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जमीन नहीं कहीं भवन: कैसे खुलेंगे केंद्रीय विद्यालय? अपने ही क्षेत्र में छात्रों को नहीं मिल रही अच्छी शिक्षा

Sun, 14 Jun 2026 10:42 AM IST
Alka Tyagi बिशन सिंह बोरा, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
बिशन सिंह बोरा, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Alka Tyagi Updated Sun, 14 Jun 2026 10:42 AM IST
सार

उत्तराखंड में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। यहां कहीं जमीन नहीं मिल रही तो कहीं पर भवन नहीं है। ऐसे में यहां खुलने वाले केंद्रीय विद्यालयों पर भी संकट दिख रहा है।

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Uttarakhand News Land missing in some places, buildings in others how will Kendriya Vidyalayas open
शिक्षा - फोटो : FREEPIK

विस्तार

उत्तराखंड के दूरस्थ क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और इससे पलायन रुके, इसके लिए केंद्रीय विद्यालय खुलने प्रस्तावित हैं, लेकिन कहीं जमीन नहीं मिल पा रही तो कहीं भवन, ऐसे में इन स्कूलों का संचालन हो ही नहीं पा रहा है।

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टिहरी जिले के नरेंद्रनगर में केंद्रीय विद्यालय को वर्ष 2025 में स्वीकृति मिली लेकिन स्कूल के लिए भूमि और भवन न मिलने से स्कूल अब तक शुरू नहीं हो पाया। वहीं, देहरादून जिले में चकराता के नाम पर केंद्रीय विद्यालय प्रस्तावित है लेकिन चकराता में इसके लिए जमीन न मिलने से कालसी ब्लॉक के जड़वाला में इसे शुरू किया जाना है। यहां ग्रामीण स्कूल के लिए मुफ्त भूमि दे चुके हैं लेकिन यहां भी स्कूल शुरू नहीं हुआ।
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चमोली जिले के सवाड़ में ग्रामीणों ने खुद के प्रयास से केंद्रीय विद्यालय के लिए 15 कमरों का टिन शेड, शौचालय और खेल मैदान तैयार किया है। यहां ग्रामीणों ने अपनी सौ नाली जमीन भी स्कूल के नाम पर दान की है लेकिन पिछले साल सांसद अनिल बलूनी के प्रयास से स्वीकृत इस स्कूल में कक्षाओं का संचालन शुरू नहीं हो पाया है। इसके अलावा राज्य में 40 से अधिक नए केंद्रीय विद्यालय प्रस्तावित हैं, जो सिस्टम की उदासीनता के चलते शुरू नहीं हो पा रहे हैं।
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ऐसे भी हुए प्रयास

केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में उत्तराखंड के हर ब्लॉक में केंद्रीय विद्यालय खोलने की पहल की, जिसे ऑलवेदर रोड प्रोजेक्ट के बाद राज्य के लिए पीएम मोदी की दूसरी सबसे बड़ी सौगात माना जा रहा था। राज्य सरकार भी इसके लिए तय मानक के अनुसार मुफ्त भूमि उपलब्ध कराने के लिए तैयार थी, इसके लिए शासन ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए गए लेकिन जिला प्रशासन तय मानक के अनुसार भूमि और भवन उपलब्ध नहीं करा पाया।

हर साल हजारों बच्चे केंद्रीय विद्यालयों में पढ़ने का सपना देखते हैं, इन विद्यालयों के हर ब्लॉक में खुलने से बच्चों को जहां घर के पास बेहतर शिक्षा मिलती, वहीं इससे पहाड़ से होने वाला पलायन रुकता। इन स्कूलों को खुलवाने में केंद्रीय विद्यालय संगठन नहीं बल्कि केंद्र और राज्य सरकार की अहम भूमिका होती है।
- डॉ.रणवीर सिंह, पूर्व संयुक्त सचिव सीबीएसई

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