फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   uttarakhand news: Kashmiri-Himachali apple now grow in doiwala

उत्तराखंड: कश्मीरी-हिमाचली सेब अब डोईवाला में, कोविडकाल में बागवान विक्रम रावत ने लगाई 72 बीघा में नर्सरी

Mon, 10 Jan 2022 05:01 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून
राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 10 Jan 2022 05:01 PM IST
सार

2019 के दौरान कोविड महामारी में जब पूरा देश जीवन के संघर्ष से जूझ रहा था। लोग अपने हाथों से फिसलते कारोबार के लिए मातम मना रहे थे। हिमाचल के मशहूर बागवान विक्रम रावत अपनी जड़ों की ओर लौटे।

विज्ञापन
uttarakhand news: Kashmiri-Himachali apple now grow in doiwala
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

आसानी से कोई यकीन नहीं करेगा, लेकिन यह सच है कि कश्मीर और हिमाचल में सेब पैदावार बढ़ाने में डोईवाला अहम किरदार निभा रहा है। निसंदेह समुद्रतल से 485 मीटर यानी 1509 फीट की ऊंचाई पर सेब की खेती नामुमकिन है। मगर दोनों हिमालयी राज्यों में आने वाले कुछ वर्षों में सेब की पैदावर में जो इजाफा होगा, उसमें डोईवाला की मिट्टी में तैयार हो रही सेब के रूट स्टॉक की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। 

विज्ञापन


2019 के दौरान कोविड महामारी में जब पूरा देश जीवन के संघर्ष से जूझ रहा था। लोग अपने हाथों से फिसलते कारोबार के लिए मातम मना रहे थे। हिमाचल के मशहूर बागवान विक्रम रावत अपनी जड़ों की ओर लौटे। पौड़ी जिले के मूल निवासी विक्रम ने डोईवाला के छिद्दरवाला क्षेत्र में लीज पर जमीन ली 2020 में वहां सेब के रूट स्टॉक की नर्सरी का काम पूरा किया। करीब 72 बीघा भूमि पर उन्होंने हॉलैंड से लाई गई रूट स्टॉक की क्लोनिंग के जरिये नर्सरी तैयार की। इसमें 37 बीघा पर सेब के ग्राफ्टेड पौधों को बनाया। पूरी नर्सरी में 80 हजार पौधे तैयार हैं। इस नर्सरी में उन्होंने 35 स्थानीय लोगों को रोजगार भी दिया।
विज्ञापन


 हिमाचल और कश्मीर में उनकी नर्सरी के रुट स्टॉक की खासी डिमांड है। बकौल रावत, पहले वह पहाड़ में यह नर्सरी लगाना चाहते थे, लेकिन उन्हें भूमि नहीं मिली। जहां मिली वहां भूमि को लेकर नियम कायदों के इतने झोल थे कि उन्होंने डोईवाला को चुना। उनका मानना है कि यहां की मिट्टी हालांकि उतनी मुफीद नहीं है, फिर भी वह अपने प्रयोगों के जरिये इसे बेहतर बनाने में कामयाब रहे हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


बैंकर से एक सफल बागवान
उत्तराखंड मूल के हिमाचली बागवान विक्रम रावत की यात्रा एक बैंकर से सफल बागवान तक की है। उन्हें हिमाचल प्रदेश में आधुनिक और एकीकृत बागवानी के पर्याय माना जाता है। हिमाचल के करसोग में उनका क्लासन फार्म आज एकीकृत बागवानी का सफल माडल है। यह न सिर्फ सेब की रूट स्टॉक फार्मिंग पर काम कर रहा है, बल्कि सेब की माडर्न फार्मिंग के लिए कंसल्टेंसी भी देता है। 

पौड़ी के डीएम ने पहचाना हुनर, हो गया कायाकल्प 
विक्रम रावत इस उम्मीद के साथ अपने गांव लौटे थे कि वह उत्तराखंड में सेब की आधुनिक खेती की शुरुआत अपने गांव से करेंगे, लेकिन नतीजे बहुत उत्साहित करने वाले नहीं रहे। कुछ समय बाद उनके हुनर को पौड़ी के के पूर्व जिलाधिकारी धीराज गर्ब्याल ने पहचाना। तत्कालीन डीएम ने उनकी मदद से पौड़ी में सेब उत्पादन की पूरी योजना नए सिरे से तैयार की। बकौल रावत, उन्होंने मेरी क्लासन नर्सरी के साथ अनुबंध किया। पौड़ी जिले में सेब के नौ माडल बगीचे चुने। इन बगीचों में हजारों की संख्या पौध लगाए। दशकों से बंजर पड़े पटेलिया फार्म की हरियाली विक्रम के पुरुषार्थ और तत्कालीन जिलाधिकारी के विजन का प्रमाण है। पटेलिया स्थित इस फार्म में हाई डेंसटी एप्पल फार्म के साथ ही रूट स्टॉक नर्सरी तैयार की गई। पटेलिया फार्म पर दो हजार से अधिक सेब के रूट स्टॉक लगाए गए जो अब पूरी तरह से तैयार हैं।

सचिव मीनाक्षी सुंदरम ने भी सराहा
पिछले दिनों सचिव उद्यान डॉ. आर मीनाक्षी सुंदरम ने डोईवाला स्थित नर्सरी का मुआयना किया और विक्रम के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि सरकार के स्तर पर जायका के तहत प्रोजेक्ट तैयार हो रहा है, जिसमें सेब की खेती को प्रोत्साहित करने की भी योजना शामिल है।

छोटी जोतें भी योजना में शामिल हों
समाजसेवी उदित घिल्डियाल का कहना है कि सरकार ने सेब की पैदावर को प्रोत्साहित करने के लिए सब्सिडी की जो योजना तैयार की है, वो पांच नाली से ऊपर तक के लिए है। जबकि पहाड़ में बहुत छोटी जोतें हैं। सरकार को पांच नाली व उससे कम की खेती वाले किसानों को भी योजना में शामिल करना चाहिए।

किसानों को यही समझाता हूं कि इन पौधों में सेब नहीं नोट उगेंगे। सेब की खेती बेहद मुनाफे वाली है। पारंपरिक खेती पर निर्भर कश्मीर और हिमाचल में सेब के पेड़ों की आयु ढलान पर है। ऐसे में उत्तराखंड में असीम संभावनाएं हैं।

- विक्रम रावत, प्रगतिशील बागवान 

यह होता है रूट स्टॉक
रूट स्टॉक पौधे का भूमिगत हिस्सा होता है। इससे भूमि के ऊपर नई जड़ प्रणाली के तहत एक तने के रूप में भी तैयार किया जा सकता है। तने में दूसरे पौधे की एक कली को ग्रॉफ्ट किया जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed