लगभग चार साल पहले पूरी हो चुकी थी। समय रहते नई मशीन की खरीद प्रक्रिया शुरू नहीं की गई।

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uttarakhand news: MRI test not done in Government Doon Medical Hospital
doon hospital - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शुमार दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दो साल से एमआरआई जांच नहीं हो पा रही है। इससे मरीज परेशानी झेलने को मजबूर हैं। दो साल से अधिकारी ‘दो महीने’ में कभी टेंडर, आर्डर होने तो कभी एमआरआई मशीन के दून अस्पताल पहुंचने से लेकर और इंस्टॉल कर जांच शुरू किए जाने के दावे करते आ रहे हैं। हैरत की बात है कि ‘दो महीने’ की अधिकारियों की यह अवधि पिछले दो साल से पूरी नहीं हो पाई है।

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समय रहते नई मशीन की खरीद प्रक्रिया शुरू नहीं की गई
दरअसल, दून अस्पताल में लगाई गई एमआरआई मशीन की जांच के बेहतर परिणाम देने की निर्धारित 10 साल की अवधि लगभग चार साल पहले पूरी हो चुकी थी। समय रहते नई मशीन की खरीद प्रक्रिया शुरू नहीं की गई। वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में अस्पताल की ओर से निर्धारित अवधि से दो साल ज्यादा 12 साल तक पुरानी मशीन से मरीजों की एमआरआई जांच की गई। जब जांच परिणाम स्पष्ट आने कम हो गए तो एमआरआई मशीन को बंद कर दिया गया। तब शासन को नई मशीन के लिए बजट का प्रस्ताव भेजा गया। 
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लगभग एक साल पहले सरकार ने पहली किश्त के रूप में लगभग साढ़े छह करोड़ रुपये का बजट भी जारी किया था। बजट मिलने और टेंडर जारी होने के बावजूद कोई भी कंपनी दून अस्पताल में एमआरआई मशीन लगाने को आगे नहीं आई। अधिकारियों ने दोबारा प्रयास किया, लेकिन इस बीच कोरोना काल आने के चलते एमआरआई मशीन लगाने के लिए कंपनियों ने हाथ खींच लिए। जिसके चलते बजट भी लैप्स हो गया। बाद में भी टेंडर जारी किए गए, लेकिन नियम शर्तें आड़े आई। जिस पर किसी कंपनी को इसका टेंडर नहीं मिल पाया। अब जिस कंपनी को टेंडर दिया है उनके इंजीनियर मशीन मंगाने से पहले आजकल अस्पताल के एमआरआई जांच केंद्र में नापजोख आदि कार्य कर रहे हैं।
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निजी केंद्रों में 12 हजार रुपये तक में हो रही एमआरआई जांच 
ऋषिकेेश एम्स को छोड़ दें तो देहरादून के अलावा पर्वतीय और आसपास के जिलों में भी सरकारी अस्पतालों में एमआरआई जांच की सुविधा नहीं है। ऋषिकेश एम्स में जांच के लिए अक्सर मरीजों की वेटिंग कई दिन की रहती है। ऐसे में बड़ी संख्या में एमआरआई जांच के लिए मरीजों को दून अस्पताल पर ही निर्भर रहना पड़ता था। दून अस्पताल में शरीर के एक हिस्से की एमआरआई जांच का शुल्क साढ़े तीन हजार रुपये तय है। जबकि निजी केंद्रों में यह जांच सात हजार से 12 हजार रुपये तक में हो रही है। मजबूरी में लोगों को महंगे शुल्क पर निजी अस्पतालों या डायग्नोस्टिक सेंटर से एमआरआई जांच करानी पड़ती है। इससे सबसे ज्यादा परेशानी आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों और उनके परिजनों को हो रही है। 


कोरोना की वजह से भी एमआरआई मशीन खरीद में कुछ अड़चनें आई। एमआरआई की नई मशीन के लिए एक महीने पहले ऑर्डर किया जा चुका है।  आजकल कंपनी के इंजीनियर और अन्य कर्मचारी दून अस्प्ताल के एमआरआई केंद्र में नापजोख कर रहे हैं। एमआरआई मशीन बोस्टन (अमेरिका) से आनी है। उम्मीद है कि दो महीने में एमआरआई मशीन इंस्टॉल कर दी जाएगी। जिससे मरीजों को दून अस्पताल में एमआरआई जांच की सुविधा मिलने लगेगी।
- डॉ. आशुतोष सयाना, प्राचार्य राजकीय दून मेडिकल कॉलेज

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