उत्तराखंड : प्रदेश में हर चार घंटे में एक महिला अपराध का शिकार, तस्वीर बेहद भयावह
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देवभूमि में महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों की है। यहां हर चौथे घंटे में एक महिला किसी न किसी तरह के अपराध की शिकार होती है। सिर्फ दुष्कर्म की बात करें तो हर साल 500 से ज्यादा महिलाएं अपने साथ हुए इस कृत्य की रिपोर्ट पुलिस के पास दर्ज कराती हैं। जबकि, 60 से ज्यादा महिलाओं को मौत के घाट उतारा जाता है।
पुलिस आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में हर साल करीब (बीते चार सालों में) 2500 से 2600 के बीच महिला अपराध के मुकदमे दर्ज हुए हैं। इस हिसाब से हर माह औसतन 200 से अधिक और हर दिन सात से अधिक महिलाओं के प्रति अपराध होते हैं।
हालांकि, मित्र पुलिस ने इन अपराधों को रोकने में काफी हद तक सफलता भी हासिल की है। इनमें कई तरह के अपराधों में अब कमी दर्ज की गई है। मसलन, एसिड एटैक के मामले बीते पांच सालों से देवभूमि के किसी थाने में दर्ज नहीं हुआ है। महिलाओं की तस्करी के मामले में भी कमी आई है।
वर्ष 2017 व 2018 में 26 व 29 मामलों के सापेक्ष वर्ष 2019 में नौ मुकदमे दर्ज हुए थे। लेकिन, दुष्कर्म के मामलों में कमी देखने को नहीं आई है। पुलिस के तुलनात्मक आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2017 में 390 महिलाओं ने अपने साथ दुष्कर्म की घटनाओं को दर्ज कराया था।
छह माह में प्रदेश में दुष्कर्म के 215 मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं
वहीं वर्ष 2018 में इनमें 25 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई और आंकड़ा 505 पहुंच गया। जबकि, वर्ष 2019 इन मामलों में मामूली बढ़ोतरी हुई और यह संख्या 510 पहुंच गई। इधर, मौजूदा वर्ष में जून तक के आंकड़ों पर गौर करें तो शुरूआती छह माह में प्रदेश में दुष्कर्म के 215 मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं।
अपराध के आंकड़े
अपराध - 2019 - 2018 - 2020
हत्या - 60 - 51 - 13
दुष्कर्म - 499 - 505 - 215
दहेज हत्या- 52 - 62 - 34
व्यपहरण - 273 - 283 - 108
छेड़छाड़ - 37 - 75 - 58
अन्य - 1093 -1347 -
(नोट : वर्ष 2020 के आंकड़े जून माह तक के हैं)
उत्तराखंड पुलिस काफी हद तक महिला अपराधों पर अंकुश लगाने में कामयाब हुई है। प्रदेश में केस रजिस्टर्ड होने की दर भी अधिक है। पुलिस को साफ निर्देश है कि जो भी अपराध पीड़ित आए उसका केस दर्ज जरूर किया जाए। क्योंकि, मुकदमा दर्ज होना भी आधा न्याय माना जाता है।
- अशोक कुमार, डीजी क्राइम, लॉ एंड ऑर्डर उत्तराखंड पुलिस