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गजब: विभागीय जांच में मानकों पर खरी उतरी देहरादून की सड़क कई जगह धंसी, पड़ीं दरारें
Sat, 11 Sep 2021 01:22 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
हरीश कंडारी, अमर उजाला, देहरादून
हरीश कंडारी, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sat, 11 Sep 2021 01:22 PM IST
सार
लोक निर्माण विभाग और जिला प्रशासन की जांच में इस सड़क की गुणवत्ता मानकों से अधिक बताई गई, लेकिन यह सड़क पांच माह में ही कई जगह धंस गई है और कहीं जगह पर सड़क पर फिर से दरारें पड़ गई हैं।
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सड़क पांच माह में ही कई जगह धंस गई है
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सरकारी विभाग जांच के नाम पर किस प्रकार से खानापूर्ति कर रहे हैं, इसका उदाहरण देहरादून के आरकेड़िया क्षेत्र की बनियावाला-सेवली की जांच रिपोर्ट को देखकर पता चल रहा है।
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लोक निर्माण विभाग और जिला प्रशासन की जांच में इस सड़क की गुणवत्ता मानकों से अधिक बताई गई, लेकिन यह सड़क पांच माह में ही कई जगह धंस गई है और कहीं जगह पर सड़क पर फिर से दरारें पड़ गई हैं। ऐसे में विभागीय जांच पर सवाल तो खड़े हो ही रहे हैं, साथ ही विभाग और ठेकेदार की मिलीभगत भी सामने आ रही है।
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पांच माह पहले मार्च में लोनिवि की ओर से आरकेड़िया ग्रांट क्षेत्र में लाखों रुपये की लागत से बनियवाला-सेवली रोड़ का निर्माण किया गया, लेकिन सड़क पर बनते ही दरार पड़नी लग गई। जिस पर अमर उजाला ने 22 मार्च को 2021 को ‘शाम को बनी सड़क में सुबह ही पड़ गई दरारें’ शीर्षक से प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। जिला प्रशासन ने इसका संज्ञान लेते हुए लोनिवि को सड़क की गुणवत्ता की जांच का आदेश दिया था। निर्देश के बाद जिला प्रशासन की ओर से जांच समिति का गठन किया गया। जांच समिति का दावा है कि सड़क के अलग-अलग जगह से सैंपल लिए गए। जिसमें सड़क की गुणवत्ता मानकों से कई अधिक सही पाया गया।
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जांच समिति ने दावा कि किया गया कि कुछ स्थानों पर पानी का लीकेज था। उसे भी ठीक करा दिया गया है। लेकिन जांच के नाम पर किस प्रकार की खानापूर्ति की गई। इसका अंदाजा सड़क की हालत को देखते हुए लगाया जा सकता है। करीब एक किमी की सड़क पांच माह में ही कई जगह धंस चुकी है और कहीं जगह सड़क पर फिर दरारें पड़ चुकी हैं।
मुहाने पर तो सड़क बीच में धंस गई है, उसमें गहरा गड्ढा बन चुका है। जिससे इस सड़क पर चलना खतरे से खाली नहीं रह गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब जांच में सड़क की गुणवत्ता मानकों से भी अधिक पाई गई तो, पांच माह में ही सड़क क्यों धंस गई और सड़क पर कैसे दरारें पड़ गईं। ऐसे में विभागीय जांच पर तो सवाल खड़े हो ही रहे हैं, साथ ही विभाग और सड़क बनाने वाले ठेकेदार की आपसी मिलीभगत भी सामने आ रही है।
जहां भी पेयजल और सीवर लाइन डाली गई है, वहां सड़कों में इस प्रकार की दिक्कत सामने आ रही है, क्योंकि बनाते समय सड़कों का भरान ठीक से नहीं हो पाता है। बरसात के बाद सड़क को दिखाया जाएगा और जहां पर खराब हुई है, वहां पर ठीक कर लिया जाएगा।
- पीएस बृजवाल, एसई लोक निर्माण विभाग